जयपुर।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में 11 दिसंबर को विधानसभा चुनाव की मतगणना होगी। मतगणना में भारतीय जनता पार्टी की साख दांव पर लगी है, वहीं किनारे पर बैठी कांग्रेस पार्टी के लिए उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।

राजस्थान की बात करें तो यहां पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता है, लेकिन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल द्वारा की गई ताबड़तोड़ रैलियां और जबरदस्त जन समर्थन के चलते मुकाबला त्रिकोणीय होता हुआ नजर आ रहा है।

बीते 25 बरस की राजस्थान में एक के बाद ही एक पार्टी की सरकार बनती रही है। प्रदेश में इस दौरान कभी भी भारतीय जनता पार्टी या कांग्रेस को दोबारा बहुमत नहीं मिला है।

1993 में नरेंद्र पार्टी की भैरों सिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने थे। 1998 में कांग्रेस ने परसराम मदेरणा को आगे कर चुनाव लड़ा और मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत।2003 में राजस्थान में नेता बनकर आई भारतीय जनता पार्टी की वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनीं।

2008 में हंग असेंबली थी, लेकिन भोजन समाजवादी पार्टी के 6 विधायकों को साथ लेकर अशोक गहलोत दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। 2013 में प्रचंड बहुमत हासिल कर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनीं।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल भले ही बहुत सीटें नहीं जीत पाएं, लेकिन वह 2013 में किरोड़ीलाल मीणा द्वारा किया काम करने में निश्चित रूप से कामयाब होते दिख रहे हैं।

एक दिन पहले ही भाजपा के उपाध्यक्ष ज्ञानदेव आहूजा ने कहा था कि राज्य में बहुमत नहीं मिलने पर बेनीवाल और अन्य निर्दलीयों को साथ लेकर सरकार बनाने का दावा किया है।

इधर, कांग्रेस पार्टी एक्जिट पोल के आधार पर सरकार बनाने के सपने देख चुकी है। जिसके बाद पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिर फुटव्वल शुरू हो चुकी है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट मुख्यमंत्री की उम्मीदवारी का दावा ठोकने के लिए दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के यहां डेरा डाले हुए हैं। इस बीच रामेश्वर डूडी ने भी अपनी तिकड़म बिठानी शुरू कर दी है।

भाजपा बहुमत नहीं मिलने पर हनुमान बेनीवाल, बसपा, घनश्याम तिवाड़ी समेत अन्य बीजेपी से बागी होकर मजबूती से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को जोड़कर सरकार बनाने का प्रयास युद्ध स्तर पर शुरू कर चुकी है।

सट्टा बाजार जहां कांग्रेस को बहुमत दे रहा है तो एक्जिट पोल ने भी भाजपा की चिंता बढ़ा रखी है। हनुमान बेनीवाल को केवल मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का ही विरोधी माना जाता है, बाकी पार्टी से उनको कोई दिक्कत नहीं बताई जाती है।

ताज़ा अनुमान के मुताबिक बीजेपी को 85 से 95 सीट मिल रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी 90 से 100 सीट जीतने की तरफ बताई जा रही है। हनुमान बेनीवाल और अन्य के खाते में 15 से 25 सीट दिखाई दे रही है।

राजनीति के जानकारों की माने तो राजस्थान में अभी तक जब जब भी निर्दलीय की 25 के करीब सीटें आई हैं, तब तक किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि हनुमान बेनीवाल और अन्य मिलकर कितनी सीटों पर काबिज होने में कामयाब होते हैं।

साफ तौर पर कहा जा सकता है कि राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है। ऐसे में हनुमान बेनीवाल और निर्दलीय विधायक काफी अहम भूमिका में हो सकते हैं।

200 सीटों वाली विधानसभा की 199 सीटों पर चुनाव हुआ है। अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर बहुजन समाजवादी पार्टी के लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया था। इस सीट पर इस माह के अंत तक चुनाव होने की संभावना है।

इस चुनाव परिणाम में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, हनुमान बेनीवाल, घनश्याम तिवाड़ी, सीपी जोशी, रामेश्वर डूडी, गिरिजा व्यास, यूनुस खान समेत करीब दो दर्जन बड़े नेताओं की साख दांव पर लगी हुई है।