जयपुर।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने गुरूवार को राजस्थान विधानसभा के विशेष सत्र में संविधान और मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राजस्थान मे एक बड़ी आबादी युवाओं की है, जो राजनीति से ऊपर उठकर संविधान का आदर करना जानती है, जो इस देश में राजनीति के अलावा समाज को बदलने का कार्य कर सकती हैं।

इस प्रदेश के नागरिकों को संविधान के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता हैं। चाहे उसके लिए प्रदर्शनी, पाठ्यक्रम, संवाद, जागृति या कोई अन्य माध्यम उपयोग में लिये जाये। ये सदन, ये मंच और आज का दिन न तो राष्ट्रीय संघ सेवक संघ पर छींटाकशी का था और न ही प्रधानमंत्री मोदी पर छींटाकशी का था।

यह संगठन जिस पर आपने प्रतिबंध लगाया, पर अदालत ने पाक साफ किया। जो भारत की संस्कृति के लिए, एकता के लिए, समरसता के लिए कार्य करता है।
डाॅ. पूनियां ने आपातकाल के समय का जिक्र करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को जब हिन्दुस्तान के लोकतंत्र पर पहरा बैठा दिया गया था और लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ के मुंह पर ताला लगा दिया गया था।

उसका जिक्र क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने कांग्रेस का नाम लिये बगैर कहा कि शाहबानो केस व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रिपल तलाक खत्म कर मुस्लिम समाज की बहनों को न्याय दिलवाया व धारा 370 को खत्म किया गया, यह सब संविधान के अंतर्गत ही किया गया।

सदन में इन सबका जिक्र क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि 55 सालों तक लोकतंत्र ने आपको अधिकार दिया था, आपने क्यों नहीं किया? जबकि ये सारे मुद्दे और मसले जिनका समाधान लोकतंत्र के माध्यम से हो सकता था फिर भी आपने नहीं किया।

आपने तो इस देश को जाति-पंथ के आधार पर बांटने की साजिश की, जिसको राजस्थान एवं हिन्दुस्तान की जनता अच्छी तरह से समझ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जो फिरका परस्ती और भ्रम की बात आप करते आये हैं उन बातों से ना तो इस देश का संविधान बदला जायेगा और ना ही इस देश के आरक्षण के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जायेगी, इस भ्रम को फैलाने की कतई आवश्यकता नहीं हैं।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि प्रधानमंत्री का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने लोकतंत्र की ताकत के जरिये आर्थिक रूप से पिछडे़ सवर्ण वर्ग को आरक्षण दिया। इतने बड़े फैसले पर सदन को प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहियें।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत है कि कोई भी विधायक जनता के मतों के बूते पर सदन में आ सकता हैं, लेकिन संविधान दिवस पर सदन का आदर करना यह सदन हमें सीखाता हैं।

सभा में या तो प्रवेश नहीं किया जाये या प्रवेश किया जाये तो स्पष्ठ बात की जाये। न बोलने से अथवा गलत बोलने से मनुष्य पाप का भागी बन जाता हैं। स्पष्ठता के साथ इसी तरीके की बात की जाये, जिससे की सदन का भी आदर हो।

अंग्रेजों ने कहा कि इंडिया देट इज भारत, मैं कहूँगा भारत देट इज इंडिया जिसकी ताकत संविधान हैं। कांग्रेस का नाम लिये बगैर कहा कि जो आपके द्वारा असत्य बोला गया हैं, उसके लिए एक शब्द बूमरैंग हैं, जो घूम कर वापस आपके पास आयेगी और ऐसी ही चोट करेगी।

लोकतंत्र को स्थापित करने मे सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल एवं तमाम लोगों ने अपनी शहादत दी और लोकतंत्र को सुदृढ करने मे शहादते आज भी जारी हैं।

इसलिए मैं चाहता हूँ इस लोकतंत्र के निर्माण में, आजादी में, सब लोगों को श्रद्धा से याद करना चाहिए। जिनके प्रति सच्ची निष्ठा की शपथ आपने ली, मुझे लगता है कि देश और प्रदेश के कल्याण के लिए उस निष्ठ का पालन करना चाहिए। जय हिन्द जय भारत।