हिंदुओं की तरफ किसी ने हाथ उठाया तो उसके हाथ काट ले जाएंगे: राज ठाकरे

मुंबई।

महाराष्ट्र के कद्दावर राजनेता जिन्होंने जीवन में कभी भी चुनाव नहीं लड़ा उसके बावजूद मुंबई समेत आधे से ज्यादा महाराष्ट्र में अपने नाम का डंका बजाया।

उनका बेटा उद्धव ठाकरे आजकल उनके सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन पार्टी कांग्रेस और राज्य में बड़े दुश्मन कहे जाने वाले राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के साथ राजनीतिक अठखेलियां कर रहे हैं।

भले ही कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने में सफल हो गए हो, किंतु जिस शिवसेना के नींव हिंदुत्व के नाम पर पड़ी थी, उस शिवसेना को अब अपने समर्थकों से हाथ धोना पड़ रहा है।

जबसे उद्धव ठाकरे ने शिवसेना को कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ जोड़ कर सत्ता हासिल की है, तब से महाराष्ट्र के हिंदू वोटर्स में उद्धव ठाकरे के प्रति सम्मान कम हो गया है। यही कारण है कि अब शिवसेना के वोटर्स और सपोर्टर दूसरी तरफ जाने लगे हैं।

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राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, शिवसेना के उदय ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे।

शिवसेना से जैसे ही महाराज के हिंदू वोटर दूर होने लगे वैसे ही उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई और शिवसेना के पूर्व राजनीतिज्ञ राज ठाकरे ने मौके का फायदा उठाया और हिंदुत्व के नाम पर एक बार फिर से शिवसेना के वोटर्स को अपने पाले में लेने में कामयाब हो गए।

बीते 1 महीने के दौरान राज ठाकरे ने खुद की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बैनर तले नीचे दो बड़ी रैलियां करके उद्धव ठाकरे की जड़ें हिला कर रखती है।

बताया जा रहा है कि शिवसेना की नरम हिंदुत्व की नीति के कारण महाराष्ट्र का हिंदू वोटर अब तेजी से राज ठाकरे के रूप में नया हिंदू नेता ढूंढने का प्रयास कर रहा है। इसका फायदा उठाते हुए राज ठाकरे ने अपने बेटे को भी राजनीति में लॉन्च कर दिया है।

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जब भी किसी राजनीतिक दल के द्वारा या किसी राजनेता के द्वारा महाराष्ट्र में या केंद्रीय लेवल पर हिंदुओं के खिलाफ बयान दिया जाता है तो उसके बयान पर पलटवार करते हुए राज ठाकरे जवाब देते हैं।

एक दिन पहले ही मुंबई में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पूर्व विधायक वारिस पठान के द्वारा 15 करोड़ मुसलमानों के द्वारा 100 करोड़ हिंदुओं को मात दिए जाने के बयान पर पलटवार करते हुए राज ठाकरे ने कहा है कि अगर हिंदुओं की तरफ किसी का हाथ उठा तो हिंदू भी हाथ काटने को तैयार बैठे हैं।

दूसरी तरफ ठाकरे के द्वारा बार-बार अपने समर्थकों और वोटर्स को लुभाने के लिए वीर सावरकर के बहाने और अन्य बहाने से कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी पर हल्की हमले किए जाते रहते हैं, किंतु इससे सरकार में बैठे दोनों दलों के नेताओं के पेट में दिक्कत होने के कारण सरकार को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि शिव सेना के संस्थापक और महाराष्ट्र के पूर्व कद्दावर नेता बालासाहेब ठाकरे ने जब उद्धव ठाकरे को पार्टी का प्रमुख बनाया था। तभी शिवसेना समर्थकों ने राज ठाकरे को ही पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी, किंतु पुत्र मोह के चलते बालासाहेब ठाकरे ने अपने भतीजे राज ठाकरे को दरकिनार कर उद्धव ठाकरे को पार्टी प्रमुख बनाया था।

बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया था और इसी पार्टी के बैनर तले उन्होंने पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव के बाद मुंबई के निगम चुनाव भी लड़े, लेकिन जीत हासिल नहीं हो सकी। उसके बाद उन्होंने काफी समय तक संयम बरता।

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अबे जबकि शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टूट चुका है और शिवसेना कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार चला रहे हैं। ऐसे वक्त में भाजपा के साथ जुड़ने के लिए और शिवसेना की वोटर को अपने पाले में लेने के लिए राज ठाकरे ने युद्ध स्तर पर मुहिम शुरू कर दी हैज़ जिसका फायदा भी उनको मिल रहा है।