—सरकार पीजी एडमिशन के लिए 25 से 50 लाख का बॉन्ड भरवाती है, लेकिन गायब हैं डॉक्टर
जयपुर।

राजस्थान सरकार के लिए प्रदेश के 306 डॉक्टर मुसीबत बन गए हैं। सरकार इनको ढूंढ़ रही है, किंतु मिल नहीं रहे हैं। सभी डॉक्टर ऐसे हैं जो सरकार के 25 से 50 लाख रुपये लेकर भागे हुए हैं।

मजेदार बात यह है कि ये सभी डॉक्टर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं, किंतु सरकार के पकड़ में नहीं आ रहे हैं।

अजीब सरकार और बेहद खास किस्म के ये डॉक्टर हैं। पुलिस चाहे तो अपराधी को अफ्रीका, अमेरिका, ब्रिटेन और यहां तक की एंटीगुआ तक से पकड़कर ला रही है, किंतु राज्य के ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे डॉक्टरों को सरकार नहीं पकड़ पा रही है।

यह बिलकुल सच है! राज्य सरकार उन 306 डॉक्टरों को पकड़ने या पहचानने के लिए प्रयास करने का दावा कर रही है, जो बॉन्ड भरने के बाद पीजी में एडमिशन लेकर गायब हो गए हैं।

दरअसल, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल में पीजी करने के लिए डॉक्टरों को 3 से 5 साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देनी होती है। इसके बदले सरकार 25 से 50 लाख रुपये के बॉन्ड भरवाती है।

यदि कोई डॉक्टर बीच में ही सेवा छोड़ता है, तो उससे यह रुपया वसूला जाता है, किंतु अजीबो—गरीब स्थिति देखिये की राज्य के 306 डॉक्टर पीजी में पढ़ भी रहे हैं और गांवों में अपनी सेवाएं भी नहीं दे रहे। न ही ये डॉक्टर बॉन्ड के अनुसार 25 से 50 लाख रुपये दे रहे हैं।

एक और बात है जो सरकार चाहे तो कर सकती है, वह यह कि इस तरह के डॉक्टरों के पंजीकरण रद्द किये जा सकते हैं। किंतु उसमें भी सरकार को ड़र लग रहा है। इसीलिए पंजीकरण निरस्त करने के लिए भी तैयार नहीं है।

उधर, मध्य प्रदेश में कोई भी डॉक्टर इसका पालन नहीं करता है, तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है। ऐसे में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।