क्या डॉ. सतीश पूनियां की कार्यकारिणी से नाराज हैं वसुंधरा राजे?

जयपुर।

राजस्थान में एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी में दो टुकड़े होने के कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच संघर्ष थमने के बजाय बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और दो बार की मुख्यमंत्री रह चुके वसुंधरा राजे भी भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से अच्छी खासी नाराज बताई जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि 1 अगस्त को भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां के द्वारा जो कार्यकारिणी की घोषणा की गई थी, उसमें वसुंधरा राजे के किसी भी करीबी व्यक्ति को स्थान नहीं दिए जाने के कारण उन्होंने इस मामले को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाया है, जब उन्होंने 6 और 7 अगस्त को केंद्रीय नेताओं खासतौर से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की, तब उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि वर्तमान अध्यक्ष के द्वारा अपनी कार्यकारिणी में उनके किसी व्यक्ति को स्थान नहीं देकर खासतौर से उन लोगों को लिया गया है जो राजे के विरोधी खेमे से माने जाते हैं।

कार्यकारिणी में जिन लोगों को उपाध्यक्ष बनाया गया है, उनमें अलका गुर्जर, मुकेश दाधीच, अजय पाल सिंह, चंद्रकांता मेघवाल, प्रसन्न मेहता, माधोराम चौधरी और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी के नामों को लेकर वसुंधरा राजे के द्वारा नाराजगी जताई जाने की जानकारी मिल रही है। इसी तरह से जिन 9 जनों को महामंत्री बनाया गया है, उनमें राजसमंद की सांसद और जयपुर राजघराने की सदस्य दीया कुमारी, रामगंज मंडी से विधायक मदन दिलावर, सुशील कटारा और भजनलाल शर्मा में से किसी को भी वसुंधरा राजे के गुट से नहीं माना जा रहा है।

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इसी तरह से मुख्य प्रवक्ता के तौर पर चोमू विधायक रामलाल शर्मा को भी वसुंधरा राजे के विरोधी गुट से बताया जाता है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि वसुंधरा राजे के द्वारा बीते दिनों जब राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उनके खेमे से किसी भी व्यक्ति को वर्तमान नेतृत्व के द्वारा कार्यकारिणी में स्थान नहीं दिया गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि इस कार्यकारिणी के माध्यम से वसुंधरा राजे के सभी लोगों को भाजपा से दूर करने का षड्यंत्र किया गया है। आपको बता दें कि राजसमंद सांसद दिया कुमारी को राजनीति में लाने का श्रेय वसुंधरा राजे को ही दिया जाता है, लेकिन 2016 में, जबकि दीया कुमारी विधायक थीं और जयपुर में उनके परिवार की एक होटल के मुख्य द्वार को जयपुर विकास प्राधिकरण के द्वारा बंद कर दिया गया था और उनकी विरासत की 12 बीघा जमीन को जेडीए के द्वारा ले लिया गया था, तब से दोनों नेताओं के बीच संबंध खटास भरे बताए जा रहे हैं।

इसी तरह से चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी, जोकि खुद आर एस एस बैकग्राउंड से आते हैं और उनको भी वसुंधरा राजे के विरोधी गुट से माना जाता है, को भी प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक और नाम है जिसको लेकर भी वसुंधरा राजे के द्वारा नाराजगी जताई गई है। रामगंज मंडी से विधायक मदन दिलावर, जिनका 2013 में वसुंधरा राजे के द्वारा टिकट काटे जाने की खूब बातें हुई थीं, उनको भी भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनियां के द्वारा अपनी टीम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

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अजय पाल सिंह को वसुंधरा राजे के 2003 से 2008 के कार्यकाल के दौरान बेहद करीबी माना जाता था और उनको आवासन मंडल का अध्यक्ष भी बनाया गया था, लेकिन बाद में कुछ गलतफहमियां होने की वजह से दोनों के बीच विवाद हुआ, वसुंधरा राजे उनको उपाध्यक्ष बनाए जाने से भी खासी नाराज बताई जा रही हैं। माधोराम चौधरी को आरएसएस का बताया जाता है और वो भी डॉ. पूनियां के खास बताए जाते हैं। कहा जा रहा है कि डॉ. पूनियां की इस नई टीम में वसुंधरा राजे के गुट से एक भी व्यक्ति को नहीं लिया गया है।

इसके साथ ही 19 जून को 3 सीटों के राज्यसभा चुनाव के पहले भी सीतापुरा के होटल में भाजपा के प्रशिक्षण शिविर के दौरान भी वसुंधरा राजे के समर्थन में विधायकों के द्वारा स्वागत नहीं किया जाने का मामला भी केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाए जाने की चर्चा चल रही है। सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे की सभी शिकायतों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष सुना गया है और आश्वासन दिया गया है कि इस मामले को लेकर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के साथ वार्तालाप कर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।