सचिन पायलट की बिना अनुमति उनके घर में क्यों घुसी पुलिस? क्या फिर शुरू हो रहा है राजनीतिक युद्ध?

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच जो राजनीतिक लड़ाई शुरू हुई वह अभी खत्म होने की कगार पर नहीं है, बल्कि ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर से सियासी बगावत सिर चढ़कर बोलने वाली है।

ताजा मामला सामने आया है सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह के खिलाफ अशोक गहलोत की पुलिस के द्वारा आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करना और उसके बाद सचिन पायलट की अनुमति के बिना ही उनके घर में घुसकर लोकेंद्र सिंह से पूछताछ करने का।

सामने आया है कि विधायक पुरी थाना अधिकारी के द्वारा सचिन पायलट से पूछे बिना ही उनके घर में घुसकर उनके मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह, जिनके खिलाफ सब इंस्पेक्टर सत्यपाल सिंह के द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया है, उनसे पूछताछ करने के लिए पहुंच गए और काफी देर तक इन्वेस्टिगेशन करने के बाद लौटे।

अब इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच सियासी युद्ध फिर से शुरू होगा इस बार जहां सचिन पायलट शांत हैं, वहीं माना जा रहा है कि अशोक गहलोत की तरफ से उनको उकसाने और बगावत करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि सूर्यगढ़ होटल में जब सरकार के थी, तब वहां पर मोबाइल जैमर लगाने और विधायकों व मंत्रियों के फोन टैपिंग के मामले को लेकर खबरें टीवी पर चली थी और अखबारों में प्रकाशित हुई थी, उसके मामले में को लेकर लोकेंद्र सिंह और आज तक के ब्यूरो चीफ शरत कुमार के खिलाफ आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

यह भी पढ़ें :  कांग्रेस देश कि पार्टी या गांधी नेहरू परिवार कि जागीर?

यह घटना 7 अगस्त की बताई जाती है लेकिन मजेदार बात यह है कि पुलिस के द्वारा दो महीने बाद 6 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया गया है और कार्रवाई स्कूल की गई है। इससे स्पष्ट है कि यह मुकदमा साजिश के तहत राजनीतिक बदले की भावना से किया गया है।

राजनीति के जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसी भी तरह से उकसाना चाहते हैं, ताकि वह ऐसा कदम उठाएं कि पार्टी के और सरकार के खिलाफ बगावत कर दें और इस बार उनको परमानेंट पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।