सपना सुहासा@जयपुर।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा है कि लोकसभा के लिए उनके परिवार से कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। सचिन पायलट की मां रमा पायलट का नाम सामने आने के बाद उन्होंने यह बयान दिया है।

लेकिन इसके साथ ही सचिन पायलट के इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि सचिन पायलट ने यह बयान देकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से ढाई महीने पुराना बदला ले लिया।

सचिन पायलट ने अशोक गहलोत से ढाई महीने पुराना बदला ले लिया! 1

वैसे तो सचिन पायलट राजस्थान की सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के डिप्टी हैं, लेकिन संगठन के लिए आ से देखा जाए तो प्रदेश कांग्रेस इकाई के मुखिया होने के नाते सचिन पायलट का बयान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

दरअसल, एक दिन पहले ही राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस प्रदेश चुनाव समिति ने जो पैनल तैयार किया था, उसमें सचिन पायलट की मां रमा पायलट का नाम सामने आया था।

इसपर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मंगलवार को पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट ने मीडिया से कहा था कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा।

इधर, इस सूची में जालौर-सिरोही और टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीटों से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव पायलट का नाम सामने आने के बाद कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है।

आपको याद दिला दें कि करीब ढाई महीने पहले जब राजस्थान में विधानसभा के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी में टिकटों का बंटवारा होने जा रहा था, तब क्या वातावरण था।

बताया जाता है कि तब सचिन पायलट राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ने के मूड में नहीं थे, लेकिन अशोक गहलोत ने अपनी राजनीतिक चतुराई दिखाते हुए आलाकमान के समक्ष खुद और सचिन पायलट, दोनों के विधानसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया।

सचिन पायलट का टोंक विधानसभा से टिकट दिया गया और उनके सामने बीजेपी वसुंधरा सरकार में सार्वजनिक निर्माण मंत्री यूनुस खान को उतारा गया। मुकाबला कांटे का बनता नजर आ रहा था।

ऐसा लग रहा था कि पार्टी के द्वारा पायलट को टोंक से विधानसभा चुनाव के लिए उतारना गलत निर्णय हो गया, लेकिन पार्टी अध्यक्ष पायलट को वहां से प्रचंड जीत हासिल हुई।

अब राजनीतिक विश्लेषक सचिन पायलट के द्वारा दिए गए बयान के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। कोई इसको परिवारवाद पर चोट करार दे रहा है तो कोई गहलोत को पायलट का संदेश बता रहे हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि अशोक गहलोत के द्वारा जिस तरह से पायलट को विधानसभा चुनाव के चक्रव्यूह में फंसाया गया, उसी तरह अभी सचिन पायलट खुद के परिवार को चुनाव से दूर कर पार्टी में वंशवाद की बेल को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

सियासी जानकारों का मानना है कि सचिन पायलट के इस बयान का सीधा सा मतलब यही है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को लोकसभा में चुनाव नहीं लगाया जाए।

यह देखना अब और भी दिलचस्प होगा कि पार्टी अध्यक्ष सचिन पायलट के इस सियासी दांव में राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी अशोक गहलोत फंसते हैं, या फिर कोई नया दांवपेच खेलकर निकलने में कामयाब हो जाते हैं।

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