नागौर/जयपुर।

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को कोई भी ऐसी भूल बहुत भारी पड़ सकती है, जिसमें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल को हल्का आंका गया हो।

57 विधानसभा सीटों पर टिकट बांटकर पहली बार पार्टी के दम से मैदान में उतरे बेनीवाल को कांग्रेस पार्टी अपने से दूर ही मानती है। इधर, भाजपा बेनीवाल को लेकर सरकार बनाने पर भी विचार कर चुकी है।

तमाम टीवी चैनलों के द्वारा किए गए एग्जिट पोल में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिलते हुए दिखाया जा रहा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इसके बावजूद पूरे दावे के साथ कहा है कि वह पूर्ण बहुमत के साथ एक बार फिर से सत्ता में रिपीट हो रही है।

इधर, ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक 57 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हनुमान बेनीवाल के लड़ाके कम से कम एक दर्जन सीटें जीतकर विधानसभा में धमाकेदार एंट्री कर सकते हैं।

राजस्थान विधानसभा का मिजाज ऐसा रहा है कि जब भी प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा 20 से अधिक विधायक चुनकर जाते हैं, तो दोनों ही पार्टियों को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है।

इस तरह का ट्रेंड 1993 और 2008 में 2 बार दोहराया जा चुका है। उससे पहले भी 70 के दशक में यह कारनामा हुआ था, लेकिन तब भारतीय जनता पार्टी अस्तित्व में नहीं थी।

प्रदेश के कोने-कोने से जिस तरह की रिपोर्ट से सामने आ रही है, उससे कहा जा सकता है कि राजस्थान में एक बार फिर से दोनों ही पार्टियां पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता प्राप्त नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में थर्ड फ्रंट की भूमिका बहुत बड़ी रहेगी।

अगर प्रदेश में इस बार भी हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी समेत निर्दलीय विधायकों को मिलाकर कुल 20 से ऊपर जीतकर पहुंचते हैं तो कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

फिलहाल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ही सबसे बड़ा दल उभरता हुआ नजर आ रहा है। इसलिए सत्ता प्राप्ति के लिए दूसरों की मदद लेनी होगी। दोनों ही पार्टियां बहुमत हासिल नहीं करती है, तो हनुमान बेनीवाल को हल्के में लेने की भूल दोनों पार्टियों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

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