पायलट समेत ये लोग बनेंगे गहलोत मंत्रीमंडल का हिस्सा, जानिये कौन कौन हैं दावेदार?

जयपुर।
पांच दिन पहले सिरोही के शिवगंज में कांग्रेस जिला कार्यालय के उद्धाटन के अवसर पर “सरकार गिराने का खेल फिर से शुरू होने की” जो गूगली सीएम अशोक गहलोत ने फेंकी है, उसे लेकर दिल्ली से जयपुर तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। हर कोई अपने-अपने हिसाब से इसके मायने निकाल रहा है, लेकिन बयान के 2 अर्थ साफ दिख रहे हैं।

या तो जल्द मंत्रिमंडल में फेरबदल-विस्तार होने जा रहा है तो उसे आगे टालने के लिए गहलोत के द्वारा जानबूझकर यह बयान दिया गया है, क्योंकि विपक्ष इसी कदम के इंतज़ार में घात लगाए हुए बैठा होगा। दूसरा फिर अपने हिसाब से मंत्रिमंडल बनाने के लिए बोला होगा। बाकी कोई अगर सरकार गिरने की उम्मीद लगाए बैठा है तो यह सिर्फ और सिर्फ उसका वहम है।

“अपनों को बर्खास्त करके सरकार बचाई थी”, यह बाउंसर सीधा किस पर फेंका गया है, वह तो जगजाहिर है, लेकिन क्यों फेंका गया, यह बेहद इंटरेस्टिंग है। अब अगर मंत्रिमंडल जल्द होने जा रहा है तो इसका मतलब या तो दूसरी वर्षगांठ सरकार की जो 17 दिसंबर को है, तो उसके आसपास हो जाएगा या फिर नए साल में 15 जनवरी के बाद हो सकता है।

अगर दोनों माह में नहीं होता है तो फिर अप्रैल 2021 में तो होना तय है। क्योंकि मार्च में 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हैं और बजट भी पेश होगा। अब अगर इसी माह, जनवरी या फिर अप्रैल 2021 में होता है तो कौन—कौन मंत्री बन सकते हैं? संवैधानिक बाध्यताओं के अनुसार राजस्थान में 200 विधानसभा सदस्य हैं, जिनमें से 15 फीसदी, यानी कुल 30 मंत्री बन सकते हैं। अभी 10 की जगह खाली है और 3 मौजूदा की छुट्टी होने के आसार हैं। ऐसे में 13 से 14 विधायकों की किस्मत खुल सकती है।

रामलाल जाट:-भीलवाड़ा में सहाड़ा उपचुनाव है तो जिले से एकमात्र विधायक होने के तौर पर जाट का नंबर आ सकता है। सहाड़ा सीट पर जाट अच्छी तादाद में वोट है। पीसीसी चीफ जाट होने के चलते लगता नहीं रामलाल के अलावा किसी और भी जाट विधायक को मंत्री बनाया जाएगा। हेमाराम चौधरी का क्या होगा, यह उलझन है! इसमें भी नहीं बनने के ही ज्यादा चांस दिख रहे हैं।

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महेन्द्रजीत सिंह मालवीय या दयाराम परमार:-मालवीय का आदिवासी एरिया में काफी जनाधार है, इसलिए गंभीरता से नाम चल रहा है, लेकिन पैसों के लेनदेन के आरोपों के चलते BTP मालवीय के विरोध में आ गयी है। ऐसे में फिर परमार की लॉटरी इस बैल्ट से खुल सकती है।

परसराम मोरदिया या मंजू मेघवाल:-मास्टर भंवरलाल मेघवाल के ऑप्शन के तौर पर दोनों के नाम मजबूती से चल रहे हैं। दलित वोटर्स पर पकड़ के चलते मोरदिया पर मेहरबानी हो सकती है, वैसे भी मोरदिया अशोक गहलोत के करीबी माने जाते हैं। मंजू मेघवाल के महिला होना का समीकरण काम कर सकता है।

राजेन्द्र पारीक या राजकुमार शर्मा:- इन दोनों में भी ज्यादा चांस राजकुमार शर्मा के ही हैं, क्योंकि सीकर से पीसीसी चीफ होने और मोरदिया के मंत्री बनने से पारीक पूरी तरह से पिछड़ते दिख रहे हैं।

डॉ जितेंद्र गुर्जर या शंकुतला रावत:- सचिन पायलट के तोड़ और गुर्जर वोटों को साधने के लिए एक का मंत्री बनना तय है। शंकुतला के महिला होने के साथ सीएम कैम्प का खास होना मजबूत फैक्टर है।

गुरमीत सिंह कुन्नर:-एक जट—सिख के तौर पर कुन्नर भी मजबूत दावेदार हैं। कांग्रेस एक यादव, एक विश्नोई और एक सिख को मंत्री बनाती आई है। यादव-विश्नोई मंत्री हैं ही पहले से। हां, मौजूदा सियासी हालात में यह हो सकता है कि एक सिख को मंत्री बनाने का फार्मूला नहीं अपनाया जाए।

महेश जोशी:-जोशी का भी कद बढ़ाया जा सकता है, मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। सीएम के करीबी और जयपुर सियासत में प्रतापसिंह को बैलेंस करने की रणनीति के तहत जोशी सबसे फिट बैठते हैं। हालांकि, रफीक खान भी चर्चा में हैं, किंतु उनको जिलाध्यक्ष बनाया जा सकता है।

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गोविंद सिंह डोटासरा:-डोटासरा सिर्फ पीसीसी चीफ रहेंगे या साथ में मंत्री भी बने रहेंगे, इसपर संस्पेंस बरकरार है। अभी डोटासरा के मंत्री के साथ पीसीसी चीफ भी बने रहने के ज्यादा आसार नज़र आ रहे हैं। साथ ही उनके प्रमोशन के साथ केबिनेट मंत्री बनाने की भी थ्योरी चल रही है। हो सकता है सिर्फ पीसीसी चीफ रखने का भी फैसला हो जाए, पर अभी इसमें काफी उलझन है। जाट नेता को दो दो पद और पहले पायलट को पीसीसी चीफ के साथ डिप्टी सीएम बनाए रखने से बने पावर सेंटर के फेक्टर से इस पहेली को समझना होगा।

अशोक चांदना:- गुर्जरों को संतुलित करने के लिए अशोक चांदना को केबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। वैसे भी चांदना नो डाउट परफॉर्मेंस भी दिखाई है।

सुभाष गर्ग-गर्ग का भी प्रमोशन हो सकता है

रमेश मीणा और विश्वेन्द्र सिंह:-सीएम ने बयान में यह कहा कि अपने लोगों को बर्खास्त किया तब सरकार बची। इन दोनों को पायलट के साथ बर्खास्त किया गया था, इसलिए लोग सोच रहे हैं इन दोनों को नहीं बनाएंगे, क्योंकि उस वक़्त सीएम ने 102 विधायक का अभिभावक बनकर काम करने का भरोसा दिया था। अब दोनों को वापस मंत्री बनाने का वादा प्रियंका गांधी ने किया था, सबसे बड़ा जटिल और अग्निपरीक्षा इन दोनों की वापसी है। क्योंकि इससे बाकी विधायक नाराज होंगे और एक गलत संदेश भी जाएगा। सीएम की सोच और चाहत के बिना होगा यह सब अगर वापसी होगी तो, लेकिन मामला प्रियंका के वादे से जुड़ा है तो इनकी वापसी तय दिख रही है।

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अब एक मुस्लिम और महिला विधायक को मंत्रिमंडल में एडजेस्ट करने की चर्चा है। मुस्लिम में लगता है सालेह मोहम्मद ही रहेंगे, कोई बदलाव मुश्किल ही हो। महिला ममता भूपेश है और ऊपर मंजू मेघवाल-शंकुतला रावत दो नाम बता भी दिए हैं। महिला-मुस्लिम दोनों फेक्टर जाहिदा के साथ जरूर है।

पायलट कोटे से दीपेंद्र सिंह, मुरारीलाल मीणा और हेमाराम चौधरी के भी नाम सामने आ रहे हैं, पर चांस कम ही दिख रहे हैं, क्योंकि गहलोत अपने लोगों को ही मंत्री बनाने में विश्वास करेंगे।

राजेन्द्र गुढ़ा और लाखन मीणा:-बसपा से आए इन दोनों विधायकों के मंत्री बनने के नाम अक्सर सामने आते हैं, पर मीणा के पहली दफा वाला विधायक का पेंच फंसा हुआ है। इसमें यह हो सकता है फिर कि बसपा से आए किसी भी विधायक को मंत्री बनाया जाए ही नहीं। फिर आखिर में, क्योंकि एक को भी बनाते हैं तो बाकी कैसे मानेंगे।

बाकी दूदू वाले विधायक बाबूलाल नागर, खंडेला एमएलए महादेव सिंह खंडेला और अन्य निर्दलीय विधायकों सहित बसपा से आए विधायकों को भी संसदीय सचिव या बड़ी राजनीतिक नियुक्तियों में एडजेस्ट किए जा सकता है।

अब सवाल इतना ही है मंत्रिमंडल क्या दिसंबर में होगा या फिर अगले साल जनवरी या अप्रैल में होगा? इस यक्ष सवाल का जवाब तो फिलहाल नहीं है कोई, लेकिन जब भी होगा ऊपर जो चेहरे बताए हैं उन्हीं में से मंत्रिमंडल में होंगे!

हां, पहले राजनीतिक नियुक्तियां होने के ही पुख्ता आसार हैं

3 हटाने वाले नाम इसलिए नहीं दिए, क्योंकि यह पहेली इनकी आंतरिक सियासी लड़ाई पर निर्भर है। क्या पता हालात ऐसे भी है कि हटाने से खेल बिगड़ नहीं जाएं। अब एक थ्योरी जून 2021 तक और अभी सिर्फ 3 ही मंत्री बनाने की आ रही है, इस थ्योरी पर यकीन नहीं पर बताने वाले बहुत बड़े हैं।