योद्धा कैसे लड़ें कोरोना से? नर्सिंगकर्मी को पीपीई किट मांगने पर टर्मिनेट कर दिया

संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल की यह फोटो बनी विवाद का कारण
संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल की यह फोटो बनी विवाद का कारण

नेशनल दुनिया, जयपुर।
पूरी दूनिया, पूरा देश कोरोनवायरस की वैश्विक महामारी से लड़ रहा है। राजस्थान में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस बीच सरकार दावा कर रही है कि कोरोना से लड़ने वाले वॉरियर्स को तमाम तरह की सुविधाएं मुहईया करवाई जा रही है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों को भी कोरोनावायरस पॉजिटिव मरीजों का उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं।

फिर भी कुछ प्राइवेट अस्पताल ऐसे हैं, जो मरीजों का उपचार करने में आनाकानी कर रहे हैं। कुछ निजी अस्पतालों ने सरकार के दबाव में उपचार करने शुरू भी किया है। कई जगह पर ओपीडी भी शुरू हुई है। और लॉक डाउन—3.0 के दौरान कई जगह छूट भी देनी शुरू की गई है।

इस बीच जयपुर के सबसे प्रसिद्ध और बड़े अस्पतालों में शुमार प्राइेवेट हॉस्पीटल, संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल के द्वारा अपने डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों को पीपीई किट, यानी पर्सनल प्रोटेक्शन इक्युपमेंट उपलब्ध नहीं करवाए जाने का मामला सामने आया है।

अस्पताल में मौजूद हमारे एक सूत्र ने हमे एक ऐसी फोटो भेजी, जिसमें डॉक्टर ने पीपीई किट पहन रखी है, किंतु वहीं पर मौजूद नर्स के पास केवल साधारण ओटी मास्क है। यह फोटो हमारे एडिटर ‘रामगोपाल जाट’ के द्वारा 2 मई दोपहर 11.49 बजे फेसबुक पर दोहरा बर्ताव किए जाने के सवाल के साथ पोस्ट की गई।wp 15886656279871565822854554125738

जिसके बाद कथित तौर पर उस फोटो में मौजूद डॉक्टर, जिन्होंने अपनी पहचान डॉ. जयदीप पटेल के तौर पर जाहिर की है, ने कहा कि इस फोटो में वो मौजूद हैं (इसका दावा आज भी हम नहीं कर रहे हैं कि फोटो में कौन डॉक्टर हैं) और यह उनकी अनुमति के बिना वायरल नहीं की जा सकती है, जबकि फोटो में कहीं पर भी उनकी पहचान उजागर होने या उनका नाम लिखे जाने का जिक्र नहीं किया गया है।

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इतना ही नहीं, बल्कि डॉ. जयदीप पटेल ने दावा किया है कि फोटो में जो पीपीई किट उन्होंने पहन रखी है, वह अपने निजी पैसे से खरीदी थी, न कि अस्पताल के द्वारा दी गई है। बात यहीं खत्म नहीं हुई, अलबत्ता डॉक्टर ने पत्रकार को धमकी दी कि अगर पोस्ट डिलीट नहीं की गई जो वह कानूनी कार्यवाही करेंगे।wp 15886656277462073802840384077038

माना कि किट उन्होंने खुद खरीदकर पहन रखी है, तो सवाल यह उठता है कि, क्या सभी डॉक्टर और नर्सिंगकर्मी अपने ही पैसे से खरीदकर अपनी सुरक्षा करेंगे? क्या अस्पताल की इस वैश्विक महामारी में कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है, क्या अस्पताल की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वो अपने कर्मचारियों को अत्यावश्यक पीपीई किट उपलब्ध करवाए?

तमाम सवालों के बीच अस्पताल में मौजूद हमारे एक सूत्र ने बताया कि इस फोटो को क्लिक करने और उसको वायरल करने का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन ने राहुल यादव नामक एक नर्सिंगकर्मी से इस्तीफा मांग और नहीं दिए जाने पर उनको टर्मिनेट कर दिया है। एक अन्य डॉक्टर सूत्र का कहना है कि अस्पताल ने सभी डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को हिदायत दी है कि वो किट अपने पैसे से खरीदकर पहनें और कोई भी बात अस्पताल से बाहर नहीं जानी चाहिए।wp 15886656278972582760888386857754

सूत्रों का कहना है कि जिस नर्सिंगकर्मी को बर्खास्त करने का दुस्साहस किया गया है, उससे सारी गलती स्वीकार करने का एक पत्र भी लिखवाया गया है। जबकि उसकी कॉपी भी संबंधित कर्मी को नहीं दी गई है, जो कर्मचारी के अधिकारी उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

इस मामले में अस्पताल के नर्सिंगकर्मियों में खास रोष है। आल इंडिया मेडिकल एसोशिएशन के अध्यक्ष भरत बेनीवाल कहना है कि संसाधन देने की सारी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की बनती है और इस तरह की हरकत अस्पताल प्रशासन करता है तो घोर निंदनीय है। उन्होंने कहा कि संबंधित नर्सिंगकर्मी से सारी बात जानने के बाद आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा और अस्पताल प्रशासन को यूं मनमर्जी करने के लिए बख्शा नहीं जाएगा।wp 15886656278051879262111885257930

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अस्पताल की इस मनमर्जी के खिलाफ अब यहां के अन्य डॉक्टर और नर्सिंगकर्मी भी लांबद्व हो रहे हैं। उनका कहना है जो कार्य आज एक कर्मचारी के साथ किया गया है, वही कार्य कभी उनके साथ भी किया जा सकता है। इसलिए यह अन्याय बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

आपको बता दें कि संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल को राज्य सरकार ने 1972 में यह प्राइम लोकेशन की जमीन केवल एक रुपये के टोकन मनी पर आवंटित की थी। आवंटन की शर्तों के अनुसार अस्पताल को अपने कुल मरीजों में से 25 प्रतिशत मरीजों का बिलकुल फ्री उपचार करना होता है, किंतु सूत्रों का कहना है कि इस तरह की किसी भी गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल पर कब्जा कर अवैध निर्माण किये जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। जिसका विवाद काफी दिनों तक चला था और बाद में जेडीए को ही वो निर्माण गिराने पड़े थे।