तिवाड़ी के बाद मानवेन्द्र सिंह और देवीसिंह भाटी की वापसी मांग तेज

Jaipur. राजस्थान के पूर्व मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता घनश्याम तिवाड़ी के 26 महीने बाद पार्टी में वापसी होने के बाद अभी पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी और पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह को भी पार्टी में वापस लेने की मांग तेज हो गई है।

पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी और पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह की भाजपा से निष्कासन की प्रक्रिया तब हुई, जब दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों नेताओं के द्वारा बगावत की गई थी।

पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने दिसंबर 2018 में कांग्रेस के टिकट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ झालरापाटन से चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव हार गए थे।

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मानवेंद्र सिंह और देवी सिंह भाटी के अलावा राजस्थान के पूर्व मंत्री सुरेंद्र गोयल और राजकुमार रिणवा के भी भाजपा में वापसी के प्रयास तेज हो गए हैं। इन दोनों नेताओं ने भी दिसंबर 2018 में भाजपा से बगावत करके चुनाव लड़ा था।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बगावत कर खुद की पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने और बाद में कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले घनश्याम तिवाड़ी एक बार फिर से भाजपा का दामन थाम लिया है। भाजपा मुख्यालय में शनिवार को प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने पार्टी का दुपट्टा पहनकर पार्टी में शामिल किया।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश पर घनश्याम तिवाड़ी की भाजपा में वापसी हुई है। तिवाड़ी विचार, परिवार एवं संगठन के वरिष्ठ, अनुभवी एवं पुराने सदस्य हैं, वे अपने घर भाजपा में आ गए हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। हम सब मिलकर प्रदेशभर में पार्टी की मजबूती के लिए कार्य करेंगे।

डाॅ. पूनियां ने मुख्यमंत्री गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार अब तक की सबसे भ्रष्ट, अराजक एवं अकर्मण्य सरकार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 4.5 करोड़ मतदाताओं में से 21 जिलों में हुए पंचायतीराज चुनाव में 2.41 करोड़ मतदाताओं के समक्ष कांग्रेस सरकार और भाजपा की अग्निपरीक्षा थी, जिसमें गांव के किसानों, युवाओं एवं महिलाओं ने मोदी सरकार की नीतियों को समर्थन देते हुए भाजपा को शानदार जीत का आशीर्वाद दिया।

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यह राजनीतिक इतिहास का पहला अवसर है कि जब किसी विपक्षी दल को पंचायतीराज चुनाव में इतनी बड़ी जीत मिली है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत पंचायतीराज चुनाव के जनादेश का अपमान कर रहे हैं, आंकड़ों में बाजीगरी करते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव में 0.5 प्रतिशत वोटों से कांग्रेस सत्ता में आई थी, तो ऐसे में आपके पास जनादेश कहां है, आपको कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिस तरीके से प्रदेश की जनता ने कांग्रेस एवं गहलोत सरकार की जनविरोधि नीतियों को नकार दिया है, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अशोक गहलोत के बयानों एवं ट्वीट से यह लगता है कि वे पार्टी ट्विटर पर चलाते हैं या पार्ट टाइम पाॅलिटिक्स करते हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के झगड़े को संभालने में विफल मुख्यमंत्री गहलोत भाजपा पर सरकार गिराने का आरोप लगाते है, झगड़ा कांग्रेस के घर का है, विग्रह है, गहलोत सरकार अगर गिरेगी तो हमने ठेका थोडी ले रखा है सरकार बचाने का।

कांग्रेस के ऐसे हालात देखकर मुझे लगता है कि गहलोत पर एक फिल्म बन सकती है, ‘‘गहलोत जी तुमसे नहीं हो पायेगा, सरकार नहीं चल पायेगी।’’ भाजपा कृषि कानूनों को लेकर देशभर में किसानों से संवाद कर जनजागरूकता अभियान चला रही है।

इसके साथ ही घनश्याम तिवाड़ी ने प्रेसवार्ता में कहा कि मैं जिन मुद्दों को लेकर पार्टी से बाहर चला गया था, अब वह मुद्दे खत्म हो चुके हैं। अब एक तरह से स्लेट बिल्कुल साफ है, इस पर हम सब मिलकर नई इबारत लिखेंगे।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मैंने कभी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण नहीं की और ना ही उनके किसी कार्यक्रम में गया, केवल एक बार उनका मंच शेयर किया था, उस दौरान भी मैंने संघ के प्रति निष्ठा जाहिर की थी। मैं जन्मजात भाजपा का कार्यकर्ता रहा हूँ और संघ पृष्ठभूमि से हूँ।

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तिवाड़ी ने कहा कि पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व एवं प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां का धन्यवाद ज्ञापित करता हूं जिन्होंने मेरे खेद प्रकट करने के बाद मुझे पार्टी में शामिल करने का निर्णय लिया।

उन्होंने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी ने चाहे वह धारा 370 और 35ए हटाने का मामला हो, भगवान श्रीराम के अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण एवं ट्रिपल तलाक कानून जैसे कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिनके लिए मैं सतत भाजपा में रहते हुए प्रयास करता रहा हूँ, जिन्हें नरेन्द्र मोदी ने पूरा कर भारत का दुनियाभर में सम्मान बढ़ाया है।

बड़े पद और राजनीतिक नियुक्ति की उम्मीद थी
सूत्रों की माने तो अलग-अलग विचारधारा के बावजूद घनश्याम तिवाड़ी के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बेहद नजदीकी रिश्ते थे। कहा जाता है कि मुख्यमंत्री के कहने पर ही तिवाड़ी कांग्रेस में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बाद न तो तिवाड़ी को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी गई और न ही उन्हें राजनीतिक नियुक्तियों में कहीं ए़डजस्ट किया गया। बताया जाता है कि कांग्रेस में अपनी उपेक्षा से नाराज होकर ही तिवाड़ी ने फिर से भाजपा का दामन थामने का फैसला लिया है।

मानवेंद्र, रिणवा, गोयल की भी हो सकती है जल्द वापसी
सूत्रों की माने तो घनश्य़ाम तिवाड़ी के साथ ही कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा और सुरेंद्र गोयल एवं मानवेंद्र सिंह की भी जल्द भाजपा में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं। दोनों नेता भी कांग्रेस मे अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। रिणवा और गोयल पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

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तिवाड़ी ने 2018 में बनाई थी खुद की भारत वाहिनी पार्टी
2019 में लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा छोडक़र कांग्रेस ज्वाइन करने वाले तिवाड़ी वसुंधरा राजे के घोर विरोधी रहे हैं। राजे के विरोध के चलते ही उन्होंने न केवल भाजपा का दामन छोड़ा बल्कि अपनी नई पार्टी भारत वाहिनी बनाई थी। इसी पार्टी से उन्होंने दिसम्बर 2018 में सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वे अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे।

मई 2019 में ज्वाइन की थी कांग्रेस
लोकसभा चुनाव से पहले मार्च 2019 में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जयपुर में एक रोड शो किया था। इसके बाद जयपुर के रामलीला मैदान में आयोजित एक जनसभा में घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस ज्वाइन की थी।

तिवाड़ी का राजनीतिक सफर
तिवाड़ी 6 बार चुनाव जीतकर राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे हैं। तिवाड़ी 1980 में पहली बार सीकर से विधायक बने। इसके बाद 1985 से 1989 तक सीकर से विधायक रहे। 1993 से 1998 तक विधानसभा क्षेत्र चौमूं से विधायक बने। जुलाई 1998 से नवंबर 1998 तक भैरोंसिंह शेखावत सरकार में ऊर्जा मंत्री भी रह चुके हैं। दिसम्बर 2003 से 2007 तक वसुंधरा राजे सरकार में शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।