पूर्व विधायक अलका गुर्जर से भी छोटी हो गईं वसुंधरा राजे?

– बिहार चुनाव में पूर्व विधायक अलका सिंह गुर्जर को प्रचार के लिए लगाया गया है, लेकिन भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा वसुंधरा राजे की अनदेखी क्यों की गई है?

जयपुर। राजस्थान में दो बार की मुख्यमंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे को ऐसा लग रहा है भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा अनदेखा किया जा रहा है।

हाल ही में पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री बनाई गईं पूर्व विधायक अलका सिंह गुर्जर को बिहार चुनाव में प्रचार के लिए पार्टी के द्वारा लगाया गया है, किंतु लंबे समय तक राजस्थान की राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्य में मुख्यमंत्री होने तक का दबदबा रखने वाली वसुंधरा राजे को बिहार चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना इसी तरफ इशारा कर रहा है।

अलका सिंह गुर्जर के अलावा जालौर के सांसद देवजी पटेल और अलवर के सांसद बालक नाथ को बिहार के चुनाव प्रचार में झोंक दिया गया है। राजस्थान से तीन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चौधरी और अर्जुन राम मेघवाल को भी बिहार चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके अलावा भी कुछ और नेताओं की डिमांड की गई थी, लेकिन राज्य में जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगमों के चुनाव को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के द्वारा असमर्थता जताई गई। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि राजनीति में बड़ा कद रखने वाली और राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे को पार्टी के द्वारा लगातार अनदेखा क्यों किया जा रहा है?

आपको बता दें कि इससे पहले भी वसुंधरा राजे को हरियाणा समेत दूसरे चुनाव के लिए प्रचार की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। इस चुनाव में भी महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को स्टार प्रचारक बनाया गया है।

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इसके साथ ही कई केंद्रीय नेता, जो सियासी तौर पर वसुंधरा राजे से काफी छोटे हैं, उनको भी स्टार प्रचारक बनाकर बिहार में पार्टी ने जिम्मेदारी दी है, फिर भी वसुंधरा राजे को नहीं बुलाना भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

चर्चा यह भी है कि केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा भले ही अच्छा संदेश दिए जाने को देखते हुए वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया हो, किंतु ऐसा लग रहा है कि अब भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में वसुंधरा राजे का और ऊंचाइयों पर जाने वाला समय बीत चुका है।

पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान इकाई अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के साथ वसुंधरा राजे की लंबी खींचतान के नतीजे के रूप में भी इस को परिभाषित किया जा रहा है।

भले ही पार्टी नेतृत्व की सोच कुछ भी रही हो, लेकिन वसुंधरा राजे को बिहार जैसे अति महत्वपूर्ण चुनाव में इस्तेमाल नहीं किया जाना पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय जरूर बन गया है।