भाजपा के संगठन ने दिखाई ताकत, 30% में सिमट गए विधायक

– कई वर्षों बाद भारतीय जनता पार्टी संगठन के द्वारा इतने बड़े पैमाने पर टिकट बांटे गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को भी टिकट देकर संगठन को मजबूत करने का काम किया गया है।

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा राजधानी जयपुर जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगमों के लिए अपने प्रत्याशियों के चयन में बरसों बाद संगठन को पूरा महत्व दिया है।

पूरी लिस्ट को खंगालने के बाद स्पष्ट हो गया है कि भाजपा संगठन के द्वारा करीब 70% और संबंधित विधायकों की अनुशंसा पर 20 से लेकर 30% टिकट दिए गए हैं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के टिकट पर राजस्थान विश्वविद्यालय का चुनाव लड़ने के साथ अपनी राजनीति शुरू करने वाले भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने बड़े पैमाने पर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को भी टिकट देकर संगठन को मजबूत करने का काम किया है।

जयपुर की 250 सीटों की बात की जाए तो विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को 28 टिकट बांटे गए हैं, जिनमें से 4 कार्यकर्ता वर्तमान में सक्रिय रूप से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काम कर रहे हैं। इसी तरह से आरएसएस की पसंद को भी पूरी तहरीर दी गई है।

भारतीय जनता पार्टी के बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को वरीयता देते हुए निगम के इस चुनाव में पार्षद बनने का अवसर प्रदान किया है।

विद्याधर नगर के विधायक नरपत सिंह राजवी, झोटवाड़ा के पूर्व विधायक राजपाल सिंह, सिविल लाइंस के पूर्व विधायक अरुण चतुर्वेदी, मालवीय नगर के विधायक कालीचरण सराफ, आदर्श नगर की पूर्व विधायक अशोक परनामी, सांगानेर के विधायक अशोक लाहोटी और बगरू के विधायक कैलाश वर्मा को संगठन के द्वारा इस बार सीमित करने का कार्य किया गया है।

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जिस तरह से हमेशा विधायक अपने लोगों को टिकट दिलाने के लिए कामयाब हो पाते थे, इस बार नजारा कुछ और ही नजर आया है। टिकट बंटवारे से पहले ही भाजपा ने स्पष्ट कर दिया था कि 65 साल से अधिक उम्र के दावेदारों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

इसके साथ ही जो दावेदार जिस वार्ड का होगा, उसी वार्ड के व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जाएगा, इस पर संगठन ने पूरा फोकस किया है। महिलाओं के साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों पर भी दांव खेला गया है।

अल्पसंख्यक समुदायों में से मुस्लिम समाज की दावेदारों को भी टिकट देकर भाजपा से दूर माने जाने वाले इस समाज को जोड़ने का प्रयास शुरू हो चुका है। इसी तरह से पूरी सूची को देखने के बाद पता चलता है कि 50% टिकट 40 साल तक की उम्र के उम्मीदवारों को दिए गए हैं।

भाजपा में दिनभर चर्चा इस बात की जोरों पर रही कि पिछले करीब 12-13 साल में पहली बार संगठन के द्वारा विधायकों की पसंद को सीमित करके संगठन के आम कार्यकर्ताओं को मौका देने का काम किया गया है।