सचिन पायलट व अशोक गहलोत के फेर में फंसे अजय माकन

-पीसीसी कार्यकारिणी, राजनीतिक नियुक्तियों, मंत्रीमंडल फेरबदल को लेकर माकन असमंजस में। कांग्रेस विधायकों के धरने व डिनर में राज्य प्रभारी की अनुपस्थिति पर सवाल।

जयपुर। किसान आंदोलन के समर्थन में रविवार को कांग्रेस विधायकों के धरने में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पूरे जोश से भाग लिया। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में दिये धरने में पूर्व उप मुख्यमंत्री पायलट भी पूरे जोश से आये।

यही जोश रात्रि को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से विधायकों को दिये रात्रि-भोज में भी दिखा, लेकिन सवाल यह उठता है कि रविवार को जब पूरी कांग्रेस इतने जोश में थी तो राज्य प्रभारी अजय माकन कल पार्टी की यह एकता देखने के लिए मौजूद क्यों नहीं थे।

इतनी दूर क्यों हुए जयपुर-दिल्ली?

दिल्ली से जयपुर इतना दूर नहीं है कि अजय माकन आ नहीं सकें। सवाल है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन क्यों नहीं आये? क्या माकन राज्य में गहलोत और पायलट के बीच जारी शीतयुद्ध से मन-ही-मन नाखुश हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार, सियासी नियुक्तियां, संगठन विस्तार

पीसीसी की कार्यकारिणी, राजनीतिक नियुक्तियां जिस तरह दिल्ली में अटकी है, उसके पार्श्व में गहलोत और पायलट के बीच जारी शीतयुद्ध ही असल वजह है। गहलोत चाहते हैं, कार्यकारिणी बहुत छोटी बने, जिसमें विधायकों, वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जाये।

दूसरी तरफ पायलट पांच साल संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के समायोजन की दुहाई दे रहे हैं और इन दोनों के बीच डोटासरा अपना कोई स्वतंत्र संदेश नहीं दे पा रहे हैं, ऐसा लगता है कि उन पर गहलोत का भारी दबाव है।

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राजनीतिक दबाव में डोटासरा

राजनीतिक नियुक्तियां जिस तरह बस्ते में बंद है, उससे भी माकन खुश नहीं दिख रहे। माकन चाहते हैं कि यह काम जल्द पूरा हो और डोटासरा की भी यही मंशा है।

लेकिन गहलोत चाहते हैं कि राजनीतिक नियुक्तियों में विधायकों को वरीयता दी जाये और उनके अपने करीबी भी समायोजित किये जायें। यहां भी पायलट सामूहिक भागीदारी का सवाल उठा रहे हैं।

राहुल गांधी के नजदीक जाने की ललक

ऐसा लगता है कि फैसला अब राहुल गांधी की मौजूदगी में ही हो सकेगा। अजय माकन अपने स्तर पर यह विवाद सुलझाने में नाकामयाब रहे हैं और रविवार को यदि वे जयपुर होते तो इसका अच्छा सियासी संदेश जाता।

लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी ने कई सवाल खड़े किये हैं। आखिर वह कौन है ? जो नहीं चाहता था कि रविवार को माकन जयपुर में कांग्रेस के धरने व डिनर में मौजूद रहते ? यह सवाल पूरी कांग्रेस में चर्चा का विषय है।

मंत्रीमंडल फेरबदल को लेकर बसपा से आये विधायक और सरकार समर्थक निर्दलीय भी अब परेशान दिख रहे हैं। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और कुछ मौजूदा मंत्री भी तनाव में हैं।

नए साल में पुराना तनाव

इसलिए नये साल के पहले रविवार को कांग्रेस की एकता ऊपरी ही है, अंदर -ही-अंदर घुटन फिर से बढ़ती जा रही है। जब भी मंत्रीमंडल बदलेगा, राजनीतिक नियुक्तियां होगी और कार्यकारिणी आयेगी, असंतोष का बादल फटेगा, यही डर अजय माकन को सता रहा है जो अपनी आंखों से बाड़ेबंदी का नाटकीय घटनाक्रम बीते साल देख चुके हैं और सारी हकीकत जानते हैं।

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