हनुमान बेनीवाल के तीसरे मोर्चे में कितनी ताकत है, निकाय चुनाव के बहाने फिर ठोका दम

जयपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने नगर निगम चुनाव को लेकर एक बार फिर से तीसरे मोर्चे की ताकत दिखाने का दम भरा है।

हनुमान बेनीवाल ने जयपुर जोधपुर और कोटा के छह नगर निगम के चुनाव के लिए अपनी पार्टी की तरफ से उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि गांव के युवाओं की लड़ाई लड़ने वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी अब शहर के युवाओं के लिए भी लड़ाई लड़ेगी।

हनुमान बेनीवाल ने दिसंबर 2018 के चुनाव से ठीक 20 दिन पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठन कर चुनाव में उतरे थे। उन्होंने करीब 60 विधानसभा क्षेत्र में अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से खुद समेत तीन उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे।

इसके बाद करीब 6 महीने उपरांत मई 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन हुआ और उन्होंने खुद उम्मीदवार के तौर पर नागौर से सांसद बनने में कामयाबी हासिल की।

मई 2019 से लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी के साथ हनुमान बेनीवाल का गठबंधन ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन पिछले दिनों 3 कृषि विधायकों को लेकर हनुमान बेनीवाल ने किसानों की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ गठबंधन तोड़ने का इशारा कर दिया।

क्योंकि हनुमान बेनीवाल का सपना राजस्थान में तीसरे मोर्चे को ताकत बनाने का रहा है। ऐसे में 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले हनुमान बेनीवाल एक बार फिर से खुद की पार्टी की ताकत को परखना चाहते हैं। उनको पता है कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सबसे बड़ा अवसर है जब वह शहरों में अपनी पार्टी के वोटर की वास्तविक स्थिति जान सकते हैं।

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अगर हनुमान बेनीवाल इन 3 जिलों के 6 नगर निगम में पार्षद उम्मीदवार उतारते हैं और अगर उनको 5 गया 10% भी सफलता मिलती है, तो हनुमान बेनीवाल 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार उतार सकते हैं।

संभवत हनुमान बेनीवाल अपनी ताकत को पहचानने और उनकी पार्टी का साथ देने वाले वास्तविक मतदाताओं की स्थिति को जानने के लिए ही इन 6 नगर निगमों के चुनावों को चुना है और भाजपा से अलग रह कर खुद के उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।

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आपको बताते हैं कि राजस्थान की राजनीति में अब तक कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा तीसरी ताकत कोई भी दल नहीं बन पाया है। 2013 के चुनाव में किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी के चार विधायक जीतने में कामयाब हुए थे, लेकिन 2018 के चुनाव से पहले किरोड़ी लाल मीणा ने भाजपा का दामन थाम लिया था।

राजस्थान विधानसभा में आज भी निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या भले ही अच्छी खासी हो, लेकिन फिर भी राज्य में भाजपा और कांग्रेस को छोड़कर तीसरा कोई दल ऐसा नहीं बन पाया है जो इन दोनों पार्टियों को खुले तौर पर सत्ता के लिए चुनौती दे सके।

किसानों गरीबों बेरोजगारों की आवाज बनने का दावा करने वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल और पार्टी के तमाम पदाधिकारी आम आदमी की आवाज बनने का दम भरते हैं और इसी दम पर तीसरे मोर्चे के तौर पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।