alwar rape
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-थानागाजी प्रकरण में DGP व सपा पर कारवाई क्यों जरूरी?

अलवर के थानागाजी में 26 अप्रैल को हुए गैंगरेप और वीडियो वायरल करने की घटना ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया।

इसको लेकर रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने जहां अशोक गहलोत और डीजीपी पर हमला बोला है, वहीं पूर्व आईपीएस पंकज चौधरी ने डीजीपी कपिल गर्ग की धज्जियां उड़ा दी है।

अपने सवालों से बौछार करते हुए चौधरी ने डीजीपी को बर्खास्त करने और उनपर कानूनी कार्यवाही करने की भी बात कही है।

इसके साथ ही उन्होंने वो सवाल दागे हैं, जो जनता नहीं जानती है और इसका फायदा पुलिस उठती रही है।

बलात्कार की रिपोर्ट पर ऐसे कौन से सबूत हैं जो अहमियत रखते हैं…

  1. पीडिता के शरीर पर स्थित रासायनिक साक्ष्य, जैसे वेजाइनल स्वेब जिसमे अपराधी का सीमन कोन्टेनट व DNA पहचान होने के सबूत रासायनिक और जैविक परिक्षण से होते हैं और इसके लिये तुरंत मेडिकल होना अनिवार्य होता है ।
  2. पीड़ित के शरीर पर body smear और body traces collect करते हैं, इससे अपराधी के मुंह से निकली लार, थूंक, उसके बाल आदि के परिक्षण से बलात्कारी द्वारा किये गये कृत्य की पुष्टी होती है।
  3. पीड़ित के शरीर पर पहने सभी वस्त्रों से भी उपरोक्त साक्ष्य संकलित होते हैं।
  4. घटना स्थल के तुरंत विज़िट से वहां की साक्ष्य मिलती है।
  5. ठीक यही साक्ष्य अभियुक्त गण के शरीर व कपड़ों से पीड़िता की मिलती है।

अलवर के थानागाजी पुलिस व अलवर के पुलिस अधिक्षक अगर तुरंत कार्यवाही करते तो यह साक्ष्य अक्षुण रूप मे मिलते, पर उन्होंने ऐसा नहीं करके साक्ष्य को नष्ट होने दिया।

इसे क़ानूनी भाषा मे कार्यलोप कहते हैं, यानी जानबूझ कर कोई कार्य नहीं करना।

भारतीय दन्ड संहिता (IPC) की धारा 107 मे अपराध के दुष्प्रेरण की व्याख्या की गई है। जिसमें कहा गया है कि कार्यलोप द्वारा किसी अपराधी को मदद करना या AID करना वैसा ही अपराध होगा, जिस अपराध को सुकर करने के लिए या उसे छिपाने के लिए मदद की गई है।

यानी बलात्कार के आरोपी पर लगने वाली धारा 376, दुष्प्रेरण पुलिस द्वारा सबूत नष्ट होने के सहयोग की धारा 201 IPC लगाई जा सकती है।

अलवर के थानागाजी की घटना के दस दिन बाद उपर बताये गये बिन्दु संख्या एक से 5 तक यह सारे साक्ष्य नष्ट हो चुके हैं।

ज़िला स्तर पर पुलिस के चार स्तम्भ होते हैं

सबसे पहले थाना, फिर सर्किल, यानी डीवाईएसपी, फिर एडिशनल एसपी और एसपी को इसकी जानकारी और कार्यवाही करने का प्रावधान है।
इस घटना में ये चारों स्तम्भ ढह गये
ऐसी घटना की रिपोर्टिंग तत्काल आइजी रेंज, डीजीपी व गृह मंत्रालय को होती है। हमारे प्रदेश में गृह मंत्रालय पर मुख्य मंत्री ने कुन्डली लगा रखी है।

एक और दस दिन के अलवर में जो सबूत नष्ट हुए, उसकी नीचे से उपर तक एक श्रृंखला है।

इस केस के साक्ष्य दस दिन में कुछ नहीं बचती, सब नहा-धो लेते हैं। सब कुछ धुल जाता है और बलात्कार में कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं होकर सह फोरेन्सिक साक्ष्य ही मायने रखती है।

चूंकि इस घटना को चुनावी रंग से बचाने में यह काम उपर से नीचे तक एक राय से हुआ। ऐसे में 376, 107, 201, 166a (C) की क़ानूनी कार्यवाही साक्ष्य नष्ट करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध सरकार करती है तो यह उसके लिये आत्मघाती क़दम होगा।

अत: जनता को काला जादू दिखाया जा रहा है। जादू, यानी झूठ दृष्टि भ्रम पैदा करना और 23 मई के बाद तो सब का ध्यान बांटना ही है। इसलिए सरकार सो रात गई बात गई को चरितार्थ कर रही है।

पंकज चौधरी और उनकी पत्नी, जिन्होंने जोधपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा है ने कहा है कि उनके द्वारा इस मामले में प्रदेश के DGP और SP पर कारवाई हेतु PIL लगाई जा रही है।

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