फिर छिनी हनुमान बेनीवाल से बोतल, इस बार किसने किया दावा?

जयपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल को चुनाव आयोग ने एक बार फिर से बड़ा झटका दिया है। हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग (Election commission) ने फ्री लिस्ट में डाल दिया है।

हनुमान बेनीवाल ने इसको लेकर कहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव के वक्त भी उनकी पार्टी का गुजरात की एक फर्जी पार्टी ने चुनाव चिह्न दिया लिया था, जिसकी जांच चल रही है और उस मामले में अभी तक पड़ताल जारी है।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को बोतल का चुनाव चिन्ह अलॉट किया गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 के भक्त उनको टायर के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ना पड़ा था।

उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग में बैठे कुछ अधिकारियों ने बड़ी पार्टियों के साथ मिलीभगत करके उनकी चुनाव चिन्ह बोतल को फ्री लिस्ट में डालने की साजिश की है, जिसको लेकर वह खुद चुनाव आयोग से मिलेंगे और इसके साथ ही उन्होंने राजधानी जयपुर और नागौर में भी चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत की है।

हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि उन्होंने 20 साल तक मेहनत करके वर्तमान पोजीशन पाई है, उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके साथ ही बेनीवाल ने यह भी कहा है कि 2023 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों पार्टियों में से किसी एक पार्टी को तीसरे नंबर पर धकेल दिया जाएगा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी दूसरे नंबर पर आएगी।

हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि चुनाव आयोग में बैठे हुए ऐसे लापरवाह और साजिश करने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत की गई है। इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह को फ्री लिस्ट में डालने का काम किया है। क्योंकि उनकी पार्टी क्षेत्रीय पार्टी के रूप में रजिस्टर्ड है, उसके बावजूद इस तरह की लापरवाही करना कानूनन अपराध है।

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हनुमान बेनीवाल इससे पहले ही कह चुके हैं कि कृषि बिलों में अगर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संशोधन नहीं किए तो किसानों के हितों को लेकर वह बड़ी रैलियां करेंगे और भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने में 1 मिनट नहीं लगाएंगे।

इसके साथ ही हनुमान बेनीवाल ने एक बार फिर से वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के गठजोड़ की चर्चा करते हुए कहा है कि इन दोनों का गठजोड़ खुलकर सामने आ चुका है, खासतौर से पिछले दिनों से राजनीतिक लड़ाई के दौरान, जब वसुंधरा राजे ने अशोक गहलोत की सरकार बचाई और गहलोत ने नियमों में संशोधन कर वसुंधरा राजे को बंगला जारी रखा।