13 पॉइंट रोस्टर ने उड़ाई एससी, एसटी, ओबीसी के अभ्यर्थियों की नींद

-रोक के बावजूद राजस्थान केंद्रीय विवि और हरियाणा के केंद्रीय विवि ने जारी किया रॉलिंग विज्ञापन

जयपुर। साल 2017 को इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी 22 जनवरी को विवि अनुदान आयोग और मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की एसएलपी का खारिज कर दिया।

जैसे ही शीर्ष अदालत ने इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले का जायज ठहराते हुए 13 पॉइंट रोस्टर लागू करने की बात कही, तो राजस्थान के केंद्रीय विवि और हरियाणा के केंद्रीय विवि ने अपने यहां शिक्षक भर्ती का रॉलिंग विज्ञापन जारी कर दिया।

मजेदार बात यह है कि विवि को इस मामले में इतनी जल्दी है कि आवेदन करने के लिए भी महज पांच दिन का समय दिया है, जबकि सामान्यत इतनी जल्दबाजी किसी विवि द्वारा नहीं की जा जाती है।

जल्दबाजी करने से जहां विवि की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं 18 विभागों में निकाली गई 33 भर्ती में 13 पॉइंट रोस्टर के मुताबिक भर्तियां करने से एससी, एसटी और ओबीसी को एक भी सीट नहीं मिल रही है।

मार्च 2018 में 700 पदों पर विवाद हुआ था, यूजीसी ने लगाई थी रोक

दरअसल, इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद मार्च 2018 में 11 विश्वविद्यालयों ने करीब 700 पदों पर भर्तियां निकाली थी, जिसमें राजस्थान विवि में भी 111 पद थे। साथ ही राजस्थान केंद्रीय विवि में भी 33 पदों पर भर्ती निकाली थी।

इन भर्तियों में आरक्षित वर्गों के लिए केवल 75 सीट थीं, जबकि आरक्षण के नियमानुसार 349 सीट आरक्षित होनी चाहिए थी। बाद में यूजीसी ने सभी को पत्र लिखकर इस भर्ती पर रोक लगा दी थी।

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यह है विवाद

आपको बता दें कि इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा साल 2017 में 200 पॉइंट रोस्टर की जगह 13 पॉइंट रोस्टर प्रणाली लागू की थी। जिसके तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान की शिक्षक भर्ती में संस्था को यूनिट नहीं मानकर विभाग को यूनिट मानना था।

इससे अधिकांश संस्थाओं में आरक्षण के संवेधानिक नियमा का उल्लंघन हो रहा था। असल में एक विभाग में कम से कम 13 पदों पर भर्ती होने पर ही आरक्षण लागू होता है। उससे पहले 200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम लागू था, जिसके तहत संस्था को यूनिट माना जाता है।

आरक्षण का लाभ ऐसे हुआ दूर

एससी को 15 फीसदी, एसटी को 7.5 प्रतिशत और ओबीसी को 28 फीसदी आरक्षण मिला हुआ है। ऐसे में हर चौथा पद ओबीसी, हर 8वां पद एससी और हर 13वां पद एसटी को मिलना है।

जबकि 90 फीसदी से ज्यादा भर्तियों में हर विभाग में 13 पदों पर भर्ती ही नहीं होती। जबकि संस्था को यूनिट मानने पर 200 पदों तक 1.2.3.4….में गिनती की जाती है। मतलब यह हुआ कि कम से कम 13 पदों पर भर्ती निकलने पर ही आरक्षित वर्ग को आरक्षण का लाभ मिल सकता है।

अध्यादेश की मांग, कल देशभर में प्रदर्शन

शीर्ष कोर्ट के द्वारा याचिका खारिज करने के बाद देशभर में आरक्षित वर्ग खासा नाराज है। इस बहुजन वर्ग ने केंद्र सरकार से इस मामले में अध्यादेश लाने की मांग की है।

कई सामाजिक संगठनों ने कल देशभर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने इसको गलत करार दिया तो एमएचआरडी फिर से उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर करने को कहा है।

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