भाजपा गुर्जर आरक्षण आंदोलन का समर्थन करती है: राठौड़

जयपुर। भाजपा विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि कल से राजस्थान विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो रहा है और एक ऐसे मामले में यह सत्र बुलाया जा रहा है, जो एक तरह से संविधान के संघवाद को चुनौती दी जा रही है।

शायद आने का परंपराओं को और सही दाम में प्रदत्त अधिकार नहीं होते हुए भी केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कृषि व्यापार से जुड़े तीन कानून, जो 24 सितंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाहर देश में प्रचारित हो गए हैं, उनके दर्शन के लिए यह सत्र बुलाया जा रहा है। विधानसभा का विशेष सत्र निश्चित रूप से आहूत होना चाहिए।

लेकिन आहूत इस बात पर होना चाहिए कि नेशनल क्राइम ब्यूरो रिपोर्ट की ताजा रिपोर्ट आई है, राजस्थान में कानून व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ रही हैं। राजस्थान में 21.4 फ़ीसदी अपराध बढ़े, जयपुर में 30.7% अपराध बढ़ना इस बात को साबित कर रहा है कि प्रदेश में आम आदमी दहशतगर्दी की जिंदगी जी रहा है।

इसी कारण नगर निगम चुनाव, जिसका अंतिम चरण प्रारंभ हो रहा है। पहली बार राजस्थान के तीनों महानगरों में, जिसका चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस सरकार ने बिना मापदंड और मानदंड के दो-दो भागों में शहरों के नगर निकाय को विभाजित किया।

यह पहली बार कानून व्यवस्था एक मुद्दा रहा 1 वर्ष से प्रशासक लगाने के बाद भी नगर निगम चुनाव में बड़ी पराजय की ओर बढ़ रही है। यह पहली बार हुआ कि कांग्रेस का संगठन प्रदेशभर से लेकर ब्लॉक स्तर तक नदारद रहा, संगठन बनाने और चुने हुए विधायकों ने अपने पूरे वर्चस्व को बनाने के लिए मजबूर कर दिया।

कांग्रेस सरकार को सरकार को राजस्थान में 15.30% बेरोजगारी राजस्थान में है। बेरोजगारी भत्ता देने वाली सरकार ने जहां इसके मापदंड के अनुसार 2 साल तक बेरोजगार हैं, उनकी संख्या 27 लाख हैं, उनको धता बताकर 68000 लोगों को भत्ता दिया है, वह भी पिछले 3 महीने से बंद है।

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मुख्यमंत्री के कहने से आर्थिक सलाहकार परिषद की पहली बैठक हुई, जिसमें आयोजन सचिव सिद्धार्थ महाजन ने आंकड़ों के साथ यह का राज्य सरकार का कुल राजस्व का 108% वेतन पेंशन और लिए गए कर्ज की ब्याज की अदायगी में जा रहा है।

उस बात को सिद्ध कर रही है कि राज्य सरकार आर्थिक आपातकाल की ओर बढ़ रही है, जो बजट प्रस्तुत किया था विधानसभा में बजट घोषणा, अब तक 28% पूरी नहीं हुई है। सत्र बुलाकर कहना चाहिए कि किन परिस्थितियों में राजस्थान की अर्थव्यवस्था है और सरकार ने जो बजट रखा, उसमें कितना योजना कटेगा, कौन-कौन सी घोषणा सरकार ने स्थानीय निकायों के चुनाव और पंचायत राज चुनाव को जीतने के लिए योजनाएं सत्र में चर्चा होनी चाहिए।
राजस्थान में प्रतिदिन 92 मां, बहन, बेटियां किसी न किसी उत्पीड़न का शिकार होती है।

बच्चों के अधिक अपराध में 1.96 फ़ीसदी बढ़ोतरी हुई है राजस्थान में जिस प्रकार का माहौल बना हुआ है। 2 दिन पहले ही लोहावट की घटना न्यायालय के स्थगन के बाद जमीन पर ट्यूबेल बनाकर चतुर राम नाम के व्यक्ति पर हमला किया। सुरक्षा में पुलिस ने गुहार की, लेकिन पुलिस नहीं आई, कुछ समय बाद हत्या कर दी।

इससे बड़ा दुर्भाग्य नहीं हो सकता सत्तारूढ़ दल के विधायक को चाकसू विधायक वेद प्रकाश सोलंकी को धरने पर बैठना पड़ा। बीकानेर की व्यापारी को गोली मारने वाली घटना, शाहपुरा में व्यापारी को लूटना, अलवर में सैलरी मांगने पर फ्रीज में जमा दिया।

ऐसी घटनाएं पहली बार पूर्व विधायक की हत्या में चश्मदीद गवाह की हत्या कर दी राजस्थान में जिस प्रकार के हालात हैं, राज्य अपराध की राजधानी बन चुका है, प्रदेश आर्थिक आपातकाल की ओर बढ़ रहा है।

ऐसे में राजस्थान की सरकार विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि और कृषि से संबंधित तीनों बिलों को अपने नेताओं को खुश करने के लिए, इनको निष्प्रभावी कर रहे हैं, इससे बड़ा दुर्भाग्य हो नहीं सकता।

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नगर निगम चुनाव में दावा करते हुए राठौड़ ने कहा कि तीनों महानगरों में भाजपा का परचम पहरेगा। राजस्थान में गृहमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री, जिन्होंने अपने मताधिकार का भी प्रयोग नहीं किया, एक तरह से लोकतंत्र को अपमानित करने का काम किया।

हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था जर्जर है, दूसरी ओर जिससे सिद्ध कर रहा है कि विकास की कोई संभावना दूर-दूर तक नहीं है। इस प्रकार की दहशतगर्दी जयपुर में पुलिस के द्वारा मतदान के दौरान की गई, जिसके कारण पूर्व अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को धरने पर बैठना पड़ा।

इसके बाद भी कांग्रेस पार्टी अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाएगी। 2 साल में पंचायत राज संस्थाओं की दुर्दशा हुई है, जो उनका वैधानिक अधिकार है, राज्य वित्त आयोग केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों से सीधी स्थानांतरित होनी चाहिए थी, उसमें 970 करोड रोकना, राज्य वित्त आयोग की पंचम रिपोर्ट को रोकना, राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं को पंगु करना चाहती है।

इस डर से मंथन चिंतन में लगी हुई है। बिना निशान के पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव कराएं, इससे साबित होता है कि यह सरकार भयाक्रांत है, सरकार हर क्षेत्र में विफल साबित हुई है।

राठौड़ ने कहा कि भाजपा गुर्जरों को 5% आरक्षण देने के पक्ष में है। साल 2008 में भाजपा सबसे पहले कानून लेकर आई। नवीं अनुसूची में डालने के लिए केंद्र को भी भेजा। साल 2014 में फिर कानून लेकर आई, इसके बाद वर्ष 2018 में कानून लेकर आई।

भाजपा सरकार में गुर्जर समाज के 4000 से ज्यादा लोगों को आरक्षण में नौकरियां भी मिली। सरकार अपने वादों के अनुसार न्याय नहीं कर रही है, गुर्जर समाज वह समाज है, जो कांग्रेस को वैतरणी पार करने के लिए शत-प्रतिशत वोट किया था, सचिन पायलट को लगातार अपमानित किया जा रहा है।

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गुर्जरों से वार्ता करने के बजाय चंद प्रतिनिधियों से बातचीत कर रही है, ताकि गुर्जर समाज भ्रमित हो जाए। सरकार को चाहिए कि गुर्जरों से वार्ता करनी चाहिए।
केंद्र ने नवी अनुसूची के अंदर एक भी एंट्री नहीं है, राज्य सरकार दिल को भेजेगी तो हम उसका समर्थन करेंगे।

गुर्जर समाज के लोगों को मुआवजा देने के बाद योजनाएं चल रही है, योजना में बजट की कटौती हुई है। इन सभी बातों को लेकर गुर्जर समाज के अंदर जो वादा किया था। इन सभी बातों को लेकर समाज के लोगों से सरकार को वार्ता करें, उस पर कायम रहना चाहिए।

सदन में तर्कों के आधार पर सिद्ध करेंगे। राजस्थान सरकार जितेन संशोधन विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा प्रचारित किसान कल्याण के लिए जो किसान की जिंदगी को बदलने वाले कानूनों को खोटी नियत से राजस्थान सरकार कर रही है, उनको पुरजोर विरोध किया जाएगा, कल पहला दिन है।

कुछ घटनाएं किन परिस्थितियों में यह घटनाएं हुई है, उन पर दर्द महसूस किए हैं, हमने जो किया वह सरकार भी यह करना चाहती हैं, तो इसे साथ में रहने का कोई अधिकार नहीं है। सरकार को 5 वर्ष फैशन करने का अधिकार है, आधी उम्र में सरकार कितनों को संतुष्ट करवाइए,
यह उनका व्यक्तिगत मत है।

इस पर वह क्या निर्णय लेने हनुमान बेनीवाल से दूर देश के नेताओं की बात नहीं हुई है। संसदीय कार्य मंत्री की अज्ञानता के कारण ऐसा हो रहा है, जब तक कार्य सलाहकार समिति की बैठक ना हो उसके बाद बाहर बात करना है। यह अज्ञानता है, पहले भी माफी मांगनी पड़ी थी, मैं मांग करता हूं उनको माफी मांगना चाहिए।