असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात में बीटीपी से किया गठबंधन, कांग्रेस की धड़कनें बढ़ीं

जयपुर/अहमदाबाद। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के रूप में कांग्रेस पार्टी के लिए मुश्किलें बिहार से होते हुए पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के रास्ते गुजरात तक पहुंच चुकी हैं।

हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के द्वारा गुजरात में भारतीय ट्राईबल पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया गया है। यहां पर भारतीय ट्राइबल पार्टी के अध्यक्ष छोटू लाल बसवा के साथ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का गठबंधन हो गया है।

इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने बिहार के चुनाव में 20 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से 5 प्रत्याशी जीतकर विधायक बनने में कामयाब रहे। इसके चलते कांग्रेस पार्टी को और लालू यादव की आरजेडी को भी बड़े नुकसान की संभावना बताई जा रही है।

बिहार चुनाव में मिली सफलता के उत्साहित ओवैसी ने इस साल के शुरुआत में पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव में भी तकरीबन सभी जगह अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने का ऐलान किया है।

इतना ही नहीं, अपितु असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनकी पार्टी के अधिकांश प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे।

इतना ही नहीं, बल्कि पिछले दिनों असदुद्दीन ओवैसी के द्वारा राजस्थान में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान भी कम से कम 40 जगह पर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की गई।

इस बीच राजस्थान में कांग्रेस पार्टी और भारतीय ट्राइबल पार्टी के बीच गठबंधन खत्म हो गया। असदुद्दीन ओवैसी ने इसका फायदा उठाने का प्रयास करते हुए पार्टी के प्रमुख छोटू लाल बसवा के साथ राजस्थान में भी गठबंधन करने की अपील की।

यह भी पढ़ें :  महिला दिवस पर किया सास बहू का सम्मान

किंतु इसके साथ ही असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात में भारतीय ट्राईबल पार्टी के साथ गठबंधन करके वहां पर होने वाले अगले विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों के द्वारा संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी गई है।

यानी कि कुल मिलाकर देखा जाए तो बिहार के चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान होते हुए कांग्रेस की खराब किस्मत गुजरात तक पहुंच चुकी है।

क्योंकि माना यह जा रहा है कि देश में इस वक्त असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मुसलमानों की सबसे बड़ी पार्टी है और अगर यह पार्टी चुनाव लड़ती है तो बिहार की तरह पश्चिम बंगाल उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भी मुस्लिम वोटर्स का ध्रुवीकरण हो सकता है। जिसका सीधा खामियाजा कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ेगा और भाजपा को बड़े पैमाने पर फायदा हो सकता है।