जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस थाने के गेट पर खोली बजरी मंडी

– सोडाला थाने के बाहर बजरी से भरा मिनी ट्रक खड़ा, सप्लायर बोला: जहां कहो जितनी कहो वहां डलवा देंगे।

जयपुर। राजस्थान में नदियों से बजरी निकालने और बेचने पर प्रतिबंध है। माइनिंग डिपार्टमेंट और पुलिस इस पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जयपुर में एक थाने के गेट पर ही रोज बनास की बजरी बिकती है। यही नहीं, सप्लायर बजरी से भरा ट्रक थाने के गेट के बाहर सटाकर खड़ा करता है और वही से बेखौफ बजरी बेचता है।

मामला जयपुर की सोडाला थाने का है। मुख्यमंत्री निवास, राजभवन समेत सभी मंत्रियों के निवास भी इसी थाना इलाके में हैं, वो भी चन्द कदमों की दूरी पर। थाने के बाहर बजरी से भरा मिनी ट्रक खड़ा देख हमारे रिपोर्टर ने पुलिस थाने से लेकर बिजली सप्लायर तक का स्टिंग ऑपरेशन किया तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ गई।

पुलिस वाले तो बजरी से भरा ट्रक खड़ा होने की सूचना देने के बाद भी थाने की बिल्डिंग से बाहर तक नहीं निकले और बजरी सप्लायर ने मुख्यमंत्री घर के पास तक बजरी पहुंचाने तक का दंभ भर लिया।

पुलिस बोली हम कैसे रोक सकते हैं

सोडाला थाने के बाहर बजरी से भरे ट्रक की फोटो क्लिक करने के बाद रिपोर्टर सोडाला थाने पहुंचा तो वह हेड कांस्टेबल कृष्ण कुमार सहित करीब 10 पुलिसकर्मी खड़े थे। उन्हें बताया कि थाने के बाहर बजरी से भरा ट्रक खड़ा है तो पुलिस वाले पहले तो हैरान होकर बोले: ऐसा कैसे हो सकता है?

लेकिन थाने से बाहर निकल कर वहां जाने की जहमत तक नहीं उठाई। दो-तीन बार कहने पर बोले अभी इंचार्ज साहब थाने से बाहर हैं, उनके आने पर दिखाते हैं क्या मामला है? थाने के बाद बजरी की खुलेआम बिक्री पुलिस की शह पर हो रही है, इसका नजारा भी कैमरे में कैद हो गया।

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इसके बाद दूसरे दिन कुछ पुलिसकर्मी सुबह थाने के सामने स्थित शिव मोहन ट्रेंनिंग कंपनी के बाहर खड़े नजर आए। असल में थाने के सामने वाला बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर खुलेआम बेचता है। रोज गुपचुप कई ट्रक मंगवाता है और फिर उन्हें एक जगह करवाने के बाद ट्रैक्टर- ट्रॉली और मिनी ट्रक में भरकर कंस्ट्रक्शन साइट पर बेखौफ होकर महंगे दामों पर सफाई करता है।

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₹700 की बदली बेच रहे हैं 1300 में

पत्रकार: सिविल लाइंस में बजरी चाहिए।

बजरी सप्लायर: डलवा देंगे, सिविल लाइन में तो हवा सड़क के पीछे वाली है ना, बताओ कहां किस जगह?

पत्रकार: मुख्यमंत्री घर के पास भगत वाटिका में।

बजरी सप्लायर: डलवा देंगे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन रात में डालेगी।

पत्रकार: ट्रक वहां कैसे भेजोगे, पुलिस वाले रहते हैं।

बजरी सप्लायर: आप उसकी चिंता मत करो, वह हमारा काम है, आप तो यह बताओ कि कौनसी और कितनी बजरी डलवानी है?

पत्रकार: एक ट्रक बनास की बजरी चाहिए, कितने की आएगी?

बजरी सप्लायर: ₹1300 टन का भाव है, 30 टन में आपका काम हो जाएगा, ट्रक भेज देंगे।

पत्रकार: कम चाहिए तो कैसे मिलेगी?

बजरी सप्लायर: कोई दिक्कत नहीं है दो बार भिजवा देंगे, ट्रैक्टर ट्रॉली या मिनी भिजवा देंगे और पहली बार 1300 रेट लगेगी, अगली बार ₹1200 का भाव दे देना।

पत्रकार: एक बार रेट के बारे में हम पूछ लेते हैं, कब तक भिजवा दोगे?

बजरी सप्लायर: हमारे पास तो अभी भी स्टॉक है, अभी भिजवा देंगे।

पत्रकार: थाने के सामने बजरी बेच रहे हो, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है क्या?

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बजरी सप्लायर: हमारा पुलिस वालों से क्या लेने जाना? हम खुद बजे थोड़े ही निकाल रहे हैं, निकालने वाले हमें डंपर से सप्लाई भेजते हैं और हम तो उसे मार्केट में बेचते हैं।

जब्ती की बजरी नहीं बेच पाई पुलिस

अधिकतर पुलिस थानों की पुलिस ने जप्त की हुई बजरी को माइनिंग डिपार्टमेंट में ₹700 प्रति टन में भेजने के लिए ऑफर निकाला था, तब बजरी नहीं बिकती थी। इसकी वजह है थाने वाले ही जब माफिया की बजरी 1300 टन की कीमत पर भी बेचने में व्यस्त हैं तो थानों के बाहर लगे बजरी की ट्रक कैसे दिखें?

खास बात यह है कि राजस्थान के 8 जिलों में थानों के आसपास लगे अवैध बजरी के ढेर पुलिस के लिए एक तरफ परेशानी बने हुए हैं तो दूसरी ओर पुलिस वाले खुद ही अवैध बजरी की बिक्री में संलिप्त हैं।