राज्यपाल पर टिप्पणी से आहत राजेन्द्र राठौड़ ने अशोक गहलोत को लताड़ा

जयपुर। जून के महीने में केंद्र सरकार के द्वारा कृषि सुधार के लिए तीन कानून बनाए गए थे। उसके बाद पंजाब और हरियाणा के किसान आंदोलन कर रहे हैं।

इस बीच पंजाब सरकार के बाद राजस्थान सरकार ने भी उन तीन कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए विधानसभा के विशेष सत्र बुलाकर कानून बनाने का काम किया, लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्र के द्वारा उन गैर संवैधानिक कानूनों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

जिसके बाद से लगातार राजस्थान के मुख्यमंत्री प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मुख्य सचेतक समेत कांग्रेस के कई नेता राज्यपाल के कार्यालय पर टीका टिप्पणी कर चुके हैं। इसको लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार और कांग्रेस के नेताओं को लताड़ पिलाई है।

राठौड़ ने एक बयान जारी करके कहा है कि राजस्थान की सरकार ने किसान कल्याण के लिए पास किए गए लोकसभा और राज्यसभा के बिलों पर विधानसभा का सत्र बुलाकर संवैधानिक परंपराओं संवैधानिक अधिकारों से परे हटकर बिलों के अंदर संशोधन करने का काम किया, उसके बाद लगातार राजस्थान के महामहिम राज्यपाल, जो हमारे संवैधानिक प्रमुख है, उसको संविधान ने अधिकार दे रखा है और हमारे लोकसभा-विधानसभा के नियमों प्रतियों में उल्लेख किया गया है कि महामहिम राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति महामहिम राज्यपाल पर इसी प्रकार के कार्यालय पर उनके कार्यालय पर कोई टीका टिप्पणी नहीं कर सकते।

सरकारी मुख्य सचेतक से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री लगातार राजस्थान के महामहिम राज्यपाल पर इस प्रकार बयान दे रहे हैं। मैं समझता हूं कि अगर वह संविधान को जाने वाले विश्लेषकों की राय लेते तो शायद वे इस तरह के टीका टिप्पणी नहीं करते। महामहिम राज्यपाल या उनके कार्यालय के किसी भी कृत्य पर किसी तरह की टीका टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें :  अरुण सिंह ने वसुंधरा राजे खेमे के लोगों को हड़काया!

गौरतलब है कि 1990 से लेकर अब तक हर विधानसभा चुनाव में जीतने वाले राजेंद्र सिंह राठौड़ को विधायी कार्यों में निपुण विशेषज्ञ के तौर पर जाना जाता है। भाजपा की तीन सरकारों में मंत्री रह चुके राजेंद्र राठौड़ सदन के भीतर हर बार सरकार के लिए संकटमोचक की भूमिका में रहते हैं।

उल्लेखनीय है कि 2 दिन पहले ही दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भी राज्यपाल कलराज मिश्र के द्वारा इन कानूनों पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने को लेकर टिप्पणी की थी।