नियमित करने का वादा था, 12 साल के संघर्ष के बाद फिर सड़कों पर

-पंचायत सहायकों ने स्थायीकरण की मांग को लेकर के शहीद स्मारक पर किया प्रदर्शन, राज्य की ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायकों ने स्थायीकरण की मांग को लेकर के आज शहीद स्मारक पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्वाइंट सेक्रेट्री ललित गुप्ता को ज्ञापन सौंपा और जल्द समाधान की की मांग।

जयपुर।

साल 2017 में विद्यार्थी मित्रों के समायोजन के लिए तात्कालिक भाजपा सरकार ने 27,000 पंचायत सहायकों के पद बना कर के विद्यार्थी मित्रों को अस्थाई रोजगार देने की कोशिश की थी, उसके बावजूद भी 4500 विद्यार्थी मित्र पंचायत सहायक नहीं बन पाए।
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अब यह हुआ है कि राज्य सरकार ने उनको भी नौकरी से निकाल दिया था, जबकि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में साल 2013 बीजेपी द्वारा किये गए वादे के मुताबिक नियमित करने का वादा किया था।

खास बात यह है कि उन 27000 पदों में से 3500 पदों का मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है, और सरकार ने समय पूरा कर नौकरी से मुक्त भी कर दिया है।
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इसके साथ ही पंचायत सहायकों का जो मानदेय है, वह भी 8 से 10 माह तक का बकाया चल रहा है। आरोप है कि विद्यार्थी मित्र शिक्षा विभाग एवं पंचायत राज विभाग में दो पाटों के बीच चक्की की तरह पिस रहे हैं।

विद्यार्थी मित्र संघ के प्रदेश संयोजक अशोक सिहाग का कहना है कि सरकार ने अभी तक कार्यकाल बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है, जिसको लेकर के पंचायत सहायकों में गहरा रोष व्याप्त है।
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इससे पहले 10 जून से अजमेर जिले के पंचायत सहायकों ने अजमेर से जयपुर तक दांडी मार्च का आयोजन किया था। यह मार्च आज सुबह शहीद स्मारक जयपुर पर समाप्त हुआ।

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विद्यार्थी मित्र पंचायत सहायकों की प्रमुख मांग है नियमितीकरण है, जबकि वेतन बढ़ाने की तरह अन्य मांगे हैं-

1-विद्यालय सहायक भर्ती का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।

2-वंचित विद्यार्थी मित्रों को जल्द से जल्द रोजगार दिया जाए।

3-सभी पंचायत सहायकों का एक विभाग हो।

प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र चौधरी के नेतृत्व में धरना अभी भी जारी है, जबकि प्रशासन ने आगे अनुमति देने से इंकार कर दिया है।