बेरोजगारों को नौकरियों का सपना, पिछली सरकार की दर्जनभर भर्तियां रदद्

रामगोपाल जाट। कांग्रेस पार्टी के द्वारा दिसंबर 2018 के चुनाव से पहले अपने जन घोषणापत्र में बेरोजगारों को सरकारी नौकरी देने लंबित भर्तियों का निस्तारण करने और प्रतिमा बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया गया था, लेकिन नई नौकरियां देना तो दूर की बात पिछली सरकार के द्वारा विज्ञप्ति जारी कर घोषित की गई दर्जनभर से ज्यादा भर्तियों को भी रद्द या स्थगित किया गया है।

एक दिन पहले ही राज्य सरकार के द्वारा तीन बड़ी भर्तियों को रद्द करने का ऐलान किया गया था। इनमें से एक ही परीक्षा हो चुकी थी जिसका पेपर लीक होने के कारण बेरोजगार परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। दूसरी परीक्षा जनवरी में होनी थी उसको भी रद्द कर दिया गया है।

सरकार गठन के बाद 31000 पदों पर रीट भर्ती के जरिए बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा करने वाली अशोक गहलोत सरकार अब तक REET परीक्षा का आयोजन नहीं करवा पाई है। इस परीक्षा को लेकर 4 बार तारीखों का ऐलान किया जा चुका है। अब 25 अप्रैल 2021 की तारीख दी गई है।

इन परीक्षाओं को रद्द या स्थगित किया गया

पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा भी 2018 वाली पेपर लीक होने के चलते रद्द की गई थी। इसके बाद पिछले साल 29 दिसंबर को लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दी गई थी।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने पटवारी सीधी भर्ती के 4400 पदों के लिए पहले 26 जनवरी 2020 की थी। फिर 28 फरवरी 2021 कर दी। इसके बाद 10, 17 और 24 जनवरी 2021 कर दिया था। अब इसको स्थगित कर दिया है।

REET भर्ती के 31000 पदों हेतु 2019 में बजट सत्र के दौरान एलान किया गया था। काफी समय बाद इसकी तारीख तय की गई। 2020 के मार्च में कोरोना के कारण स्थगित किया। नवम्बर की घोषणा हुई। इसके बाद अब इस परीक्षा को 25 अप्रैल 2021 को करवाने का दावा किया है।

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फिर भी Reet का विवाद थम नहीं रहा है। अब रीट लेवल प्रथम में बीएड धारियों को भी मौका देने के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के एलान के कारण बीएसटीसी के 3 लाख अभ्यर्थी नाराज हैं। इस परीक्षा में 8 लाख बीएड के और 3 लाख बीएसटीसी के बैठने हैं।

जेईएन भर्ती (सिविल) (डिग्रीधारी) के 533 पदों की भर्ती परीक्षा रद्द की गई है। यह परीक्षा 6 दिसम्बर 2020 को हुई थी। जिसका पेपर आउट हो गया था। अभ्यर्थी लगातार इस परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। सांसद डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। इस एक्जाम में 31752 अभ्यर्थियों ने भाग्य आजमाया था। डिप्लोमा धारी भी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

इससे पहले 18 नवम्बर 2020 को पुलिस दूरसंचार के लिए भी 233 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। हालांकि, यह भर्ती तत्कालीन सरकार द्वारा 2016 में निकाली जा चुकी थी, किन्तु इस सरकार ने इसको दुबारा निकाला था। इसे भी रद्द कर दिया गया है।

दो साल पूर्व 1736 पदों के लिए निकाली गई फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा को भी 13 नवम्बर को रद्द कर दिया गया था। यह एक्जाम 27 तारीख को होना था। इसमें शुरू से ही पदों में वृद्धि की मांग की जा रही है।

इसके साथ ही मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा दो बार स्थगित होने के बाद आयोजित हुई थी। इसकी परीक्षा तीसरी बार स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित करवाई। इससे पहले मंत्री व सेक्रेटरी के बीच भी सीधी भर्ती पर विवाद हो गया था।

33000 पदों पर भाजपा शासन में 2015 में विद्यालय सहायक भर्ती निरस्त की जानकारी अब दी गई है। यह परीक्षा पिछले साल 21 नवम्बर को ही निरस्त हो चुकी है। विद्यार्थी मित्रों के समायोजन के लिए 33493 पदों के लिए भर्ती परीक्षा निकाली गई थी, जिसमें 1203013 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। बोनस अंकों के विवाद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया और सरकार ने भर्ती को ही निरस्त कर दिया।

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इसके साथ ही राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के द्वारा 2000 पदों पर मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा आयोजित करनी थी। पहले 12 जुलाई को, फिर 13 अक्टूबर को इस परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। इस परीक्षा में भी 4500 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

वर्ष 2015 में निकाली गई विद्यालय सहायक भर्ती, 2016 में पुलिस दूरसंचार भर्ती और 2018 में निकाली गई फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा भी निरस्त कर दी गई है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस सरकार के द्वारा कोई नौकरी नहीं दी गई है, अलबत्ता पिछले सरकार के द्वारा निकाली गई भर्तियों को भी लगातार निरस्त या फिर रद्द किया जा रहा है।

बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने कहा है कि “आज की मीटिंग में टेक्निकल हेल्पर AEN JEN सहित 9000 पदों पर भर्तीयो की विज्ञप्ति जारी करने का फैसला एवं टेक्निकल हेल्पर की परीक्षा ऑफलाइन करवाने का और परीक्षा केंद्र राजस्थान देने,आयु सीमा में छूट देने व AEN jen मे GK जोड़ने का फैसला नहीं होता है तो फरवरी में बहुत बड़ा आंदोलन होगा।”

राजस्थान विद्यार्थी मित्र पंचायती सहायक संघ के संयोजक अशोक सिहाग का कहना है कि राज्य सरकार अगर लंबित भर्तियों को समय पर पूरा कर ले तो इसे बेरोजगारों पर आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। यदि भर्तियां तय समय पर हो जाए तो सरकार को भी कर्मचारी समय पर मिल सकेंगे इसे जनता के काम भी होंगे और लोगों को परेशानी भी नहीं होगी। विद्यालय सहायक भर्ती परीक्षा की बात की जाए तो इसको सरकार ने 4 महीने तक छुपा कर रखा है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने लिखा है, “पर्चे लीक, गहलोत वीक, कभी सरकार का उपमुख्यमंत्री लीक, कभी सरकार के विधायक लीक, कभी पार्टी के पदाधिकारी लीक, कभी परीक्षा के पर्चे लीक, कभी विधायकों की चिट्ठी लीक और इसका कारण सिर्फ एक प्रदेश का मुख्यमंत्री वीक, गहलोत के राज में पर्चे से लेकर कांग्रेस पार्टी तक सब लीक।”

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि सरकार सबसे पहले अपने प्रशासनिक लवाजमा को सख्त करें, ताकि पेपर लीक नहीं हो और तमाम भर्तियां तय समय पर हों और बेरोजगारों को आर्थिक बाहर नहीं पड़े, बेरोजगार भटकते नहीं फिरें।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि राज्य सरकार एक भी नई भर्ती नहीं निकाल पाई है, जबकि पिछली सरकार के समय निकाली गई भर्ती परीक्षाओं या भर्तियों को निरस्त अथवा रद्द करने के सिवाय कोई काम नहीं कर रही है।

बार-बार भर्ती रद्द करने और परीक्षाओं को स्थगित करने को लेकर जयपुर मीडिया स्कूल के निदेशक डॉ मनीष शुक्ला का कहना है कि सरकार यदि समय पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें तो बेरोजगारों का भी समय और पैसा दोनों बचेगा। साथ ही सरकार में कार्मिकों की संख्या में वृद्धि होगी तो जनता के कार्य में शामिल होंगे, इससे सरकार को फायदा होगा।

कॅरियर काउंसलर अरुण ढाका का कहना है कि सरकार यदि यूपीएससी की तरह समय बद्ध तरीके से भर्तियां करें तो बेरोजगारों के सामने रोजगार का संकट नहीं होगा और तय समय में तैयारी करके योग्य बेरोजगार सरकारी नौकरी पाने में सक्षम होंगे, किंतु सरकार के पास ऐसा कोई सिस्टम है ही नहीं।

कांग्रेस का यह था वादा

दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनावों से पहले जारी किए गए जन घोषणापत्र में कांग्रेस पार्टी ने वादा किया था कि सभी सरकारी नौकरी की भर्तियां समयबद्ध तरीके से होगी। बेरोजगारों को प्रतिमाह 3500 रुपये बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा, लेकिन तमाम परीक्षाएं और भर्तियां रद्द में स्थित होने के कारण बेरोजगारों का सपना टूट रहा है तो दूसरी तरफ प्रदेश में 27 लाख बेरोजगारों में से केवल कुछ हजार बेरोजगारों को ही बेरोजगारी भत्ता मिल रहा है।