13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ देशभर के युवाओं में रोष, क्या है 200 पॉइंट और 13 पॉइंट रोस्टर

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-जॉइंट फोरम फॉर अकैडमिक एंड सोशल जस्टिस द्वारा 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ 31 जनवरी के संसद मार्च के आव्हान के समर्थन मेें राजस्थान के विश्वविद्यालयों में भी प्रदर्शन।

जयपुर। 200 पॉइंट रोस्टर की जगह 13 पॉइंट रोस्टर लागू करने के खिलाफ देशभर में आज प्रदर्शन किया जा रहा है। राजस्थान के दो सबसे बड़े विश्वविद्यालयों, राजस्थान विश्वविद्यालय और केंद्रीय विवि में इसको लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया जा रहा है।

राजस्थान विवि में शाम को चार बजे मार्च किया जाएगा, तो दूसरी ओर केंद्रीय विवि किशनगढ़ अजमेर में भी आज शाम को मार्च में हिस्सा लिया जाएगा।

13 पॉइंट विभागवार रोस्टर के पहले पीड़ित विश्वविद्यालय, यानी केंद्रीय विवि किशनगढ़ अजमेर से आज होने वाले मार्च का समर्थन करते हुए मार्च में शामिल होंगे।

छात्रों ने कहा कि आगे की लड़ाई में हर तरह से भागीदारी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इलाहबाद हाईकोर्ट के निर्णय के बाद सबसे पहले 13 पॉइंट रोस्टर के आधार पर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने भर्ती निकाली है, जिसे आनन-फानन में भरने के लिए 1 फरवरी आवेदन की अंतिम तिथि रखी गयी है।

रिजर्व कैटेगिरी के छात्रों का कहना है कि यह गंभीर प्रयास है, जो सामाजिक न्याय पर हमला करने का की एक सोची-समझी योजना के तहत किया गया है।

राजस्थान विवि के शोध छात्र प्रतिनिधि रामसिंह सामोता का कहना कि इसकी गंभीरता को समझते है और राष्ट्रीय स्तर पर इस बात को उठाने हम पीड़ित होते हुए भी अब तक प्रतिरोध की आवाज नहीं उठा पाए थे।

इधर, केंद्रीय विवि के छात्रों का कहना है कि क्योंकि विवि परिसर में छात्र आंदोलनों के बर्बर दमन और शिक्षक आंदोलनों की भ्रूण हत्या के चलते एक भय का माहोल लम्बे समय से बना हुआ है, और किसी भी तरह के प्रतिरोध को बर्बर तरीके से दबा दिया जाता है। लेकिन जिस तरह से सामाजिक न्याय और संवेधानिक मूल्यों पर चोट की जा रही है, उस दौर में अब और चुप रहना असंभव हो गया है।

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200 और 13 पॉइंट रोस्टर क्या है?

रोस्टर पद की स्थिति बताने वाला सूत्र-क्रम है। यह रोस्टर सामान्यत: क्रीम उच्च पदों की स्थिति को बताता है। जैसे किसी विश्वविद्यालय या विभाग में 2 पद वैकेंसी निकाली जाती है। इसमें अनआरक्षित (Genaral), ओबीसी, एससी, एसटी का पद है। यह निर्धारण ‘पॉइंट रोस्टर’ से होता है।

200 पॉइंट रोस्टर 13 पॉइंट रोस्टर की इस तरह संकल्पना की गई है

200 पॉइंट रोस्टर कैसे कांउट किया जाता है–
इसका अर्थ है कि संस्था में ज्ञापित कुल 200 पद तक रोस्टर क्रमवार चलेगा। उसके बाद फिर एक से शुरू होकर 200 पद तक जाएगा। इसमें देय आरक्षण प्रावधान के अनुसार पद तय होते हैं। उदाहरण के तौर पर- अनआरक्षित (Genaral)-49.5%, OBC-27%, SC-15%, ST-7.5 आरक्षण दिया हुआ है। इसी के अनुपात में पद तय होते हैं।

200 पॉइंट रोस्टर में सबसे पहले किसी विश्वविद्यालय को यूनिट माना जाता है। उस विश्वविद्यालय या संस्था के सभी विषयों को A से Z तक अल्फ़ाबेट, सभी पदों को एक साथ 200 तक जोड़ लिया जाता है। उसके बाद इन 200 पदों को रोस्टर के हिसाब से आवंटित किया जाता है।

जैसे पोस्ट कैटेगिरी—

  1. अनआरक्षित (Genaral)
  2. UR
  3. UR
  4. OBC
  5. UR
  6. UR
  7. SC
  8. OBC
  9. UR
  10. UR
  11. UR
  12. OBC
  13. UR
  14. ST
  15. UR
  16. UR
  17. UR
  18. OBC
  19. UR
  20. UR
  21. SC
  22. OBC
    23 UR
  23. UR
  24. UR
  25. OBC
  26. UR
  27. ST

यही क्रम 200 पदों तक चलता है। 200 पॉइंट के बाद फिर से 1 नम्बर से पदक्रम शुरू होता है। इसमें विश्वविद्यालय या संस्था को यूनिट माना जाता है। विश्वविद्यालय या संस्था के सभी विषयों को एक साथ जोड़ लिया जाता है।

अब 13 पॉइंट रोस्टर क्या है—
इस 13 पॉइंट रोस्टर में किसी भी विवि या संस्था के ‘विभाग’ को यूनिट माना जाता है। इसमें 14 पद के बाद फिर से पहले से पद को गिनती शुरू हो जाती है।

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इसमें इस तरह से गणना होती है—
पोस्ट कैटेगिरी

  1. अनआरक्षित (Genaral)
  2. UR
  3. UR
  4. OBC
  5. UR
  6. UR
  7. SC
  8. OBC
  9. UR
  10. UR
  11. UR
  12. OBC
  13. UR
  14. ST

14 के बाद फिर से 1 नम्बर से गणना शुरू हो जाती है।
पोस्ट कैटेगिरी

  1. अनआरक्षित (Genaral)
  2. UR
  3. UR
  4. OBC
  5. UR
  6. UR
  7. SC
  8. OBC
  9. UR
  10. UR
  11. UR
  12. OBC
  13. UR
  14. ST

200 पॉइंट रोस्टर और 13 पॉइंट रोस्टर के अंतर को ऐसे समझिए। पदों के बंटवारे में 200 पॉइंट रोस्टर में कटेगरी के हिसाब से पद संख्या 200 नम्बर तक जाएगा। इसी तरह से 13 पॉइंट रोस्टर में 14 के बाद फिर से 1 नम्बर से रोस्टर शुरू हो जाता है।

मान लिजिए देश के किसी भी विवि के किसी भी विभाग में 14 सीट कभी आएगी नहीं। जब भी किसी विभाग में पद निकाले जाएंगे, तो 1, 3, 4, 6 पदों पर भर्ती होगी। ऐसे में सबसे पहले 3 पद अनआरक्षित होंगे। उसके बाद चौथा पद OBC के लिए होगा।

फिर 5,6 नम्बर का पद जनरल होगा। इसके बाद 7 नम्बर का पद SC का है, 8वां पद फिर से OBC का होगा। फिर 9,10,11 नंबर का पद अनारक्षित, यानी जनरल होगा।

इसके बाद 12वें नम्बर का पद फिर से OBC का है। फिर 13वां पर जनरल का हो जायेगा। 14वें नम्बर के पद पर जाकर ST के लिए रिज़र्व होगा। उसके बाद फिर से 1 नम्बर से गिनती शुरू हो जायेगी।

—विवि को नहीं मानकर विभाग को यूनिट मानने पर कभी भी एक साथ 14 पद नहीं आएंगे। एससी—एसटी के लिए एक पद भी नहीं मिल पाएगा। जेएनयू, डीयू, एयू, एएमयू, बीएचयू, एचसीयू में कितने ऐसे विभाग हैं, जिसमें केवल एक या 2 या अन्तिम 3 प्रोफेसर ही विभाग को संचालित करते हैं। यहां कभी भी एससी, एसटी, ओबीसी की न्युक्ति हो ही नहीं सकती।

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—संस्थाओं के विभाग बहुत चालाकी से 1, 2, 3 पद निकलता है। जिस स्थिति में सबसे पहली हत्या ST की होती है। उसके बाद SC की, उसके बाद OBC के आरक्षण की हत्या होती है।

—संस्था में विभाग को यूनिट मानने पर कितने साल बाद ST का नम्बर आएगा। उसके बाद SC का नंबर आएगा। इसके बाद फिर OBC का नंबर आएगा। इसका अन्दाज ही नहीं लगाया जा सकता है।

—200 पॉइंट रोस्टर से पहले 13 पॉइंट रोस्टर था। इसी चलते OBC,SC,ST प्रोफेसर खोजने से भी नहीं मिलते। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में 2015 में यही 13 पॉइंट रोस्टर लागू किया गया था, जिसके कारण 84 असिस्टेंट प्रोफेसर पद में ST-SC का एक भी पद नहीं था। इसमें OBC का एक मात्र पद था।

—200 पॉइंट रोस्टर और 13 पॉइंट रोस्टर में जो सबसे ध्यान देने वाली पॉइंट ही हैं, कि 13 रोस्टर में 14 नम्बर के बाद फिर से 1,2,3,4, शुरू हो जाता है। और यह 14 नम्बर पर जाकर पुनः समाप्त हो जाता है।

—200 पॉइंट रोस्टर में एक से पद गणना शुरू होकर 200 तक जाता है। इसमें 200 के बाद पुनः 1,2,3,4,5,6,7 से क्रम शुरू होता है, जो 200 नम्बर तक जाता है। इसमें अनिवार्य रूप से ST,SC,OBC का पद क्रम आता ही है।

—इस 200 रोस्टर में यूजीसी, वीसी को आवश्यक रूप से विवि को ‘इकाई’ मानना पड़ता है। इस स्थिति में एससी, एसटी, ओबीसी के साथ लोकतंत्रीय, समाजिक और संवैधानिक तौर पर न्याय होता है।

—रिजर्व कैटेगिरी के अभ्यर्थियों का कहना है कि इसी 200 पॉइंट रोस्टर के लिए तब तक लड़ना है, जब तक इसे इस देश सभी विश्वविद्यालयों में लागू न कर दिया जाए।