सभी महापौर प्रत्याशी संघ-भाजपा की पसंद, वसुंधरा गुट को किया दरकिनार

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा जयपुर, जोधपुर और कोटा के सभी छह जगह पर महापौर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। चर्चा है कि सभी जगह पर प्रत्याशियों के चयन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ऐसे में माना जा रहा है कि एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद को लगभग दरकिनार किया गया है। इसके चलते चर्चा है कि भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां का संघ-संगठन के साथ तालमेल बेहतर होता जा रहा है।

सियासी चर्चाओं के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने मेयर प्रत्याशियों में संघ की पसंद को पूरी तवज्जो दी है। मेयर के सभी प्रत्याशी संघ से राय मशविरा कर पार्टी की चुनाव समिति ने तय किये हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर हेरिटेज से भाजपा की मेयर प्रत्याशी कुसुम यादव का नाम चाहरदीवारी इलाके में कांग्रेस के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को रोकने के लिये मजबूत चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, एक दिन पहले ही कुसुम यादव ने सांसद दिया कुमारी से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि दीया कुमारी ने भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के समक्ष कुसुम यादव का पक्ष रखा है और उसके बाद उनको महापौर उम्मीदवार बनाये जाने का रास्ता साफ हुआ है।

जबकि, भाजपा के पास यहां पर 100 में से केवल 42 पार्षद हैं और बोर्ड बनने की कम संभावना है, फिर भी भाजपा ने कांग्रेस को वॉक ओवर नहीं दिया है। ग्रेटर से भाजपा ने सौम्या गुर्जर को प्रत्याशी बनाया गया है।

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सौम्या को पहले वसुंधरा राजे गुट से मानी जाती थीं, किन्तु करीब एक माह पहले उन्होंने करौली सांसद मनोज राजोरिया के साथ भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनियां से मुलाकात कर हमेशा संगठन एवं अध्यक्ष के प्रति डेडिकेट रहेंगी।

इधर, कुछ लोगों का मानना है कि संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और अध्यक्ष डॉ. पूनियां के द्वारा 4-5 दिन पहले ही सौम्या के नाम पर सहमति बना ली गई थी।

भाजपा के अधिकारिक सूत्रों का यह भी दावा है कि सौम्या गुर्जर के द्वारा पार्टी फंड में मोटा डोनेशन दिया है। आपको बता दें कि सौम्या गुर्जर के पति राजा राम गुर्जर, जोकि करौली नगर परिषद के सभापति ले चुके हैं, उनके ऊपर सरकारी जमीन के आवंटन समेत भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे।

इसके चलते उनको पद से हटा दिया गया था। बाद में सरकार के द्वारा अपने स्तर पर जांच करके उनको बाहर किया गया था। बताया जाता है कि तब राजाराम गुर्जर के द्वारा अशोक गहलोत को रमेश मीणा और सचिन पायलट कहने की तरफ से बदनाम करने और इस तरह से झूठे आरोपों में फंसाने की बात कह कर सारे प्रकरण झूठे होने का दावा किया था।

क्योंकि सचिन पायलट के तौर पर अशोक गहलोत को ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जिसके चलते सरकार के द्वारा राजाराम गुर्जर को फिर से सभापति पद पर बहाल कर दिया गया था।

कांग्रेस पार्टी की तरफ से विधायक महेश जोशी के द्वारा आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जिस महिला को सेल्फी विवाद में महिला आयोग की सदस्य पद से इस्तीफा देना पड़ा था, ऐसी महिला को जयपुर ग्रेटर का महापौर बनाया जा रहा है, जिससे पता चलता है कि भाजपा की क्या सोच रही होगी।

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इससे पहले गुरुवार को महापौर प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में मेदांता अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां वर्चुअल रूप से जुड़े।

बैठक में प्रदेश भाजपा कार्यालय में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री वी.सतीश, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, कैलाश चौधरी, राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर व उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

दूसरी तरफ सौम्या गुर्जर का नाम तय होने के बाद पूर्व महापौर शील धाबाई को भाजपा मुख्यालय में रोका गया। 3:30 बजे तक का नामांकन पत्र दाखिल करने का समय था। सौम्या गुर्जर का नामांकन पत्र दाखिल होने के बाद उनको वापस पार्टी मुख्यालय में लाया गया।

अंदर बंद कमरे में भाजपा के उच्च पदाधिकारियों के साथ शील धाभाई और सौम्या गुर्जर के बीच मुलाकात करवाई गई और इसके बाद सील दवाई को भेजा गया, जब धाभाई भाजपा मुख्यालय से बाहर निकलीं, तब उनकी आंखों में आंसू निकल रहे थे और उन्होंने मीडिया से बात करने से साफ इनकार कर दिया। उनको उनकी बेटी लेने आई थी, उन्होंने भी पत्रकारों से बात नहीं की।