हम अमित शाह से प्रेरणा लेते हैं, उनसे किसी का कोई मुकाबला नहीं है: डॉ. पूनियां

-नेशनल दुनिआ को दिए गए विशेष साक्षात्कार में डॉ.सतीश पूनियां ने बताया कि पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत की शेख को लेकर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास करते हैं।

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां का आज 56वां जन्मदिन है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक वर्ष का सफल कार्यकाल भी पूरा कर लिया है। इस अवसर पर नेशनल दुनिआ के संपादक रामगोपाल जाट ने उनसे विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि देश के गृह मंत्री एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से वह प्रेरणा लेते हैं और उनसे किसी का कोई मुकाबला नहीं है। पढ़िए डॉ. पूनियां का पूरा साक्षात्कार-

सवाल: गृह मंत्री अमित शाह और आपका उम्र में केवल 2 दिन का अंतर है, इसके बावजूद दोनों के राजनीतिक उतार-चढ़ाव में बड़ा अंतर है। क्या लगता है आप खुद को अमित शाह के मुकाबले कहां पर पाते हैं?

जवाब: राजनीति में कोई व्यक्ति बड़ा और कोई व्यक्ति छोटा नहीं होता है उनकी और मेरी उम्र में 2 दिन का अंतर है उनको राजनीति में अवसर मिला और उन्होंने खुद को साबित किया। मैं उनसे प्रेरणा लेता हूं। हमने सरदार पटेल को नहीं देखा, लेकिन गृहमंत्री को देखते हैं, उनके द्वारा किए गए कार्यों जिनमें धारा 370 हटाना, तीन तलाक को खत्म करना, नागरिकता संशोधन कानून बनाना, ऐसे मामलों को देखने के बाद पता चलता है कि शायद सरदार पटेल हमारे वर्तमान गृहमंत्री जैसे ही रहे होंगे।

सवाल: छह नगर निगम के चुनाव को लेकर आपके द्वारा जिम्मेदारियां दी गई हैं, लेकिन टिकटों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी खूब लगे हैं। इनको किस दिन से देखते हैं?

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जवाब: राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं। राजनीतिक व्यक्ति को उठने से लेकर सोने तक आरोपों को झेलना पड़ता है। इसलिए मुझे लगता है कि आरोप लगाना एक बात है, लेकिन राजनीति में रहकर जनसेवा करना दूसरी बात है। मेरा मुख्य धैय जनसेवा है, आरोप-प्रत्यारोप को मैं ज्यादा तवज्जो नहीं देता। चुनाव तो इससे बड़े भी आएंगे 138 नगर पालिकाओं की चुनाव बाकी हैं, लेकिन हम तो यह मानते हैं कि लड़ना जरूरी है। जीतना और हारना जनता के मत के ऊपर निर्भर करता है।

सवाल: पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत की जन्म जयंती है और यह माना जाता है कि आपका उनके साथ काफी आत्मीय संबंध रहा है। ऐसी कौन सी राजनीतिक सीख है, जिसको आप जीवन पर्यंत खुद के ऊपर लागू रखना चाहते हैं?

जवाब: उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह पूरे प्रदेश भर में जनता से मिलते थे और हमेशा अंत्योदय की बात करते थे, तो इसी के लिए तैयार करते थे। मैंने उनसे यही सीखा है कि हमेशा प्रदेश की भलाई के लिए और गरीब जनता का जीवन स्तर ऊंचा कैसे उठे, इसी को लेकर सोच रखता हूं और यही मेरी राजनीति का उद्देश्य है।

सवाल: कहा जाता है कि भैरोंसिंह शेखावत को राजस्थान की राजनीति में से जिस व्यक्ति ने रिप्लेस किया, आजकल चर्चा है कि आप ही उस व्यक्ति को रिप्लेस कर रहे हैं?

जवाब: कोई भी किसी भी व्यक्ति को रिप्लेस नहीं करता, सब अपने अपने कर्म किए का खाते हैं। जो काम करते हैं, वह पार्टी और नेतृत्व की नजर में होते हैं। कुछ का आकलन जनता करती है और कुछ का आकलन पार्टी करती है। जो काम करता हूं, वह जनता भी देखती है। मैं केवल चुनावी राजनीति नहीं करता, मैं सामाजिक रूप से प्रदेश की चिंता भी करता हूं।

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सवाल: नगर निगम के चुनाव में जा रहे हैं, ऐसे कौन से मुद्दे हैं जिन को लेकर जनता के बीच पहुंचने का प्रयास करेंगे?

जवाब: मुद्दे तो कांग्रेस की सरकार ने ही दे दिया है 20 महीने के कार्यकाल के दौरान निगम के द्वारा कोई कार्य नहीं किया गया। एक साल तक जयपुर में कांग्रेस का अपने घर था और 6 महीने से प्रशासक, लेकिन इस दौरान एक भी वर्क आर्डर नहीं हुआ, यह अपने आप में बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा प्रदेश में अपराध, जिसमें महिला अत्याचार, गैंगरेप, बलात्कार, दलित उत्पीड़न और सरेआम डकैती, इसको लेकर खुद मुख्यमंत्री और गृहमंत्री होने के नाते अशोक गहलोत जिम्मेदार हैं, जनता त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रही है। कोरोना का कूप्रबंधन जयपुर निगम के द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाना, सरकार के द्वारा तीन शहरों के हॉटस्पॉट बनने के बावजूद केवल आंकड़ों से खेलना और तमाम तरह विफलताओं को लेकर सरकार आज जवाब नहीं दे पा रही है।

सवाल: प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद लंदन गए, वहां पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ मुलाकात की और उसके कुछ ही समय बाद कांग्रेस में उठापटक शुरू हो गई थी। आज आपने प्रेस क्लब में वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ मुलाकात की है। ऐसा लग रहा है जल्दी कांग्रेस में कुछ और उधेड़बुन शुरू होने वाली है?

जवाब: मैं जब भी कांग्रेस के नेताओं से मिलता हूं तो इस तरह की चर्चा शुरु होती है। अगर मेरी वजह से कांग्रेस पार्टी में इस तरह की कोई गतिविधि होती है तो सोचना पड़ेगा कि कांग्रेस पार्टी इतनी कमजोर हो गई है कि मेरे किसी भी नेता के साथ मिलने से ही हलचल शुरू हो जाती है। यह मुलाकात महज संयोग है, लेकिन कांग्रेस में फूट है। पिछले दिनों हमने देखा कि किस तरह से कांग्रेस पार्टी के ही 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी। कॉन्ग्रेस आज की तारीख में बिखराव की तरफ है, नैतिक रूप से भी और राजनीतिक रूप से भी।

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सवाल: तीन कृषि बिलों को लेकर हनुमान बेनीवाल गठबंधन तोड़ने की धमकी दे रहे हैं, क्या लगता है वास्तव में वह किसान हितेषी हैं या फिर 2023 की राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं?

जवाब: किसानों के हित में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा तीन कृषि कानून बनाये गए हैं, जिसमें किसानों को मंडी की अनिवार्यता से मुक्त किया गया है। तमाम तरह की बाधाओं को दूर कर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है, इसी का दर्द कांग्रेस पार्टी को है और वह चाहती है कि किसानों के बहाने उनको फिर से मौका मिले, लेकिन जो भी गठबंधन दल भाजपा के साथ हैं और जो छोड़कर जा रहे हैं, उनकी सोच है। किंतु इतना जरूर है कि किसानों के हित में मोदी सरकार किसानों के लिए हमेशा कटिबद्ध है, प्रतिबद्ध है।