CM गहलोत यदि 501 में से 252 वादे पूरे हो गए हैं जनता त्राहिमाम क्यों कर रही है?: डॉ पूनियां

Jaipur. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को आज 2 साल पूरे हो गए हैं। 2 साल पहले 17 दिसंबर 2018 को आज ही के दिन अशोक गहलोत की सरकार का गठन हुआ था।

2 साल पूर्ण होने पर जहां एक तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद अपनी पीठ थपथपा रहे हैं तो कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि 501 वादों में से 252 वादे पूरे किए जा चुके हैं, इसके साथ ही 174 वादों पर काम चल रहा है।

इधर भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया का कहना है कि राजस्थान में संपूर्ण कर्ज माफी के नाम पर वादा करके सरकार ने किसानों का वोट लिया था, लेकिन किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। किसानों की जमीनों को कुर्क करने का काम जारी है।

किसान जुर्माना देकर कर्ज चुकाने का काम कर रहा है, क्योंकि कांग्रेस ने वादा किया था और किसानों ने इसके चलते समय पर ऋण वापस लौटाया ही नहीं। अब उनको डबल जुर्माने के साथ कर्जा वापस करना पड़ रहा है।

भाजपा अध्यक्ष का कहना है कि किसानों के अलावा बेरोजगारों को नौकरी देने और उनको बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया गया था, लेकिन प्रदेश में 2700000 से अधिक विरोध घरों में से केवल कुछ हजार बेरोजगारों को भत्ता देकर सरकार वाहवाही लूट रही है।

उनके मुताबिक राजस्थान में क्राइम के रिकॉर्ड बने हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि पूरे देश भर में राजस्थान क्राइम के मामले में सबसे ऊपर पहुंच गया है, जबकि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने वादा किया था कि महिलाओं की सुरक्षा पुख्ता की जाएगी और सबसे ज्यादा बलात्कार गैंगरेप के मामले इसी 2 साल के दौरान सामने आये हैं।

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अध्यक्ष का कहना है कि जो कांग्रेस ने 501 वादे किए थे उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ है। अलबत्ता भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना बंद कर दी गई है। अन्नपूर्णा योजना को बंद करके इंदिरा रसोई रखा गया, लेकिन किसी भी गरीब को खाना नहीं मिल रहा है। पोषाहार के तौर पर स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाया जाता था, उसको बंद कर दिया गया है, जिससे 700000 बच्चे दूध से वंचित हो गए हैं। किसानों को बिजली सब्सिडी दी जाती थी, उसको भी बंद कर दिया गया है।

डॉ. पूनियां का कहना है कि यह सरकार हर मोर्चे पर विफल है। आर्थिक कुप्रबंधन अपने चरम पर है। सरकार के मंत्री गायब हैं। अफसरों के हवाले राज्य की सरकार चल रही है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद 7 महीने से सरकारी बंकर में कैद हैं। जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है, कांग्रेस पार्टी खुद कई घरों में बैठी हुई है, सरकार में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अपनी अपनी महत्वाकांक्षाओं की लड़ाई है, जिसको ढकने के लिए भाजपा पर आरोप लगते रहते हैं।

कोरोना की वैश्विक महामारी के दौरान सरकार पूरी तरह से विफल हुई, मौत के आंकड़े और संक्रमण के आंकड़े छुपाती रही। सचिन पायलट से बचने के लिए अशोक गहलोत ने पूरे 34 दिन तक सरकार को होटलों में कैद रखा।

उल्लेखनीय है कि आमतौर पर देखा जाता है किसी भी सरकार के खिलाफ यदि anti-incumbency बनती है तो करीब 4 साल बाद इसकी शुरुआत होती है।

डॉ पूनियां का कहना है कि वर्तमान अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ केवल 1 साल के बाद ही anti-incumbency बन गई और 2 साल पूरे होते होते ऐसा लग रहा है कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति चाहता है, यह सरकार जितना जल्दी जाए, उतना जल्दी अच्छा है।

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