कविमन से भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां ने सियासी कीटाणुओं को ऐसे ललकार!

-कविमन सतीश पूनियां ने चार लाइनों से चलाए कई तीर…..

जयपुर। भले ही राजस्थान भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई अध्यक्ष सतीश पूनिया कोरोनावायरस पॉजिटिव होने की वजह से होम आइसोलेशन में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हों, लेकिन उनकी सक्रियता लगातार उनके विरोधियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

बीते 48 घंटे के दौरान सतीश पूनिया कोरोनावायरस के रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद वह होम आइसोलेशन से प्रदेश भर के भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ डिजिटली संवाद करने का काम कर रहे हैं, तो साथ ही अपने कार्य और संदेशों के द्वारा विरोधियों के दिलों में खलबली मचाने का काम भी कर रहे हैं।

एक तरफ जहां भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां होम आइसोलेशन में होने के बाद भी पार्टी के पदाधिकारियों से लगातार डिजिटल माध्यम से संपर्क बनाए हुए हैं, वहीं फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम के द्वारा लगातार कार्यकर्ताओं को संबोधित कर संगठन को सक्रिय रखने में भी आगे हैं।

सरकार के मंत्री और विधायक जहां जनता से दूरी बनाए हुए हैं तो पूनियां ने अपने अस्वस्थ शरीर को बोझ नहीं बनाकर दल के मुखिया का दायित्व भी बखूबी निभाकर एक मिसाल पेश कर रहे हैं।

पूनियां की सक्रियता को दूसरे दलों में उनके विरोधी भी सोशल मीडिया के माध्यम से सराह रहे हैं। इतना ही नहीं, अपितु पार्टी में उनके विरोधी खासे सकते में हैं, तो दल में उनके कार्यों को लेकर पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा सराहने का काम किया जा रहा है।

जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हुए कविमन सतीश पूनियां ने मन की भावनाएं व्यक्त की हैं, वो केवल खुद की मानसिक हालात, अपने दृढ़ निश्चय के द्वारा जीतने की ललक, आगे बढ़ते रहने की हिम्मत, किसी भी सूरत में किसी भी विपरीत परिस्थिति में घुटने नहीं टेकने की इच्छा शक्ति दिखाते हुए उनको हराने के लिए जूट कोरोना के कीटाणुओं के साथ ही सियासत में विरोधी रोगाणुओं को भी करारा जवाब देते नजर आ रहे हैं।

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यह हैं पूनियां की लिखी चार पंक्तियां- ज़िंदगी,
ये जंग ही तो है
जो लड़ी है,
कभी हालात से,
कभी अपने आप से,
न वो मानती,न वो जीतती,
न मैं मानता,न मैं हारता,
सोचा बहुत हार लिये,
पहुंच कर किनारे
पर अब न हारेंगे,
अब हर रोज़ लड़ना है
हर रोज़ जीतना है
जब तक हार;हार न जाए
अब जीतेंगे,
हर दम-हर कदम,
ज़िंदगी
आ रहा हूँ मैं…