हर बच्चे से खेल शुल्क लेते हैं, लेकिन एंट्री फीस से इनकार

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-राज्य स्तरीय खेलों में एंट्री फीस चुकाने से कई निजी विद्यालयों ने मना कर दिया।
जयपुर।
अधिकांश प्राइवेट स्कूल फीस के नाम पर हर साल लाखों रुपए की उगाही करते हैं। जिसमें खेल शुल्क भी लिया जाता है। यदि किसी बच्चें की फीस दो दिन भी लेट हो जाए तो छात्रों को वापस घर भेज दिए जाने के प्रकरण सामने आते रहते हैं।
क बार बच्चों को परीक्षाओं से वंचित कर दिया जाता है। एक-एक बच्चें की सालाना एक से डेढ लाख रुपए की मोटी फीस लेने वाले विद्यालयों के कारनामें खूब सुर्खिया बटोरते हैं, जिनकी गूंज परिजनों द्वारा प्रदर्शन करने के बाद सुनाई देती है।
फीस के नाम पर लाखों रुपए शुल्क लेने वाले इन विद्यालयों को कहीं पर दो पैसे देने की बारी आती है तो एक झटके में इनके पसीने छूट जाते हैं, चाहे फिर छात्र के भविष्य से जुड़ा मामला ही क्यों न हो।
ताजा प्रकरण खेल गतिविधियों से जुड़ा है। जिला स्तर पर अपने दम पर खेलकर विजेता खिलाड़ी स्टेट लेवल पर खेलने के लिए जाने को तैयार हैं, लेकिन स्कूलों द्वारा एंट्री फीस देने से इनकार करने के कारण ये होनहार प्लेयर वंचित होने की कगार पर है।
स्पोर्ट्स फीस लेने के बाद भी बड़े और नामी स्कूलों ने खिलाड़ियों की एंट्री फीस देने से इनकार कर दिया है। जिसके कारण खिलाड़ी चिंतित तो हैं ही, साथ ही खेलों में आगे बढ़ने से भी महरुम रहने की कगार पर हैं।
य स्कूल नहीं चुका रहे फीस
जयपुर के मशहूर दिल्ली पब्लिक स्कूल ने बच्चों की एंट्री फीस देने से इनका कर दिया। डीपीएस के 35 खिलाड़ी विभिन्न खेलों में राज्य स्तर पर सलेक्ट हुए हैं। इसी तरह से विद्याश्रम, जो कि इसी सत्र में मोटी फीस वृद्धि को लेकर खासा विवादों में रहा है, उसने भी एंट्री फीस देने से मना कर दिया है।
सांगाने का आर.सी. डूक्या इंटरनेशन स्कूल ने तो हद ही पार कर दी। पहले तो बच्चों को खेल में भेजा ही नहीं, जब बच्चे अपने दम पर जिला स्तर पर 3-3 गोल्ड और 3-3 रजत पदक जीतने में कामयाब हो गए, तो उन खिलाड़ियों की एंट्री फीस देने से इनकार कर दिया। मजेदार बात यह है कि इन स्कूलों के द्वारा हर साल स्पोटर्स के नाम पर फीस की उगाही की जाती है।
इनका कहना है-
सभी स्कूलें टीचिंग फीस के साथ स्पोर्ट्स फीस ले रही हैं। अब इनको स्पोटर्स फीस देनी चाहिए। यदि कोई नहीं देती है तो शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
सुरेश जैन, कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी, सैकेंडरी एजुकेशन