सभी 6 नगर निगमों पर जीत के लिए डॉ. पूनियां ने बनाया विनिंग प्लान, गहलोत अंतर्कलह में उलझे

जयपुर/जोधपुर/कोटा। इस महीने की 29 तारीख को और अगले महीने की पहली तारीख को होने वाले जयपुर, जोधपुर और कोटा के सभी छह नगर निगम में एकतरफा जीत के लिए भाजपा के अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने विनिंग प्लान तैयार कर लिया है, जिसका शायद अंदाजा कांग्रेस को है ही नहीं।

एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉ पूनियां कोरोनावायरस से उबरने के तुरंत बाद मैदान में उतर गए और उन्होंने जोधपुर, कोटा और जयपुर के ताबड़तोड़ दौरे कर डाले तो दूसरी तरफ अंतरकलह से जूझती हुई कांग्रेस अभी तक कुछ समझ ही नहीं पा रही है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आज एक महत्वपूर्ण बैठक कर मंत्रणा की। बताया जा रहा है कि 13 अक्टूबर को कांग्रेस की पार्षदों की पहली सूची जारी कर दी जाएगी।

दूसरी तरफ भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया जोधपुर और कोटा के दो-दो दिन के दौरे कर वहां पर सांसदों और स्थानीय विधायकों के साथ पदाधिकारियों के संग मुलाकात कर पार्षदों के नाम तय करने के अलावा जीत की रणनीति बना चुके हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई है कि जयपुर, जोधपुर और कोटा के सभी 6 नगर निगमों के महापौर उपमहापौर और अधिक से अधिक पार्षद भाजपा के विजेता होंगे। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार की भयानक विफलताओं के चलते राज्य की जनता में गहरा रोष व्याप्त है।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच जुलाई-अगस्त के दौरान जब राजनीतिक युद्ध चल रहा था, तब भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए थे। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी।

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एक ओर जहां पर सचिन पायलट के समर्थक विधायक और पदाधिकारी अपने अपने लोगों को पार्षद का टिकट जलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा किसी भी सूरत में सचिन पायलट के समर्थक कार्यकर्ताओं को टिकट देने के मूड में नहीं है।

चर्चा है कि सचिन पायलट के बिना अगर कांग्रेस पार्टी चुनाव में जाती है तो अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा के चेहरे पर जनता भरोसा नहीं करेगी और इसका खामियाजा जहां कांग्रेस को हार के रूप में चुकाना होगा तो दूसरी तरफ भाजपा को जीत का तोहफा मिल सकता है।

दूसरी और कथित तौर पर भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे भी वर्तमान नेतृत्व के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं, जिसका फायदा लेने के लिए कांग्रेस की तरफ से प्रयास किया जा रहा है। लेकिन पूरा संगठन अध्यक्ष के साथ होने के कारण भाजपा को इसका कोई खास नुकसान होता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

जयपुर हेरिटेज की 100 सीट, जयपुर ग्रेटर की 150 सीट, इसी तरह से जोधपुर उत्तर की 80 सीट और जोधपुर दक्षिण की 80 सीट के अलावा कोटा उत्तर के 80 सीट और कोटा दक्षिण की 70 सीटों पर भाजपा जीत के लिए पूरा रोडमैप तैयार कर चुकी है।

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती जयपुर का भाजपा वाला गढ़ जीतना तो दूसरी तरफ अंतर कलह से जूझ रही कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में जीत दर्ज करके यह दिखाने का प्रयास करना चाहती है कि सचिन पायलट के बिना भी जीता जा सकता है।

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लेकिन इसके साथ ही यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के गृह जिले कोटा में जीत पाना कांग्रेस के लिए आसान नजर नहीं आ रहा है, जहां पर एक तरफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का लोकसभा क्षेत्र हेतु साथ ही लंबे समय तक कोटा की निभाने और वहां पर जबरदस्त तरीके से सक्रिय होने के कारण सतीश पूनिया की पुरानी टीम काम कर रही है।

ऐसे में जहां तीनों जिलों के 6 नगर निगम में भाजपा के लिए रास्ता आसान है, तो कांग्रेस पार्टी सत्ता के सहारे शासन प्रशासन के माध्यम से जीत की आस लगाए बैठी है।

राजधानी होने के कारण जहां कांग्रेस की पूरी सरकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके खास माने जाने वाले विधायक महेश जोशी अमीन कागजी और रफीक खान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, तो साथ ही यातायात मंत्री प्रताप सिंह के लिए सिविल लाइंस क्षेत्र में अधिक से अधिक पार्षद जिताना बड़ी चुनौती साबित होता जा रहा है।

दूसरी तरफ करीब सवा साल पहले अपने बेटे वैभव गहलोत को लोकसभा चुनाव में कड़ी हार के कारण निराश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए जोधपुर के दोनों निगम जीतना उनके लिए राजनीतिक तौर पर और प्रतिष्ठा की दृष्टि से भी बेहद जरूरी हो गया है, माना जा रहा है कि इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकते हैं।

कोटा में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की इज्जत दांव पर है तो इसके साथ ही भाजपा की तरफ से खुद अध्यक्ष सतीश पूनिया और लोकसभा अध्यक्ष व कोटा के सांसद ओम बिरला के लिए भी दोनों निगम जीतना अहम साबित होगा।

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