मोहन भागवत आखिर क्यों कह रहे हैं कि देशभक्ति की बात करो, राष्ट्रवाद की नहीं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने खुद के संगठन के सेवकों को सलाह दिए की नेशनल यानी राष्ट्रवाद शब्द का इस्तेमाल ना करें, नेशनलिटी यानी राष्ट्रीयता या नेशन राष्ट्र जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र तब तो ठीक है, किंतु नेशनललिज़्म शब्द फासीवाद का संकेत है, वैसा ही जैसा एडोल्फ हिटलर ने प्रचारित किया था। यह बात भागवत ने रांची में 15 दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कही।

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण तथा प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण पर चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रवाद शब्द भाजपा नेताओं के अभियान का केंद्र बिंदु बन गया है, लेकिन भागवत को इस नीति में समस्या दिखाई देती है भागवत ने कहा मुझे ब्रिटेन में एक कार्यकर्ता ने राष्ट्रवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है, क्योंकि इसे हिटलर की विचारधारा से प्रेरित माना गया है।

भागवत ने कहा कि हमारा लक्ष्य देश भक्ति और हिंदुत्व की भावना को बढ़ावा देना है। हिंदू धर्म वसुदेव कुटुंबकम के सिद्धांत पर विश्वास रखता है, भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं।

इस बात को समझाने के लिए मोहन भागवत ने एक घटना का उल्लेख किया, जब एक मुस्लिम बुद्धिजीवी, जो हज यात्रा पर गया था, को सऊदी अरब में गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि उसने गले में लॉकेट में रखा था। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों से ही उसे रिहाई मिल सकी थी।

मोहन भागवत की टिप्पणियां हाल ही में संपन्न ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद भाजपा की चुनाव रणनीति पर पुनर्विचार के क्रम में है। भाजपा के मुखपत्र “द ऑर्गेनाइजर” ने हाल ही में प्रकाशित संपादकीय में पिछले 15 वर्षों में से पार्टी द्वारा एक चुनावी रणनीति का पालन किए जाने की आलोचना की है। शहर की जनसंखिकी बदल गई है, परंतु भाजपा की चुनावी रणनीति पूर्ववत है।

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द ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने अपने लेख में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से प्रत्येक राज्य के विधानसभा चुनाव जीतने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी 1998 से दिल्ली में सत्ता से बाहर है। हालांकि पार्टी ने सुषमा स्वराज, साहिब सिंह वर्मा और मदन लाल खुराना जैसे वरिष्ठ नेताओं के मुख्यमंत्रीत्व में इस राज्य में शासन किया है।

मोहन भागवत के इस बयान को राजनीतिक हलकों में बीजेपी को नई सलाह देने के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि हाल ही में भाजपा के राष्ट्रवाद के मामले को जनता ने पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है।