क्या गुल खिलाएगी कांग्रेस की यह बगावत?

जयपुर।
राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के गठन के बाद से पार्टी में कमोबेश शुरू हुई बगावत अब खुलकर सतह पर आ गई है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच वर्चस्व की जंग अब तक जो केवल कार्यकर्ताओं के बीच हो रही थी, वह सीधे मंत्रियों और विधायकों के द्वारा फूटकर निकलने लगी है।

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सबसे पहले इस्तीफा देने वाले कृषिमंत्री लालचंद कटारिया अब शांत हैं, लेकिन उनके बाद मंत्री रमेश मीणा और आंजना उदयलाल ने समीक्षा के बाद फैसला करने की बात कहकर तूल दिया।

बाद में दोनों मंत्रियों ने कहा कि समीक्षा होनी चाहिए और समीक्षा के बाद सबकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। हालांकि, पहले दिनों दोनों नेतााओं के निशाने पर अशोक गहलोत ही थी।

इसके बाद टोंक में देवली उनियारा विधायक हरीश मीना ने कानून व्यवस्था के नाम पर अशोक गहलोत सरकार पर सीधा हमला बोला, हालांकि राज्य में गृह विभाग का जिम्मा गहलोत के पास ही है।

वह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि टोडाभीम के विधायक पृथ्वीराज मीणा ने भी गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने हार के लिए सीधे तौर गहलोत को ही जिम्मेदार ठहराया।

प्रदेश प्रभारी अविनाश पांड़े ने उनको कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, लेकिन पीआर मीणा ने साफ कह दिया कि उन्होंने हमेशा पार्टी के पक्ष में ही काम किया है और कुछ भी गलत नहीं कहा।

मीणा ने तो यहां तक कह दिया कि गहलोत का समय अब जा चुका है, इसलिए मुख्यमंत्री सचिन पायलट को बनाया जाना चाहिए।

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इससे पहले कोटा के एक कांग्रेसी विधायक रामनारायण मीणा ने कहा था कि अगर कांग्रेस सरकार में मंत्री और विधायक ऐसे ही लड़ते रहे तो जुलाई के माह में पीएम नरेंद्र मोदी धारा 356 के तहत सरकार को बर्खास्त कर देंगे।

वैसे इस्तीफे की पटकथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ही लिखी थी। उन्होंने हार की जिम्मेदारी लेते हुए सबसे पहले इस्तीफा दिया था। हालांकि, सीडब्ल्यूसी की मीटिंग ने उसको अस्वीकार कर दिया।

लेकिन राहुल गांधी ने पार्टी को एक माह का समय दिया है और कहा है कि पार्टी अध्यक्ष ओबीसी या दलित समुदाय से बनाया जाए। उन्होंने प्रियंका वाड्रा को अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध भी किया है।

राज्य में जारी इस पार्टी युद्ध के चलते सरकार के अस्थिर होने की संभावना प्रबल है, जबकि दो गुटों में बंटी कांग्रेस की तमाम गतिविधियों पर भाजपा की नजर है।

तेलंगाना में 6 माह के भीतर ही कांग्रेस के 18 में से 12 विधायक कल टीआरएस में शामिल हो गए हैं। इसी तरह से महाराष्ट्र में भी कांग्रेस में बगावत जारी है। मध्य प्रदेश से भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं।