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21 जून को पूरी दुनिया भारत के द्वारा दिए गए योग दिवस को मनाने के लिए जी जान से जुटी हुई है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान सरकार और प्रमुख विपक्षी पार्टी के बीच योग दिवस को लेकर राजनीति की लड़ाई शुरू हो चुकी है।

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में है। योग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा अपने पिछले कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र के द्वारा विश्व योग दिवस के तौर पर 21 जून को मनाने के लिए घोषित करवाया गया था।

बीते 5 साल के दौरान राजस्थान में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी ऐसे में योग दिवस मनाने के लिए 21 जून को सरकारी विद्यालयों में अवकाश नहीं होता था।

किंतु अब दिसंबर में हुए चुनाव के बाद राजस्थान में कांग्रेस की सरकार आ गई और 21 जून को योग दिवस को लेकर कांग्रेस की सरकार और विपक्ष में बैठी भाजपा के बीच राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई।

कांग्रेस की सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि योग दिवस नहीं मनाया जाएगा।

बाद में विपक्ष के द्वारा दबाव बनाने के कारण डोटासरा ने यू टर्न लिया और कहा कि योग दिवस मनाया जाएगा, लेकिन किसी भी छात्र अध्यापक को स्कूल आने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही डोटासरा ने यह भी कहा कि योग दिवस के अवसर पर यदि कोई बच्चा अपने नाना, नानी, मामा, मामी, बुआ, काका, काकी के घर गया हुआ है तो उसको एक दिन के लिए वापस बुलाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, बल्कि वहीं पर पास में सरकारी स्कूल में जाकर वह योग दिवस में हिस्सा ले सकता है।

यू टर्न लेने के साथ ही गोविंद सिंह डोटासरा ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी यह नहीं कहा कि योग दिवस नहीं मनाया जाएगा।

इधर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने हमला करते हुए कहा कि राजस्थान की सरकार ने दबाव में आकर राष्ट्रवाद और देश की भावनाओं को समझते हुए यू टर्न लिया है।

उन्होंने गोविंद सिंह डोटासरा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के बजाय फालतू की बातों के विवाद पैदा कर के अखबारों में, मीडिया में सुर्खियां बने रहना चाहते हैं।

इधर राजस्थान सरकार ने शिक्षा विभाग की तरफ से अपने सभी शिक्षकों को योग दिवस के अवसर पर 21 जून को स्कूलों में उपस्थित रहने को कहा है।

पूरी दुनिया जहां 21 जून को योग दिवस मना रही है वहीं राजस्थान में कांग्रेसी सरकार और विपक्ष में बैठी भाजपा के बीच इस तरह की बयानबाजी और विवाद बेवजह का होने के कारण लोग इसको चौथी राजनीति करार दे रहे हैं।