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रचना चौधरी@जयपुर।

राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच अधिकारों की लड़ाई का जो दौर करीब पांच साल पहले शुरू हुआ था, वह आज भी बदस्तूर जारी है।

इसकी एक बानगी बुधवार को भी देखने को मिली, जब पत्रकारों के द्वारा सचिन-गहलोत से पीसीसी में गुर्जर आंदोलन का सवाल किया गया।

पत्रकारों के इस सवाल पर एक बारगी तो दोनों ही सकपका गए और माइक थामे गहलोत ने सचिन पायलट की तरफ माइक खिसकाकर जवाब देने को कहा। इस पर सचिन पायलट ने पत्रकार से पूछा कि सवाल सरकार से है या संगठन से?

इसपर पत्रकार ने कहा कि सवाल तो सरकार से है। तो तपाक से पायलट ने माइक फिर गहलोत की तरफ कर दिया, लेकिन हाजिर जवाब गहलोत ने पायलट से कहा कि आप संगठन भी हो और सरकार भी।

इसके बाद पायलट ने कहा कि सरकार कोर्ट में गुर्जर आरक्षण को लेकर मजबूती से पक्ष रखेगी। साथ ही सवाल के मूल जवाब से दूर होते हुए पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जिस तरह से सवर्ण समाज के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का कानून बनाया, ठीक उसी तरह से गुर्जरों के लिए भी 5 प्रतिशत का कानून बना सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है और आंदोलन को उकसाया जा रहा है।

अब आपको बताते हैं कि किस तरह से पायलट और गहलोत के बीच अधिकारों की लड़ाई खुलकर सामने आ चुकी है। करीब पांच साल पहले जब पायलट को अध्यक्ष बनाया गया था, तभी से गहलोत के साथ उनका शीत युद्धशुरू हो गया था।

यह शीतयुद्ध विधानसभा चुनाव से पहले टिकट वितरण के वक्त खुल कर सामने आया, जिसमें एक तरह से गहलोत ने बाजी मारी।

इसके बाद विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस को सत्ता हासिल हुई तो मुख्यमंत्री को लेकर फिर कलह शुरू हुई। इस बार भी गहलोत ने बाजी मारी और तीसरी बार सीएम बनने में कामयाब रहे।

फिर मंत्रीमंडल को लेकर दोनों में खूब तनातनी हुई, बात आलाकमान के यहां से साफ हुई। मंत्रियों को विभागों के बंटवारे में गहलोत ने फिर से पायलट का पटखनी दी। पायलट को कम महत्व के विभाग दिए गए।

अब पायलट केवल उप मुख्यमंत्री हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के परिवारवाद पर हमला करते हुए खुद पायलट ने तुरुप का पत्ता चल दिया। जिस तरह से गहलोत बयानों से संदेश देते हैं वैसे ही पायलट ने किया।

उन्होंने कहा है कि उनके परिवार से कोई भी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगा। पायलट के इस बयान को गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के चुनाव लड़ने में रोडा डाल बताया जा रहा है।

आलाकमान के सामने पायलट खुद को परिवारवाद से दूर केवल संगठन के लिए काम करता हुआ दिखाएंगे। यह देखना अब दिलचस्प होगा कि पायलट के द्वारा फैंके गए इस पासे में गहलोत में फंसते हैं या फिर से बाजी मारते हैं?

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