कुंठित हैं कांग्रेस के नेता, क्योंकि कामकाज के बारे में अपनी समस्या किसी से शेयर नहीं कर पा रहे हैं

– अहमद पटेल 2 सप्ताह से बीमार हैं, सोनिया गांधी ने स्वास्थ्य के कारण नेताओं से मिलना बहुत कम कर दिया है, अतः कुंठा बढ़ती जा रही है

भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दल में चल रही आंतरिक लड़ाई के मद्देनजर 10 जनपद एक उदासीन चुप्पी साधे हुए हैं। पार्टी में सदन पर नेताओं के क्रोध का मुख्य तार नेतृत्व के मुद्दे पर केंद्रित है।

कांग्रेसी नेता अधीर होते जा रहे हैं कि किस तरह कांग्रेस पार्टी के लिए नया नेता चुनने को लेकर निष्क्रियता बनी हुई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक समाचार पत्र की खबर को ट्वीट किया। इसमें नए अध्यक्ष को तलाशने के वरिष्ठ नेताओं की असफलता पर कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित को उद्वत किया गया।

उन्होंने लिखा कि जो उन्होंने खुलकर लिखा उसे देश भर में दर्जनों पार्टी नेताओं द्वारा दबी जुबान में कहा जा रहा है। शशि थरूर ने लिखा संदीप दीक्षित ने जो खुलकर कहा वह पार्टी में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों सहित दर्जनों पार्टी नेताओं द्वारा निजी तौर पर कहा जा रहा है, मैं मतदाताओं को प्रेरित करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी के नेतृत्व का चुनाव कराने की अपील को दोहराता हूं।

कांग्रेस ने इसे सहजता से नहीं लिया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा यदि संदीप इसे ट्वीट पर डाल रहे हैं, यदि इसका एक अंश भी वे अपने काम में लगाएं, वे दिल्ली का रुप बदल बदल देंगे। ज्ञान देने के बजाय ठोस काम करने में ध्यान दें।

शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहने के साथ 2013 तक लगातार तीन कार्यकाल तक दिल्ली पर राज करने वाली कांग्रेस इस माह के शुरू में हुई है 70 सदस्यों वाली विधानसभा के चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई। राजधानी में पार्टी की बर्बादी की हद इस कदर चक्करा देने वाली कि इसके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।

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इसका अर्थ है कि उनमें से कुछ भी नहीं मिला। कांग्रेसी नेताओं के एक वर्ग ने भाजपा को हराने के लिए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को खुले आम बधाई दी। नेताओं की इस पार्टी की प्रशंसा करने के लिए इन नेताओं की आलोचना की, जो कांग्रेस को कीमत पर और जिसने उसका स्थान लिया।

एक पार्टी नेता ने तो शीला दीक्षित पर उंगलियां उठा दी। जिनका गत वर्ष निधन हो चुका है। शीला दीक्षित के पुत्र तथा दिल्ली के कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने एक साक्षात्कार में कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती है कि कम से कम छह से आठ पार्टी करने में सक्षम है, किंतु कभी-कभी निष्क्रियता चाहते हैं, क्योंकि आप किसी काम को नहीं होने देना चाहते हैं।

बिना हिचक के दीक्षित ने कहा ‘वर्तमान स्थिति है कि मैडम गांधी (सोनिया गांधी) एक आंतरिक अध्यक्ष हैं, मिस्टर गांधी (राहुल गांधी) अध्यक्ष बनना नहीं चाहते तो हमें उनके रूप का सम्मान करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने अखबार से कहा कि अपनी उंगली किसी एक नेता पर रख देना बहुत आसान है, लेकिन बाकी 30, 40, 50 नेता क्या कर रहे हैं, वे लेख लिखते हैं, किताबें लिखते हैं, वह सम्मेलनों में बैठकों में गुनगुनाते हैं, खुसर पुसर करते हैं। क्या आप में से एक साथ आने और कुछ करने का साहस नहीं है?

एक अन्य कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कांग्रेस के लिए दिल्ली के परिणामों की तुलना कोरोनावायरस से की थी और कहा था कि 6 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद भी पार्टी कुछ लोग अभी भी मंत्रियों जैसा व्यवहार कर रहे हैं।ज्योतिरादित्य सिंधिया और मनीष तिवारी जैसे अन्य लोगों ने इंगित किया कि पार्टी को पुनः अपनी खोज करनी होगी।

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सोनिया गांधी के मुख्य संकटमोचक अहमद पटेल से अधिक समय से अस्वस्थ हैं और जहां नेता उनसे मिलते हैं और अपनी व्यथा बताते हैं। अब ऐसा नहीं हो रहा है।

सोनिया गांधी की सेहत खराब है और उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ मिलना जुलना और बातचीत करना बंद कर दिया है। ऐसी दशा में कांग्रेस नेता के कामकाज अपने आक्रोश के साथ सारे रूप से बोल रहे हैं।