मप्र में ठिठुरन के बीच सियासी तपिश!

मप्र में ठिठुरन के बीच सियासी तपिश!

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भोपाल, 5 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। हवाओं में घुली ठंडक ठिठुरन पैदा कर रही है। इस बीच, नेताओं की बयानबाजी से सियासी तपिश बढ़ गई है। इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने विवादित बयान दिया और भोपाल में कांग्रेस सेवा दल के राष्ट्रीय शिविर में विवादित पुस्तिका बांटी गई।
राज्य की इन दो घटनाओं ने सियासत में उबाल ला दिया है। भाजपा महासचिव विजयवर्गीय ने इंदौर की समस्याओं को लेकर एक बैठक बुलाई थी, लेकिन उस बैठक में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे नाराज विजयवर्गीय ने कहा था, अगर संघ के पदाधिकारी शहर में न होते तो इंदौर में आग लगा देता।

इस बयान पर विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी सहित 350 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

इंदौर में जुटे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय कार्यकर्ताओं के बीच आए विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के. मिश्रा ने भाजपा को भारत जलाओ पार्टी कहकर तंज कसा है।

पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि बेटा बल्लेबाजी करता है और पिता आग लगाने की धमकी देता है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने विजयवर्गीय को कलाकार जी कहते हुए तंज कसा और कहा, हताश और भटके हुए हैं, इसलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।

कांग्रेस ने विजयवर्गीय के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। एक तरफ भोपाल में कांग्रेस पदाधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय में ज्ञापन दिया और कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे राज्य में विध्वंसकारी घटनाएं कराने की साजिश की आशंका जताई। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने एक माचिस की डिब्बी ही बांट डाली है। इस माचिस की डिब्बी पर कैलाश विजयवर्गीय के फोटो छापकर लिखा गया शहर में आग लगाने के काम आती है।

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विजययवर्गीय का समर्थन करने से भाजपा कतरा रही है। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता और खाद्य एवं आपूर्ति निगम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हितेश वाजपेयी उनके समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने कमलनाथ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, राज्य में समय रहते प्रतिकार नहीं किया गया तो कमलनाथ राज्य को पश्चिम बंगाल बनाने में देर नहीं करेंगे। वह ममता बनर्जी द्वारा बताई गई हिंसक राजनीति के मार्ग पर अग्रसर हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने सागर में कहा, विजयवर्गीय ऐसा नहीं कह सकते, वह तो आग बुझाने वालों में गिने जाते हैं, वह तो भाजपा के दमकल हैं।

वहीं, दूसरी ओर भोपाल के कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय शिविर में बांटी गई किताब वीर सावरकर कितने वीर ने अलग विवाद खड़ा कर दिया है। इस किताब में सावरकर और गोडसे को लेकर विवादित बात लिखी गई है।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का कहना है, कांग्रेस के नेता तो सिर्फ एक ही परिवार के प्रति भक्ति भाव रखते हैं, जिसे भारत के इतिहास और महापुरुषों की जानकारी नहीं है। शायद इसीलिए राहुल गांधी जो बयानबाजी कर चुके हैं, उसे कांग्रेस अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर रही है।

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने कांग्रेस को मतिभ्रम होने का आरोप लगाते हुए कहा, कांग्रेस मतिभ्रम के दौर से गुजर रही है। वह समझ नहीं पा रही है कि किसका विरोध करे और किसका समर्थन करे। यही कारण है कि कांग्रेस उन राष्ट्रभक्तों को निशाना बनाने से नहीं चूक रही हैं, जो राष्ट्रभक्त विशेष रूप से बहुसंख्यक आबादी के हितचिंतक रहे हैं।

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राजनीति के जानकारों के अनुसार, राज्य में दोनों सियासी दल अपनी-अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में लगे हुए हैं। तरीका कोई भी हो, जनता के बीच वे चर्चा में रहें, उनकी उपस्थिति नजर आए, इसकी चिंता पार्टी के नेताओं को सताने लगी है। यही कारण है कि बयानों की बहार है।

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटैरिया इन दोनों घटनाक्रमों से राज्य की सियासत में गर्माहट आने की बात को नहीं नकारते। उनका कहा है, वास्तव में यह कार्यकर्ताओं को जगाने की कोशिश है। कांग्रेस सेवादल के शिविर में बटी किताब और इंदौर में विजयवर्गीय का बयान अपने-अपने कार्यकर्ताओं को ताकतवर और लड़ाई लड़ने में सक्षम होने का संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हैं। कांग्रेस जहां बता रही है कि वह भाजपा और संघ की विचारधारा से लड़ने को तैयार है, तो विजयवर्गीय ने यह बताया है कि वह इंदौर से बाहर जरूर है, मगर उनकी इंदौर में अब भी ताकत बनी हुई है।

उन्होंने कहा, सावरकर पर बांटी गई किताब में कही गई बात का कोई पक्षधर नहीं है, तो वहीं विजयवर्गीय के बयान को भी कोई जायज नहीं ठहरा सकता है। मगर राजनीति में हैं, इसलिए कुछ तो करना और कहना है। इसके पीछे वजह भी है। चूंकि आगामी दिनों में राज्य में नगरीय निकाय और पंचायत के चुनाव की आहट सुनाई दे रही है, लिहाजा सभी चाहते हैं कि वे सुर्खियों में रहें और उसी का उपक्रम है यह सब कुछ।

–आईएएनएस

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