सौम्या गुर्जर को महापौर प्रत्याशी बना फंसी भाजपा, बड़े नेताओं के गली की हड्डी बना सौम्या मामला

जयपुर। हाल ही में संपन्न हुए जयपुर नगर निगम ग्रेटर के चुनाव में 150 में से 88 पार्षद भाजपा की जीत कर आए हैं। ऐसे में स्पष्ट बहुमत मिलने के कारण भारतीय जनता पार्टी के द्वारा सहज भाव से सौम्या गुर्जर को महापौर का प्रत्याशी घोषित किया गया है।

सौम्या गुर्जर को प्रत्याशी बनाकर एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी संगठन विपक्ष के निशाने पर आ गया है, वहीं खुद भाजपा के विद्याधर नगर से विधायक नरपत सिंह राजवी ने सौम्या गुर्जर को जयपुर से बाहर होने और उनके पति के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज होने के कारण अपनी ही पार्टी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नरपत सिंह राजवी के द्वारा दिए गए बयान के बाद शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा पत्रकारों को सवालों के जवाब नहीं दिए गए। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने यह कहकर चौंका दिया कि खुद नरपत सिंह राजवी जयपुर के नहीं हैं, फिर भी जयपुर से चुनाव लड़ते हैं। उनको पार्टी ने चुनाव लड़ाया है, इसलिए उनको सवाल उठाने का कोई हक नहीं है।

इसी मामले को लेकर जब मीडिया ने प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र है और सबको अपनी बात कहने का हक है, लेकिन पार्टी में सर्वसम्मति से सौम्या गुर्जर को महापौर प्रत्याशी बनाया गया है, किसी व्यक्ति को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं है।

इस प्रकरण को लेकर शनिवार दोपहर बाद कांग्रेस पार्टी की तरफ से जहां पर उनके पार्षद ठहरे हुए हैं, उसी होटल में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जयपुर शहर के कांग्रेस के सभी विधायक और हारे हुए विधायक प्रत्याशी भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित रहे।

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पत्रकारों को संबोधित करते हुए कांग्रेस की मीडिया चेयरपर्सन अर्चना शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी सौम्या गुर्जर के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने कहा कि सौम्या गुर्जर के प्रति करौली नगर परिषद के सभापति थे, तब उन्होंने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों और मंदिर माफी की जमीनों को भी बेचने का गंभीर गैरकानूनी कृत्य किया है।

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अर्चना शर्मा ने आरोप लगाया कि महिला आयोग की सदस्य रहते हुए सौम्या गुर्जर के द्वारा दुष्कर्म पीड़िता के साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर डाल दी गई थी। तब भी जब पत्रकारों के द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया तो भारतीय जनता पार्टी बैकफुट पर आ गई थी। जिसपर सौम्या गुर्जर को महिला आयोग के सदस्य पद से 30 जून 2016 इस्तीफा देना पड़ा था।

इसके साथ ही सौम्या गुर्जर के पति राजा राम गुर्जर को लेकर अर्चना शर्मा ने कहा कि करौली नगर परिषद के सभापति रहते हुए उन्होंने वहां की सभी सरकारी जमीनों को भेज दिया। मंदिर माफी की जमीनों को भी बेचने के बाद जब उनका पेट नहीं भरा तो उन्होंने जयपुर में भी कई धोखाधड़ी के मामले करते हुए कुछ लोगों की जमीन हड़प ली।

कांग्रेस पार्टी के द्वारा भाजपा के संगठन और सौम्या गुर्जर को प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सौम्या गुर्जर खुद एक मामले में आरोपी रही हैं और उनके पति राजाराम गुर्जर के खिलाफ 18 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, ऐसे में समझ में आता है कि भाजपा का चाल और चरित्र कैसा है।

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गौरतलब है कि सौम्या गुर्जर के प्रति राजाराम गुर्जर, जो की करौली नगर परिषद के सभापति थे, तब उनके खिलाफ जमीन हड़पने लोगों को धमकाने, सरकारी जमीन का अवैध आवंटन करने, मंदिर माफी की जमीनों को हड़पने की कोशिश करने और लोगों के साथ जालसाजी कर झूठे कागजात बना उनकी जमीनों को बेचान करने समेत करीब डेढ़ दर्जन गंभीर मुकदमे आज भी लंबित हैं।

इसी को देखते हुए करौली में तत्कालीन सभापति रहे राजाराम गुर्जर को 6 दिसंबर 2019 को स्वायत्त शासन विभाग के द्वारा पद से निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, बाद में राज्य सरकार द्वारा अपनी जांच में उन को क्लीन चिट देकर फिर से सभापति पद पर बहाल किया गया था।