स्कूल नहीं तो फीस नहीं, केवल ट्यूशन फीस ले सकते हैं: हाई कोर्ट

राजस्थान हाई कोर्ट ने आज एक अहम फैसला देते हुए स्कूली बच्चों के अभिभावकों को राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी करते हुए कहा है कि स्कूल नहीं तो फीस नहीं के सिद्धांत के ऊपर काम करना होगा। केवल ट्यूशन फीस ले सकते हैं और वह भी उतनी ही जितना पढ़ाया गया है।

पिछले 4 महीने से राजस्थान में स्कूली बच्चों के अभिभावकों की एक संगठन के द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में यह मामला ले जाया गया था। वहां पर सुनवाई हो रही थी और इसी बीच राजस्थान की सरकार के द्वारा भी कहा गया था कि स्कूल नहीं खुलते हैं, तब तक ऑनलाइन क्लासेज के आधार पर केवल ट्यूशन फीस ली जा सकती है।

इसको लेकर राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि हमने फैसला किया था कि जब स्कूल लगेंगे तब जितना पाठ्यक्रम आप कराएंगे, ट्यूशन फीस का उतना प्रतिशत आप ले लीजिए। परन्तु कुछ स्कूल पूरे साल की ट्यूशन फीस चाहते थे। हमारा फैसला न्यायोचित था, उसी पर उच्च न्यायालय ने मुहर लगाई है।

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राजस्थान के करोड़ों बच्चों के अभिभावकों के राजस्थान हाई कोर्ट के इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। क्योंकि प्राइवेट स्कूलों के द्वारा कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के कारण स्कूल बंद होने के बावजूद स्कूलों की फीस वसूल की जा रही थी, उसके लिए दबाव बनाया जा रहा था।

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