निगम चुनाव में भाजपा मोर्चों की भूमिका को लेकर उठे सवाल

—युवा मोर्चा अध्यक्ष को बताया जा रहा है अशुभ
जयपुर।
भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां द्वारा हाल ही में प्रदेश के सात मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा की गई थी। इसके करीब एक सप्ताह बाद ही राज्य के 3 जिलों में 6 नगर निगम के चुनाव सम्पन्न हो गये।

इन चुनाव में भाजपा दो निगमों में अपने मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच चुकी है, जबकि एक में कांटे की टक्कर और जयपुर हैरिटेज में कुछ ताकत लगाकर भाजपा अपना बोर्ड बना सकती है। किंतु इन चुनाव में सबकी जिम्मेदारी को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है।

प्रदेश नेतृत्व के द्वारा जिस तरह से जिम्मेदारी बांटकर टीम वर्क के रुप में काम करने की लीडरशिप का परिचय दिया गया, उससे संघ खासा प्रसन्न है, फिर भी जिन मोर्चों के अध्यक्ष बनाये गये थे, उनके अध्यक्षों द्वारा इन चुनाव में क्या किया गया, इसकी चर्चा भी पार्टी में खासी हो रही है।

अन्य मोर्चों के अध्यक्ष जहां इन चुनाव में अधिक सक्रिय नहीं थे तो सबसे ज्यादा चर्चा युवा मोर्चा अध्यक्ष हिमांशु शर्मा को लेकर हो रही है, जिनके कार्यभार ग्रहण पर भी भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनियां के बीमार होने का ग्रहण लग गया।

भव्य तैयारियों को तब झटका लगा, जब 2 नवंबर को शपथ ग्रहण का कार्यक्रम रखा गया था और उसी दिन भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनियां अस्पताल में भर्ती हो गये। इसके बाद उस कार्यक्रम का रुप बदलकर अध्यक्ष के स्वास्थ्य के लिये हवन का रुप दे दिया गया।

इतना ही नहीं, अपितु संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और 4 अन्य सहयोगी भी कोरोना की चपेट में आ गए थे। एक दिन पहले ही परिणाम आया है और जिस तरह की पोस्ट युवा मोर्चा अध्यक्ष के द्वारा अपनी फेसबुक पर डाली गई है, उसके बाद पता चल रहा है कि जहां पर भी वो प्रचार करने गये थे, वहीं पर भाजपा हार गई है।

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इससे भी मजेदार चर्चा इस बात की हो रही है कि जयपुर ही नहीं, अपितु कोटा में जैसे ही हिमांशु शर्मा गये तो वहां के दोनों प्रभारी कोरोना की चपेट में आकर सीमाबंदी का शिकार हो गये। जयपुर के जिन वार्डों में हिमांशु शर्मा ने प्रत्याशियों के लिये प्रचार किया, उन सभी वार्डों में भाजपा हार गई।

यानी पहले युवा मोर्चा अध्यक्ष के कार्यभार ग्रहण के दिन ही भाजपा अध्यक्ष का बीमार होना, उसके बाद कोटा के प्रभारियों का कोरोना पॉजिटिव होना और फिर परिणाम में उन प्रत्याशियों का हारना, जो शर्मा ने प्रचार किया था।

अब भाजपा में चर्चा है कि हिमांशु शर्मा भाजपा के लिये अशुभ हैं। एक और चर्चा है कि युवा मोर्चा के जो पदाधिकारी हैं, उनपर भी हिमांशु शर्मा को भरोसा नहीं है, इसलिये उन्होंने कामकाज के लिये अपने अलग से दो तीन लड़के रखे हैं, जिनसे ही काम करवाया जा रहा है।

इसके कारण भी पदाधिकारी नाराज बताए जा रहे हैं। हिमांशु शर्मा ने युवा मोर्चा का कार्यभार अनौपचारिक तौर पर संभाल लिया है। उन्होंने युवा मोर्चा के कार्यालय में बैठना भी शुरू कर दिया है किंतु जो मुख्य कुर्सी है, उसको साइड में हटाकर छोटी कुर्सी पर बैठना प्रारंभ किया है।

इस बीच उनके द्वारा युवा मोर्चा के अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं में खासी चर्चा हो रही है कहा जा रहा है कि इस मामले में भी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान प्रदेश मंत्री अशोक सैनी के द्वारा ही सब कुछ तय किया जाएगा।

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