नीतीश कुमार और रामविलास पासवान ने भाजपा की हालिया सोच के खिलाफ झंडा ऊंचा किया

नई दिल्ली।

– दोनों नेताओं का कहना है कि बिहार में चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ना चाहिए तथा नागरिकता संशोधन कानून, ट्रिपल तलाक, धारा 370 आदि को राष्ट्रीय चुनाव में उठाना ही ज्यादा उचित है।

इसी साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले राज्य के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में राजनीतिक समीकरणों पर पुनर्विचार करने के लिए राजनीतिक मंथन शुरू हो गया है।

जहां एनडीए के घटक दल जनता दल यूनाइटेड तथा लोक जनशक्ति पार्टी, भारतीय जनता पार्टी के समक्ष कठिन शर्ते रख रहे हैं, वहीं आरजेडी के नेतृत्व वाला महागठबंधन याद धर्मनिरपेक्ष खेमा विविध प्रकार की जोड़-तोड़ तथा विस्फोटों पर लगातार नजर जमाए हुए है।

जनता दल यूनाइटेड के नेता तथा राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा लोजपा के नेता रामविलास पासवान ने अभी हाल ही में अनुच्छेद 370, नागरिकता संशोधन कानून तथा अयोध्या राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय एवं विवादास्पद मुद्दे उठाने की भाजपा की रणनीति को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है, तथा कहा है कि बिहार के आगामी चुनाव विकास तथा स्थानीय मुद्दों के आधार पर लड़े जाने चाहिए।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के पुत्र के विवाह में शामिल होने दिल्ली आए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि शासन प्रशासन के मुद्दे ही आगामी चुनावों के लिए उनकी पार्टी के प्रचार के आधार तथा घोषणा पत्र का प्रमुख हिस्सा होंगे।

नीतीश कुमार ने कहा कि जल, जीवन और हरियाली मेरी सरकार की प्राथमिकताएं रहे हैं। राज्य में 10.5% ग्रोथ हासिल की है, यही मुद्दे हैं और राज्य के चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और राष्ट्रीय चुनाव कि नहीं।

यह भी पढ़ें :  क्या वसुंधरा राजे इतनी कमजोर हो गई हैं?

लगभग इसी स्वर में बोलते हुए लोजपा के नेता रामविलास पासवान ने कहा है कि भाजपा नेताओं द्वारा एक के बाद एक चुनाव में तीन तलाक, अनुच्छेद 370 या फिर अयोध्या जैसे मुद्दे उठाने की कोई तुक नहीं थी। पासवान ने कहा कि चुनाव प्रचार का पूरा फोकस राज्य में गठबंधन सरकार की उपलब्धियों पर होना चाहिए।

दिल्ली विधानसभा चुनाव से लगे आघात के बाद भाजपा नेतृत्व स्वयं भी राज्य विधानसभा चुनाव में उग्र राष्ट्रवाद की बहस को धार देने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करता प्रतीत हो रहा है।

बताया जाता है कि भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी सांसद गिरिराज सिंह को अभी हाल ही उनके उस विवादित बयान के लिए फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने “देवबंद के मदरसे को आतंकवाद की गंगोत्री” बताया था।

इसी बीच महागठबंधन वाले खेमे में भी संकट पैदा होता दिखाई दे रहा है। गठबंधन के घटक, जिनमें आरएलएसपी के उपेंद्र कुशवाहा तथा ऐसेएमके जीतन राम मांझी शामिल हैं, यह मांग कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव वरिष्ठ नेता शरद यादव के नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए।

कुशवाहा तथा मांझी ने अभी हाल ही में पटना में यादव के साथ एक गोपनीय मीटिंग की। इस मीटिंग में महागठबंधन के में बेहतर समझ बूझ पैदा करने के उद्देश्य से एक समन्वय समिति के गठन की संभावना पर चर्चा की हुई है।

आरजेडी के उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ चुके तेजस्वी यादव के प्रति वफादार वर्ग इस बात पर है कि यह चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए। बिहार ने एक पुराने पर्यवेक्षक ने कहा आगामी महीनों में बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में मूलभूत परिवर्तनों की अपेक्षा की जा सकती है क्योंकि चौंका देने वाले विभिन्न घटनाक्रमों के सामने आने की संभावना है।

यह भी पढ़ें :  नवलगढ़ पीड़िता के पक्ष में VHP, बजरंग दल, शिवसेना और RLP की प्रतिभा सिंह उतरीं राजकुमार शर्मा के खिलाफ-