महिपाल मदेरणा की हालत बेहद गंभीर, बेटी दिव्या ने की प्रार्थना की अपील

जयपुर।
कभी राजस्थान की राजनीति (Politics of Rajasthan), खासकर कांग्रेस पॉलिटिक्स की धुरी के पहिये के समान रहा मदेरणा परिवार (Maderna family)  आज संकट के दौर से गुजर रहा है। दादा परसराम मदेरणा (Parasram maderna) के निधन के बाद भले ही कांग्रेस ने पोती दिव्या मदेरणा को ओसियां विधानसभा से टिकट दे विधायक बनने का अवसर दे दिया हो, लेकिन हकिकत यह है कि अब इस सियासी परिवार को पूछने वाला राजस्थान में कोई नहीं बचा है।

परसराम मदेरणा के बेटे और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा आज मुंबई के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। उनके साथ हालांकि उनकी बेटी और ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा हैं, किंतु राज्य की सरकार के मुख्यमंत्री या मंत्री उनसे मिलने तक नहीं गया है।

खुद दिव्या मदेरणा ने इशारों ही इशारों में अपना दुख ​जाहिर करते हुये अपने समर्थकों से उनके पिता के जीवन के लिये प्रार्थना करने की अपील की है। करीब एक माह के समय हो चुका है, जब से दिव्या का परिवार मुंबई में ही महिपाल मदेरणा के संग उनकी कैंसर के खिलाफ जंग में साथ है।

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साल 2011 में भंवरीदेवी अपहरण और हत्याकांड़ी के आरोपी महिपाल मदेरणा लंबे समय से जेल में थे, करीब एक माह पहले ही उनको सीबीआई की विशेष अदालत के द्वारा कैंसर की गंभीर बीमारी को देखते हुये जमानत दी थी। तभी से महिपाल मुंबई के एक बड़े कैंसर अस्पताल में उपचार करवा रहे हैं।

गौरतलब है कि अशोक गहलोत को राजनीति में लाने का श्रेय महिपाल मदेरणा के पिता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा को ही दिया जाता है। हालांकि, वर्ष 1998 विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद जब राजस्थान का सीएम बनने की बारी परसराम मदेरणा की थी, तब कांग्रेस आलाकमान से मिलकर गहलोत ने परसराम मदेरणा को पीछे छोड़ दिया था।

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यही आरोप अशोक गहलोत के उपर साल 2008 में सीपी जोशी को नाथद्वारा विधानसभा सीट से पछाड़ने और कहा तो यहां तक जाता है कि गहलोत ने साजिश कर जोशी को एक वोट से हराने का भी काम किया था।

इसी तरह से दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव के समय भी सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की संभावना थी, जिसमें भी तीसरी बार अपने परम मित्र अहमद पटेल के सहारे गहलोत ने तीसरी बार बाजी मारी थी, तभी से पायलट और गहलोत में सियासी जंग चल रही है।