BRTS, यानी बर्बाद रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम!

-सीकर व अजमेर रोड के बीआरटीएस कॉरिडोर में दौड़ रहे टू-व्हीलर्स और कारें

सीकर रोड और अजमेर रोड पर 10 वर्ष पहले बनाए गए बीआरटीएस कॉरिडोर जयपुर में रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की बर्बादी का नमूना बने हुए हैं। एंट्री पर प्रतिबंध के बावजूद बीआरटीएस कॉरिडोर में टू व्हीलर और कारें तक दौड़ रही हैं।

बीआरटीएस का कोरिडोर कहीं सड़क पर खराब हो चुके वाहनों का रिपेयरिंग गैराज बना हुआ है, तो बस शेल्टर भिखारियों का अड्ड़ा। आए दिन बीआरटीएस कॉरिडोर के कट पर रोड एक्सीडेंट हो रहे हैं।

इस रोड पर आबादी एरिया होने की वजह से सड़क क्रॉस करने वाले वाहनों की संख्या बहुत अधिक है। जनवरी में रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक में जयपुर से बीआरटीएस हटाने की चर्चा हुई, लेकिन नतीजा सिफर।

10 वर्ष पहले हुआ था बीआरटीएस का उद्घाटन, इसमें से 7.1 किलोमीटर सीकर रोड पर अंबाबाड़ी तक है, बाकी 9 किलोमीटर अजमेर रोड न्यू सांगानेर रोड तक है।

बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम के दोनों कॉरिडोर को पुलिस ने कुछ समय पहल बेरिकैडिंग लगाकर बंद कर दिया था, लेकिन इनमें अब फिर से वाहनों की एंट्री शुरू हो गई है।

सीकर रोड पर तो टू व्हीलर, कार,जीप और अन्य भारी वाहन बीआरटीएस कॉरिडोर के अंदर चलते हैं, जबिक बसें कॉरिडोर के बाहर चल रही हैं। रेपिड ट्रांसपोर्ट के लिहाज से बने कॉरिडोर में टू व्हीलर और कारों की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

बीआरटीएस कॉरिडोर और बाहर की सड़क पर चलने के दौरान बसें कॉरिडोर में धीमी नजर आई। असल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को रफ्तार देने के इरादे से शुरू किए गए बीआरटीएस कॉरिडोर मुसीबत बन गए हैं।

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जान का जोखिम
बीआरटीएस कॉरिडोर में जहां लिंक रोड पर जाने के लिए कट हैं, वहां से रोड क्रॉस करते समय पैदल, टू व्हीलर सवार और फोर व्हीलर वालों की जान पर खतरा बना रहता है।

हाल ही में प्रदेश के परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने भी कहा था कि जयपुर में जिन दो सड़कों पर बीआरटीएस कॉरिडोर बनें हैं, वहां हुए 70 प्रतिशत रोड एक्सिडेंट इन्हीं की वजह से हुए।

बीआरटीएस में दौडऩे वाले वाहनों की ओवर स्पीड कट पर सड़क क्रॉस करने वालों की जान के लिए खतरा बन गई। बस तो निर्धारित स्पीड में चलती हैं, लेकिन अवैध वाहनों की एंट्री हादसों का बड़ा कारण है।

करोड़ों का नुकसान
जयपुर में बीआरटीएस कॉरिडोर बनाने में 170 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इतना खर्च होने के बावजूद न पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्पीड रेपिड हो पाई, न हादसों में कई आई।

अब इसे हटवाने के खर्च भी गले पडऩे का खतरा है। राजस्थान में सरकार ने रोड सेफ्टी डिपार्टमेंट बना दिया, इसक तहत रोड सेफ्टी काउंसिल का गठन किया है। इस काउंसिल की जनवरी में हुई बैठक में जयपुर की सड़कों से बीआरटीएस हटाने का डिसीजन लिया गया था।

आठ माह से कोरोना काल में सरकार ईजी ट्रांसपोर्ट की राह के इस हर्डल को हटाना भूल गई। ऐसे में खतरा जस का तस बना हुआ है।

बस कॉरिडोर से बाहर, कार चल रही अंदर
बीआरटीएस कॉरिडोर पर अव्यवस्थाओं की पड़ताल करने हमारी टीम पहुंची तो हैरान करने वाले नजारे दिखे। बसें कॉरिडोर के बाहर चलती नजर आई और कार व टू व्हीलर अंदर।

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कॉरिडोर के बाहर चल रही एक बस को पांच किलोमीटर फॉलो किया तो बस ड्राइवर ने सवारियां भरने के लिए करीब 20 जगह ब्रेक लगाकर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी कर दी।