6×6 की कोठरी में बन्द हैं 16 आदिवासी बच्चे: डॉ. मीणा

जयपुर/डूंगरपुर। राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा 10 बजे उदयपुर सर्किट हाउस से खेरवाड़ा के लिए प्रस्थान करेंगे। यहां पिछले दिनों पुलिस फायरिंग में आंदोलन के दौरान शहीद हुए आदिवासी युवकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर और परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करेंगे।

मीणा का कहना है कि यहां पुलिस की ओर से झूठे मुकदमों में फंसाए गए आदिवासियों के परिजनों से मुलाकात का भी कार्यक्रम है। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के नाम पर आदिवासियों को प्रताड़ित कर रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आंदोलन के दौरान प्रशासन और पुलिस की लापरवाही की वजह से स्थानीय लोगों की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है। मीणा ने कहा है कि इन लोगों के साथ खड़ा हूं। सरकार को तत्परता के साथ नुकसान का सर्वे करवा कर तुरंत मुआवजा दें।

सांसद डॉ. मीणा ने कहा है कि पुलिस आदिवासियों पर किस प्रकार से जुल्म कर रही है, खेरवाड़ा थाने में इसकी जीवंत मिसाल देखी। थाने के लॉकअप में पुलिस ने 16 निर्दोष बच्चों को अर्द्धनग्न अवस्था में बंद कर रखा है।

उनका कहना है कि 6×6 के इस कमरे में न हवा है और न रोशनी। इन बच्चों का अभी तक कोरोना टेस्ट भी नहीं हुआ है। ये 16 बच्चे खेरवाड़ा थाने की लॉकअप में 26 सितंबर से बंद हैं।

सांसद का कहना है कि नियमानुसार गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर आरोपी को न्यायालय में पेश करना जरूरी होता है, लेकिन पुलिस ने सोमवार को 17वें दिन तक ऐसा नहीं किया है। यदि अवैध हिरासत में किसी बच्चे के साथ अनहोनी हो गई तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?

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मीणा ने बताया कि खेरवाड़ा में पुलिस फायरिंग का शिकार हुए कुलदीप और तरुण अहारी के परिवार को सांत्वना और 50 हज़ार रुपए की सहायता दी। दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब है इसलिए सरकार इन्हें आर्थिक सहायता और एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे।

आंदोलन में हुए नुक़सान का भी जायज़ा लिया ओर सरकार से माँग की की जल्दी से मुआवज़ा जारी करे। उन्होंने कहा है कि सोमवार को डूंगरपुर जिले में पुलिस के दमन का सच सुनकर अंग्रेजों हुकूमत की याद आ गई। पीड़ितों ने बताया कि पुलिस वालों ने रात को सिविल ड्रेस में जाकर महिलाओं से बदसलूकी की।

सांसद का कहना है कि निर्दोष नौजवानों को पीटते-मारते थाने ले जाया गया। उन्हें अवैध हिरासत में रखा गया। उनकी जेब से पैसे निकाले गए। उदयपुर संभाग में आदिवासियों के साथ हो रहा व्यवहार नाकाबिले बर्दाश्त है। यदि सरकार ने इस पर अंकुश नहीं लगाया तो मीणा उदयपुर संभाग में बड़ा आंदोलन खड़ा कर आदिवासी लोगों को न्याय दिलाएंगे।