Jaipur

देश की संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के सबसे पावरफुल मंत्री गृह मंत्री अमित शाह जहां जम्मू कश्मीर से धारा 370 के अनुच्छेद 35a को निष्प्रभावी करने के लिए बिल पेश कर रहे थे।

वहीं राजस्थान के विधानसभा में राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने बड़ा खेल कर दिया।

अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान विधानसभा में सोमवार को तीन बिल पास करवा लिए, उनमें से एक मोब लिंचिंग का, दूसरा ऑनर किलिंग और तीसरा बिल खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत मंत्रियों विधायकों और अधिकारियों की वेतन भत्ते बढ़ाने का काम भी कर लिया।

एक तरफ जहां राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनी है, तब से लाखों वृद्धों और निशक्त जनों को पेंशन नहीं मिल रही है, तो दूसरी तरफ बेरोजगारी भत्ते का वादा करके सत्ता में आई सरकार अब तक एक भी बेरोजगार को बेरोजगारी भत्ता नहीं दे पाई है।

साल 2017 में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अधिकारियों के बढ़ाए गए वेतन भत्तों के महज दो साल बाद ही एक बार फिर से दोगुने से लेकर 3 गुने तक वेतन भत्ते बढ़ा लिए।

सरकार के द्वारा बढ़ाए गए वेतन और सत्कार भत्ते की बात की जाए तो मुख्यमंत्री को पहले जहां 55 हजार रुपए मिलते थे, अब वह बढ़कर 75 हजार रुपए हो गए हैं।

इसी तरह से मुख्यमंत्री के लिए सत्कार भत्ता भी अब ₹55000 से बढ़कर 85 हजार रुपए हो गया है।

इसी तरह से उप मुख्यमंत्री को अब तक वेतन के रूप में ₹10500 मिलते थे, वह अब बढ़कर सीधे 65 हजार रुपए हो गए हैं।

इसी तरह से उपमुख्यमंत्री को मिलने वाला सत्कार भत्ता पहले जहां मात्र ₹6000 था, वह अब बढ़कर सीधा 80 हजार रुपए हो गया है।

मंत्रियों की बात की जाए तो कैबिनेट मंत्री को अब तक वेतन के तौर पर ₹45000 मिलते थे, वह अब ₹65000 हो गए हैं।

इसी तरह से सत्कार भत्ते के रूप में मंत्री को मिलने वाले ₹50000 से बढ़कर ₹80000 हो गए हैं।

राज्य मंत्रियों की बात की जाए तो वेतन ₹45000 मिलता था, वह ₹62000 हो गया है और सत्कार भत्ता ₹50000 मिल रहा था वह ₹80000 हो गया है।

उपमंत्रियों की बात करें तो वेतन के रूप में 40000 मिलता था, जो अब ₹60000 हो गया है। इसी तरह से सत्कार भत्ता भी ₹40000 से ₹60000 मिलेगा।

विधानसभा के अधिकारियों की बात की जाए तो विधानसभा अध्यक्ष को पहले 50000 पर मिलते थे, वह वेतन के रूप में अब ₹70000 मिला करेंगे।

सत्कार बता भी विधानसभा अध्यक्ष को ₹50000 से बढ़ाकर ₹80000 कर दिया गया है।

उपाध्यक्ष को ₹45000 से ₹65000 मिलेंगे। वहीं सत्कार भत्ते के रूप में उपाध्यक्ष को ₹50000 से बढ़ा कर 80 हज़ार रुपये दिया गया है।

नेता प्रतिपक्ष तनख्वाह के रूप में ₹45000 मिलते थे, वह ₹65000 हो गए हैं और सत्कार भत्ते के रूप में जो ₹50000 महीना मिलते थे, वह बढ़कर ₹80000 महीना हो गया है।

इसी तरह से मुख्य सचेतक को तनख्वाह ₹45000 से बढ़ाकर ₹65000 महीना कर दी गई है।

सत्कार भत्ते के रूप में ₹50000 मिलते थे, वह बढ़कर अब 80000 महीने हो गए हैं।

उप मुख्य सचेतक को तनख्वाह ₹42000 मिलती थी, वह वेतन बढ़कर अब ₹10000 प्रतिमाह कर दिया गया है।

सत्कार भत्ता भी उप मुख्य सचेतक को 50000 महीने से बढ़ाकर ₹70000 प्रतिमाह कर दिया गया है।

विधायकों की बात की जाए तो प्रत्येक विधायक को अब ₹25000 के बजाय ₹40000 महीना वेतन मिलेगा।

साथ ही सत्कार भत्ता ₹50000 से बढ़ाकर ₹70000 कर दिया गया है।

यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2019 से लागू होगी, इससे पहले 1 अप्रैल 2017 को भी बढ़ोतरी की गई थी।

इस तरह से देखा जाए तो मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रियों, नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचेतक को ₹50000 और उप मुख्यमंत्री को ₹128000 व एमएलए को हर माह ₹45000 ज्यादा मिलेंगे।

इस वेतन बढ़ोतरी से राज्य सरकार के कोष पर 31.45 करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक भार पड़ेगा।