Sachin pilot को टोंक और कांग्रेस को 40 सीटों पर आजमाएगी AIMIM

Jaipur. राजस्थानी भले ही विधानसभा चुनाव 2023 (Assembly election 2023) को लेकर अभी भी 3 साल का समय बाकी हो। किंतु कांग्रेस पार्टी (Congress) के लिए उससे पहले ही बड़ी चुनौती सामने आ खड़ी हुई है।

अब तक राजस्थान में मुस्लिम मतदाताओं (Muslim voters) को कांग्रेस पार्टी का कट्टर वोटर माना जाता था, लेकिन अब इस वोट बैंक में सेंधमारी करने के लिए मुस्लिम समुदाय से ही निकले असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी तैयार हो रही है।

पिछले दिनों बिहार चुनाव (Bihar assembly election) में 20 उम्मीदवार उतार कर 5 लोगों को विधायक बनाने में कामयाब होने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने ऐलान किया है कि अगले साल पश्चिम बंगाल (West Bengal election 2021) में होने वाले और 2022 में उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव (Uttar pradesh election 2022) के दौरान भी पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी।

40 सीटों का खाका तैयार हुआ

जानकारी में आया है कि असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम पार्टी (AIMIM) राजस्थान की 40 विधानसभा सीटों पर दम ठोकने जा रही है। ओवैसी की पार्टी के द्वारा राजस्थान में कार्यकारिणी का गठन करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और कई मुस्लिम नेता (Muslim leaders) उनके संपर्क में हैं, एक दूर की मीटिंग भी दिल्ली में हो चुकी है।

इन जिलों की 40 सीटों पर नजर

बताया जा रहा है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी जिन जिलों पर फोकस कर रही है, उनमें राजधानी जयपुर के अलावा टोंक, सवाई माधोपुर, अलवर, अजमेर, नागौर, जैसलमेर और अशोक गहलोत (Ashok gehlot) के गृह जिले जोधपुर के अलावा यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल धारीवाल (Shanti dhariwal) के गृह जिले कोटा को भी टारगेट किया जा रहा है।

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नगर निगम चुनाव ने नींव रख दी

पिछले दिनों जिस तरह से जयपुर समेत छह नगर निगम (Nagar nigam election) में चुनाव हुए और इस दौरान जयपुर हेरिटेज की 47 सीटों में से 30 सीटों पर कांग्रेस के पार्षद जीतकर आए, उसके बावजूद मुस्लिम उम्मीदवार को महापौर नहीं बनाया गया, जिससे मुस्लिम समाज में खासी नाराजगी है।

जयपुर की दो सीटों पर नजर

जयपुर हेरिटेज (Jaipur heritage) से संबंधित 2 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। ऐसे में यहां के कुछ नेता असदुद्दीन ओवैसी के संपर्क में है और 2023 के चुनाव से पहले यहां पर ओवैसी की पार्टी की कार्यकारिणी का गठन करके चुनाव के लिए तैयारी शुरू करने के मूड में हैं।

सोशल मीडिया पर प्रचार शुरू

जानकारी में आया है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के राजस्थान में जिन लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है या सौंपी जानी है, उनके द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से ग्रुप से बनाकर प्रचार का कार्य भी शुरू किया जा चुका है। मुस्लिम समाज से आने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम किया जा रहा है।

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सचिन पायलट और असुदुद्दीन ओवैसी (File photo)

पायलट जैसे नेताओं के समक्ष चुनौती

कांग्रेस के सामने इस वजह से सबसे बड़ी चुनौती यह है कि टोंक में जहां पर मुस्लिम मतदाताओं का बाहुल्य है और कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट भाजपा की प्रत्याशी यूनुस खान को बुरी तरह से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में इस तरह की मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों के हारने की संभावना प्रबल हो गई है।

साम्प्रदयिक धुर्वीकरण का लाभ

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अगर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के द्वारा राजस्थान की जिन 40 सीटों पर फोकस करके तैयारी की जा रही है, वहां पर मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार उतारे जाते हैं तो निश्चित रूप से कांग्रेस पार्टी के लिए यह बहुत बड़ा झटका साबित होगा। क्योंकि मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण होने की वजह से कांग्रेस का वोट बैंक ओवैसी की पार्टी को चला जाएगा, इससे भाजपा को बड़े पैमाने पर फायदा होगा।

भाजपा-रलोपा को होगा लाभ

भाजपा को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के लिए ओवैसी की पार्टी का राजस्थान में चुनाव लड़ना लाभकारी साबित होगा। कांग्रेस पार्टी के मतदाता वैसे भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ओवैसी की पार्टी की राजस्थान में कदम रखने से, मुस्लिम मतदाताओं का दूरी ग्रहण होने से भाजपा को सीधे तौर पर लाभ होना है।

दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाएगी कांग्रेस!

राजस्थान की कांग्रेस सरकार के खिलाफ अभी से anti-incumbency बन रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर चुकी है। इसी के साथ यदि ओवैसी की पार्टी भी राजस्थान में चुनाव लड़ती है तो 2023 के चुनाव में कांग्रेस दहाई का अंक भी छू पाएगी या नहीं, इसकी अभी से चर्चा शुरू हो चुकी है।