मनमाफिक परिसीमन भी नहीं बचा पाया कांग्रेस: डॉ. पूनियां

Jaipur. राजस्थान की 7 नगर परिषद और 43 नगर पालिकाओं के चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी को मनमाफिक सफलता नहीं हासिल हो पाई है। भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने कहा है कि मन मुताबिक परिसीमन करने और सत्ता का दुरुपयोग करने के बावजूद अशोक गहलोत और कांग्रेस पार्टी को सफलता नहीं मिलना निश्चित रूप से राजस्थान की सरकार की नाकामी को दर्शाता है।

50 नगर निकाय के लिए हुए 1775 सदस्यों के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 620 जगह पर जीत हासिल हुई है, जबकि भाजपा को 548 और निर्दलीय 595 जगह पर जीतने में कामयाब रहे हैं।

इससे पहले 2015 के इसी नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 34 जगह पर और कांग्रेस को 14 जगह पर जीत हासिल हुई थी, दो जगह पर निर्दलीय चेयरमैन बने थे। इस बार 50 में से 14 जगह पर कांग्रेस के चेयरमैन बन रहे हैं, जबकि 32 जगह पर निर्दलीय किंग में करें और भाजपा चार जगह पर स्पष्ट तौर से चेयरमैन बनाने जा रही है।

पंचायत समिति चुनाव (Panchayat Samiti Chunav) के दौरान भी कांग्रेस पार्टी को भाजपा के सामने हार का मुंह देखना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी ने करीब दो हजार जगह पर अपने उम्मीदवार जीतने में कामयाबी पाई थी, जबकि कांग्रेस को 1800 से कम सीटें मिली थी यह पहला अवसर है, जब विपक्षी पार्टी को पंचायत समिति चुनाव में बड़ी जीत हासिल हुई थी।

भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनियां का कहना है कि कांग्रेस पार्टी की और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार की विफलताओं के चलते राज्य की जनता त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है और उसका परिणाम पंचायत समिति चुनाव के दौरान देखा गया है, निकाय चुनाव में भी सदस्यों के हिसाब से भाजपा बहुत पीछे नहीं है, जबकि अशोक गहलोत सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग किया है।

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दूसरी तरफ से कांग्रेस का कहना है कि निकाय चुनाव में कांग्रेस की नीतियों को सरकार की सफलताओं के चलते निकाय चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की है। कांग्रेस के नेता और प्रदेश की यातायात मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि किसान आंदोलन के चलते भाजपा को राजस्थान की जनता ने आईना दिखा दिया है।

डॉ. पूनियां ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी 50 निकायों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई, यद्यपि इनमें अधिकांश पूर्वी राजस्थान, भरतपुर संभाग सहित वो 40 क्षेत्र हैं जहाँ विगत विधानसभा चुनाव में भी हमें जीत नहीं मिली थी और पूरे संभाग में मात्र एक विधायक हैं, भविष्य में यहाँ मजबूती से काम करने की आवश्यकता है।

कार्यकर्ताओं के लिए ये परिणाम एक सीख है, इन क्षेत्रों में हमें अपनी संगठनात्मक एवं राजनीतिक जमीन सुदृढ़ करने के लिए विशेष कार्ययोजना की जरूरत है। मुझे पूरा विश्वास है कि कार्यकर्ता इन परिणामों की चुनौतियों को स्वीकार करके आगे बढेंगे, चुनाव में परिश्रम के लिए कार्यकर्ताओं का आभार।