हर राज्य में तैयार हो रही हैं मोदी-अमित शाह की टीम!

अरुण सिंह और भारती बैन की नियुक्ति। जयपुर।

पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के द्वारा राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह को राज्य भाजपा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनको अविनाश राय खन्ना की जगह भेजा गया है। सिंह के साथ ही गुजरात से आने वालीं भारती बैन को सह प्रभारी बनाया गया है।

अरुण सिंह उत्तर प्रदेश से आते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बेहद करीबी माना जाता है। सिंह को कर्नाटक की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

साथ ही कैलाश विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल, संबित पात्रा को मणिपुर, तरुण चुग लद्दाख, भूपेंद्र यादव को गुजरात और बिहार, वैजंत पांडा दिल्ली व आसाम, वी मुरलीधर को आंध्र प्रदेश के प्रभारी पद पर नियुक्ति दी गई है।

राजस्थान में यूं तो चुनाव में 3 साल से अधिक का समय बाकी है, किन्तु जिस तरह से डॉ. सतीश पूनियां को संघ की पसंद से अध्यक्ष बनाया गया था, उनके बाद दूसरे राज्यों के अध्यक्ष व प्रभारी और संगठन महामंत्री बनाने में भी संघ-संगठन की पसंद को वरीयता मिली है।

साथ ही राजस्थान में लगातार ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, जो कहीं न कहीं डॉ. पूनियां के साथ काम कर संगठन में आगे बढ़े हैं।

अरुण सिंह की नियुक्ति जहां डॉ. पूनियां के करीबी होने के तौर पर देखी जा रही है तो भारती बैन को लगाना स्पष्ट रूप से अमित शाह की पसंद को तवज्जो मिलने का साफ संकेत है।

पिछले 2 साल में जहां भी अध्यक्ष या प्रभारी नियुक्त हुए हैं, वो सीधे नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जुड़े हुए हैं, साथ ही संघ पृष्ठभूमि के है। इसके चलते चर्चा है कि अब सभी राज्यों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह, अपने अध्यक्ष जेपी नड्डा के माध्यम से अपनी बी टीम स्थापित करते जा रहे हैं, जिसको भविष्य में भाजपा की पूरी बागडौर सौंपनी है।

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अरुण सिंह युवा मोर्चा में काम करते डॉ. पूनियां से सम्बन्धी रहे हैं तो जेपी नड्डा भी युवा मोर्चा में काम करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर पहुंचे हैं। चर्चा है कि अरुण सिंह को राजस्थान की जिम्मेदारी ही संगठन पर संघ व मोदी-शास-नड्डा की पकड़ मजबूती के रूप में देखी जा रही है।

इधर, पार्टी के राज्य इकाई अध्यक्ष डॉ. पूनियां को इस बात की सहूलियत रहेगी कि अरुण सिंह के साथ युवा मोर्चा में काम करते लंबा संपर्क रहा है, जिससे अपने हिसाब से फैसले लेने में दिक्कत नहीं होगी।

भाजपा कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राज्य की राजनीति में कमजोर करने के लिए लगातार संघ-संगठन के लोगों को अहमियत दी जा रही है।