NEET में बराबर अंक, फिर भी आफताब की रैंक एक और आकांशा सिंह की दो क्यों? जानिए मामले में झोल क्या है?

नई दिल्ली। ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट’ (NEET-2020) की परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

मामला ये है कि ओडिशा के एक लड़के और दिल्ली की एक लड़की को इस परीक्षा में सामान मार्क्स ही आए, फिर भी ओडिशा के लड़के को पहला स्थान दिया गया और दिल्ली की लड़की को दूसरा।

NEET ने शुक्रवार (16 अक्टूबर 2020) को रिजल्ट्स जारी किए, जिसमें ओडिशा के शोएब आफताब ने AIR 1 प्राप्त किया और आकांक्षा सिंह को दूसरा स्थान मिला।

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अगर रैंक लिस्ट देखें तो पता चलता है कि दिल्ली की आकांक्षा सिंह को भी इतने ही नंबर आए थे। दोनों ने ही पूरे मार्क्स, यानी 720 हासिल किए। लेकिन, शोएब की ऑल इंडिया रैंक 1 थी और आकांक्षा की दो।

इसके बाद सोशल मीडिया में लोगों ने बहस शुरू कर दी कि आखिर इसका कारण क्या है। दोनों ही अनारक्षित कैटेगरी से हैं और उन्होंने सारे विषयों में समान नंबर ही हासिल किए हैं। इसीलिए, ये लोगों के बीच चर्चा का विषय बना।

दरअसल, यहाँ पर NTA की ‘टाई ब्रेकिंग पॉलिसी’ लागू होती है, जहाँ समान नंबर आने पर रैंक अलॉट करने के सम्बन्ध में कुछ नियम तय किए गए हैं। इसमें परफॉरमेंस और बेसिक एलिजिबिलिटी के आधार पर रैंक तय किया जाता है।

NTA के एक अधिकारी ने बताया कि इस पॉलिसी के तहत अगर दो अभ्यर्थियों को समान नंबर आ जाते हैं तो बायोलॉजी और केमिस्ट्री विषय में उनके मार्क्स के आधार पर उनकी रैंक तय होती है।

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अगर इससे भी बात नहीं बनी तो देखा जाता है कि किसके कितने जवाब गलत हैं और इस आधार पर रैंक दी जाती है। चूँकि शोएब आफताब और आकांक्षा सिंह के नंबर समान हैं, उन्होंने पूरे नंबर हासिल किए हैं।

यहाँ किसी विषय में आगे-पीछे होने या फिर सवालों के सही-गलत होने की संख्या में अंतर होने की कोई सम्भावना ही नहीं है। NTA के नियमों के अनुसार, यहाँ अंत में उम्र के हिसाब से रैंक तय की जाती है।

जिसकी उम्र ज्यादा होगी, उसका स्थान या रैंक ऊपर होगी। 18 वर्षीय शोएब आफताब की उम्र आकांक्षा सिंह से ज्यादा है, इसीलिए उन्हें पहली रैंक दी गई।

NEET की परीक्षा में 15.97 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 7,71,500 ने क्वालीफाई किया है। परीक्षा के लिए उपस्थित हुए 13.6 लाख छात्रों में से 8.8 लाख लड़कियाँ थीं। अंग्रेजी सहित 11 भारतीय भाषाओं में NEET की परीक्षा ली गई।