परिसीमन में मजहब का तड़का और भाजपा विधायकों की बेरुखी से कांग्रेस आगे

जयपुर।
राजधानी जयपुर, जोधपुर और कोटा के सभी 6 नगर निगम के चुनाव का परिणाम मंगवार को घोषित किया गया। जयपुर हैरेटेज की 100 सीटों में से 42 पर भाजपा और 47 पर कांग्रेस जीती है। यहां पर 11 निर्दलीय प्रत्याशी बाजी मारने में सफल रहे हैं।

भाजपा को आमेर के 4 में से दो में सफलता मिली है। हवा महल के 26 में से 12, सिविल लाइंस में 24 में से 10, किशनपोल की 21 में से 8, आदर्श नगर की 25 में से 10 सीट पर भाजपा जीती है। इसी तरह से विद्याधर नगर की 42 में से 26, झोटवाड़ा की 22 में से 15, सांगानेर की 39 में से 22, बगरू की 21 में से 9 और मालवीय नगर की 26 में से 16 सीटों पर भाजपा जीती है।

इसी तरह से ग्रेटर के 150 वार्डों में से भाजपा को 86, कांग्रेस को 44 और 12 पार्षद निर्दलीय जीते हैं। जोधपुर उत्तर के 80 में से भाजपा 19, कांग्रेस 53 और 9 निर्दलीय जीते हैं। जोधपुर दक्षिण में 80 में से भाजपा 43, कांग्रेस 29 और 8 निर्दलीय जीते हैं। कोटा उत्तर की 70 में से भाजपा 14, कांग्रेस 48 और निर्दलीय 5 जगह जीते हैं। कोटा दक्षिण की 80 में से भाजपा 35, कांग्रेस 36 और 8 निर्दलीय जीते हैं।

कांग्रेस की सरकार के द्वारा जिस तरह की रणनीति अपनाई गई उससे निश्चित ही कांग्रेस को फायदा हुआ है। क्योंकि परिसीमन में कांग्रेस के द्वारा तीनों ही जिलों में मजबह के नाम पर काम किया गया, उसके उपर भाजपा के विधायक अपने लोगों को टिकट नहीं दिला पाने से असहयोग आंदोलन पर उतर आए थे, जिसका भाजपा प्रत्याशियों को नुकसान हुआ। सांगानेर, मालवीय नगर विधायकों के खिलाफ जनता के रोष पार्षद प्रत्याशियों को भारी पड़ा है।

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भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के लिये यह चुनाव बड़ी जीत के तौर देखे जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुट के असहयोग आंदोलन के बाद भी जिस तरह से डॉ. पूनियां के नेतृत्व में भाजपा स्पष्ट रूप से 2 नगर निगम में बोर्ड बनाना और कोटा दक्षिण में भी निर्दलीयों को साथ लेकर यदि बोर्ड बना सके तो आधा—आधा राज हो जाएगा, जो अशोक गहलोत की सरकार की बहुत बड़ी हार मानी जा रही है।

पंचायत समिति, जिला परिषद और नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव का परिणाम सत्ता के साथ जाने की परम्परा राजस्थान में रही है, लेकिन जिस तरह से परिसीमन की तमाम गुस्ताखियों के बाद भी भाजपा ने 6 में से दो पर स्पष्ट जीत, इसके साथ ही तीसरी और चौथी जगह पर कड़ी टक्कर दी है, वह कहीं न कहीं अध्यक्ष डॉ. पूनियां के नेतृत्व की कामयाबी मानी जाएगी।

मोटे तौर पर देखा जाए तो जयपुर हैरिटेज में मुस्लिम मतदाताओं का सीधे तौर पर कांग्रेस का बोर्ड बनाने के करीब पहुंचा दिया है। बाजजूद इसके कांग्रेस अब भी निर्दलीयों के भरोसे है। कम से कम 18 वार्डों में कांग्रेस को केवल मुस्लिम समाज के उपर निर्भर रहने के लाभ मिला है। हालांकि, महेश जोशी, अमीन कागजी और प्रतापसिंह खाचरियावास को आशानुकूल सफलता नहीं मिली है।

भाजपा के अशोक लाहोटी, नरपत सिंह राजवी, राजपाल सिंह और कालीचरण सराफ ने प्रदेश नेतृत्व को एक बार फिर सीधे तौर पर चुनौती देने का साहस किया है, यह भाजपा नेतृत्व के लिये सोचने के समय है। जबकि परिणाम आने से पहले ही राजवी ने अपने क्षेत्र के पार्षद प्रत्याशियों को भाजपा के बाड़े में जाने से रोककर अपनी नाराजगी दिखाई, वह भी कहीं न कही सोचनीय जरुर है।

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भाजपा ने जयपुर हैरिटेज में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को समन्वयक बनाया, यहीं पर विधायक वासुदेव देवनानी को चुनाव प्रभारी और प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल को सह प्रभारी बनाया। इसी तरह से यहां पर पूर्व जिला अध्यक्ष हरिहरलाल पारीक को चुनाव संयोजक और एससी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री महेंद्र ढलेत को सह संयोजक बनाया था। इनकी जिम्मेदारी भी भाजपा को देखनी होगी।

इसी तरह से जयपुर ग्रेटर में भाजपा का आसानी से बोर्ड बन रहा है, किंतु कोटा और जोधपुर में भी भाजपा को आशानुकूल सफलता नहीं मिलने के कारण निराशा हुई है। चुनाव के दिन और उससे ठीक पहले भाजपाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की तबियत नासाज होने का नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ रहा है। कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के द्वारा टिकट बांटना और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल को दरकिनार करने का भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा है।

यहां पर भाजपा बोर्ड बनाने के लिये मुश्किल स्थिति में फंस गई है। कोटा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समन्वयक थे। साथ ही कोटा उत्तर में किरण माहेश्वरी चुनाव प्रभारी और दक्षिण में अर्जुन मीणा प्रभारी थे, जिनको भी प्रदेश नेतृत्व को जवाब देना होगा। जोधपुर में अशोक गहलोत का गृह जिला होने और परिसीमन में कथित तौर पर कांग्रेस द्वारा गड़बडी किये जाने का लाभ कांग्रेस को मिला है।